Mallikarjun Kharge

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव का परिणाम आ चुका है. मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने शशि थरूर को हरा दिया है. वह छठे दक्षिण भारतीय अध्यक्ष बने हैं. उनसे पहले पीवी नरसिम्हा, राव एस निजलिंगप्पा, के कामराज, नीलम संजीव रेड्डी और पट्टाभि सीतारामय्या कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं. कांग्रेस अध्यक्ष पद के उम्मीदवार शशि थरूर ने अपनी हार स्वीकार कर ली और अपने प्रतिद्वंदी मल्लिकार्जुन खड़गे को बधाई दी है.

वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद के चुनाव हो रहे थे उसी वक्त से कुछ लोग कह रहे थे कि मलिकार्जुन खड़गे रिमोट कंट्रोल साबित होंगे. लेकिन मल्लिकार्जुन खड़गे कि राजनीतिक जीवन पर बात की जाए तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगता है. वहीं राहुल गांधी और सोनिया गांधी के स्वभाव को देखते हुए भी इसकी उम्मीद बिल्कुल नहीं है कि वह मलिकार्जुन खड़गे के काम में दखलअंदाजी करेंगे.

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हो रहे थे उसी वक्त खड़गे के प्रतिद्वंदी शशि थरूर ने उन्हें कांग्रेस के भीष्म पितामह बता चुके हैं. इससे पार्टी में खड़गे के कद और महत्व को समझा जा सकता है. कर्नाटक से ताल्लुक रखने वाले 80 वर्षीय खड़गे पिछले 50 वर्षों से चुनावी राजनीति में सक्रिय हैं. इतने लंबे राजनीतिक सफर में उन्होंने अपने नाम कई रिकॉर्ड दर्ज किए हैं. वह लगातार 10 चुनाव जीत चुके हैं. 8 बार विधायक और दो बार सांसद रहे खडके सिर्फ एक चुनाव हारे हैं, वह चुनाव था 2019 का लोकसभा चुनाव.

पिछले 24 वर्षों में पहली बार कांग्रेस की कमान गांधी परिवार से इतर किसी नेता के हाथ में गई है. कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में मल्लिकार्जुन खड़गे ने 7897 वोट हासिल किया है. वहीं शशि थरूर करीब 1000 वोट पाने में सफल हुए. खड़गे को शशि थरूर की तुलना में 8 गुना ज्यादा वोट मिले हैं. इस चुनाव में 416 वोट खारिज भी किए गए हैं. मलिकार्जुन खड़गे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दूसरे दलित अध्यक्ष है. 1970 से 1971 तक बिहार के जगजीवन राम कांग्रेस के पहले दलित अध्यक्ष के रूप में पद संभाल चुके हैं.

80 वर्षीय मलिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के सबसे प्रमुख दलित चेहरों में से एक है और कर्नाटक जैसे एक राज्य से ताल्लुक रखते हैं, जहां पार्टी की पकड़ बनी हुई है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में से कुछ लोगों का कहना है कि कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पकड़ जरूर कमजोर है लेकिन नेताओं के बीच उनका वर्चस्व बरकरार है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके अध्यक्ष बनने के बाद दलित और पिछड़े समाज के वह लोग जो पार्टी छोड़ कर चले गए थे, वह वापस लौट आएंगे. उनके अनुसार वह पार्टी और गांधी परिवार के बीच एक कड़ी की तरह है. उन्हें गांधी परिवार का रिमोट कंट्रोल कहना सही नहीं है.

मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कहा जाता है कि जब भी कांग्रेस कर्नाटक में सरकार में आए तब वह सीएम इन वेटिंग रहे. 2004 में उनका मुख्यमंत्री बनना लगभग तय था. लेकिन उनके दोस्त धर्म सिंह का नाम सामने आया तो मल्लिकार्जुन पीछे हट गए. 2013 में भी कांग्रेस विधायक दल के नेता चुने जाने वाले थे तब आखरी वक्त में सिद्धारमैया का नाम आगे कर दिया गया. 1980 में आर. गुड्डू राव सरकार में मंत्री बनने के बाद मल्लिकार्जुन सभी कांग्रेस सरकारों में मंत्री रहे.

मलिकार्जुन खड़गे के लिए सबसे बड़ा मौका 2014 में आया. कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हार मिली थी. वह सिर्फ 44 सीटों पर सिमट गई. गुलबर्गा से दूसरी बार जीतें खड़गे को पार्टी ने लोकसभा में अपना नेता बनाया. संसद में एक स्पीच के दौरान उन्होंने कहा हम लोकसभा में 44 हो सकते हैं लेकिन पांडव कभी कौरव से नहीं डरेंगे. मलिकार्जुन खड़गे के राजनीतिक इतिहास पर अगर गौर किया जाए तो उन्हें रिमोट कंट्रोल कहना या उन्हें कमतर आंकना बिल्कुल भी सही नहीं होगा.

खड़गे के सामने सबसे पहली चुनौती राजस्थान में जारी खींचतान को सुलझाना और मुख्यमंत्री के मुद्दे को सुलझाना होगा. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री सचिन पायलट दोनों ही जोर दे रहे हैं. पायलट चुप हैं और गहलोत कांग्रेस संस्कृति के विपरीत अधिक मुखर हैं. गांधी परिवार विद्रोह जैसी स्थिति से परेशान था लेकिन गहलोत ने आकर कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से माफी मांगी और यह तय किया कि अध्यक्ष के चुने जाने तक नेतृत्व के मुद्दे को ठंडे बस्ते में रखा जाएगा.

अब जब अध्यक्ष चुन लिया है भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने तो एक बार फिर से राजस्थान कांग्रेस का मुद्दा गरमा सकता है. अशोक गहलोत लगातार बयानबाजी कर रहे हैं और पिछले दिनों उन्होंने कहा था कि युवा कड़ी मेहनत कर सकता है लेकिन अनुभव का कोई विकल्प नहीं हो सकता. युवाओं को अपनी बारी का इंतजार करना चाहिए. अब मल्लिकार्जुन खड़गे राजस्थान को लेकर क्या फैसला लेते हैं यह देखना दिलचस्प होगा.

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