BJP Congress

राजनीतिक हलकों में कहा जाता है कि बीजेपी हमेशा चुनाव के मूड में ही रहती है. जवाब में लोग फिर पूछ लेते हैं कि कांग्रेस ऐसा क्यों नहीं करती, उसे ऐसा करने से किसने रोका है? हालांकि दोनों ही बातों के लंबे और गहरे अर्थ हो सकते हैं.

बीजेपी से पूछा जा सकता है कि 5 साल चुनाव-चुनाव ही चिल्लाते रहोगे तो जनता के काम कब करेंगे? कांग्रेस से पूछा जा सकता है कि आपने अगर 5 साल काम ही किया था तो ज्यादातर चुनावों में हार क्यों जाते हो? सबके अपने अलग-अलग कारण हैं.

फिलहाल 9 राज्यों में होने वाले चुनावों के लिए बीजेपी ने बैठ के शुरू कर दी है. पिछले दिनों दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई थी. इसमें रणनीति बनाई गई थी. अपने परियों की पहचान भी की गई थी. अलग-अलग प्रदेशों के प्रभारियों की नियुक्तियां भी हुई. प्रभारियों के पीछे भी प्रभारी लगाए गए, जिन की निगरानी में इन राज्यों में दिल्ली की रणनीति को शब्द शह: लागू किया जाएगा.

दूसरी तरफ अगर कांग्रेस की बात की जाए तो 9 राज्यों के चुनाव को लेकर कोई हरकत दिखाई नहीं दे रही है. फिलहाल राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा चल रही है और उससे अलग हटके ना तो किसी कांग्रेसी को कुछ सोचने की फुर्सत है और ना ही किसी को कुछ करने की इजाजत है. यही हाल रहा तो ज्यादातर राज्यों में कांग्रेस का गुजरात जैसा हाल होने का खतरा बना रहेगा.

वैसे फिलहाल तो यही कामना की जा सकती है कि मल्लिकार्जुन खड़गे के हाथों में पार्टी की कमान दी गई है तो वह जो करेंगे या करवाएंगे, ठीक ही होगा. फिलहाल तो कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं का राहुल गांधी की यात्रा पर ही फोकस है. समझा जाता है कि इस यात्रा से पार्टी के कार्यकर्ताओं में नया जोश आया है. अगर यह सही है तो चुनाव में कांग्रेस को इसका कुछ तो फायदा जरूर होगा.

जिन 9 राज्यों में चुनाव की तैयारियां चल रही हैं उनमें मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ भी शामिल है. इन तीनों राज्यों को इसलिए प्रमुख समझा जा रहा है कि फिलहाल इन तीन में से दो में कांग्रेस की सरकार है. बीजेपी चाहेगी कि यह दोनों कांग्रेस शासित राज्य अब उसके हो जाए. लेकिन यह इतना आसान नहीं है जितना बीजेपी समझ रही है. खासकर छत्तीसगढ़ बीजेपी के लिए अब भी टेढ़ी खीर बना हुआ है.

देश में बीजेपी के सामने जनता के मुद्दों का पहाड़ खड़ा हुआ है. बीजेपी बेरोजगारी, महंगाई तथा तमाम जनता की समस्याओं से बेपरवाह चुनाव जीतने की मशीन बनी हुई है. वहीं कांग्रेस के नेता जनता के मुद्दों पर बात तो कर रहे हैं लेकिन चुनाव जीतने की कोई खास रणनीति कांग्रेस की तरफ से दिखाई नहीं दे रही है. अगर बिना रणनीति के चुनावी मैदान में कांग्रेस उतरती है तो उसे निश्चित तौर पर हार का सामना करना होगा.

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