BJP-Modi

इस वक्त राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि बीजेपी (BJP) का केंद्रीय नेतृत्व दबाव में है, चिंता में है और इसके पीछे राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा तो है ही, लेकिन कहीं ना कहीं बीजेपी की अंदरूनी राजनीति भी करवट लेती हुई नजर आ रही है. पिछले 8 सालों में देखा जाए तो बीजेपी ने प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर हर चुनाव को बड़ी ही आसानी से जीत लिया, कुछ अपवाद को अगर छोड़ दिया जाए तो.

बीजेपी पिछले 8 सालों में छोटे से छोटा चुनाव भी प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर लड़ती रही है और जीतती रही है. पंचायत चुनाव में भी देखा गया है कि बीजेपी ने प्रधानमंत्री मोदी के नाम का सहारा लिया और राज्यों के नगर निगम चुनाव में भी बीजेपी ने प्रधानमंत्री मोदी के ही नाम पर वोट मांगा और अधिकतर जगह उसे जीत मिली. लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं.

बीजेपी की अंदरूनी राजनीति की अगर बात की जाए तो एक धड़ा 2024 के चुनाव के मद्देनजर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम को आगे बढ़ा रहा है. हालांकि उन्होंने कभी भी खुद को प्रधानमंत्री का दावेदार 2024 के लिए नहीं बताया. लेकिन उत्तर प्रदेश की सोशल मीडिया टीम पर अगर नजर डाली जाए तो वह लगातार सोशल मीडिया पर योगी को प्रधानमंत्री के दावेदार के रूप में पेश करती रही है.

प्रधानमंत्री मोदी दो बार लगातार केंद्र की सत्ता में अपने खुद के दम पर आए हैं. उन्होंने काम किया हो या ना किया हो लेकिन जनता के बीच उनकी लोकप्रियता ने उन्हें दो बार प्रधानमंत्री पद की कुर्सी तक पहुंचाया. लेकिन तीसरी बार यह करिश्मा वह पाएंगे या नहीं इस को लेकर बीजेपी के अंदर असमंजस की स्थिति है या यूं कहें कि डर समाया हुआ है. जनता इस वक्त प्रधानमंत्री मोदी की सरकार की नीतियों से त्रस्त है. इसके अलावा देश के अंदर पूछ ले कुछ सालों में नफरत का बोलबाला रहा है.

इस वक्त प्रधानमंत्री मोदी की सरकार Anti-Incumbency से भी जूझ रही है. 2024 तक यह और बढ़ेगी. इस बीच राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के जरिए कांग्रेस के अंदर एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया है और 2024 के लिए बीजेपी को चुनौती भी पेश कर दी है. अगर राहुल गांधी की “भारत जोड़ो यात्रा” से न्यूट्रल जनता में कुछ भी बदलाव आया तो 2024 में मोदी को प्रधानमंत्री पद की कुर्सी तक पहुंचने में खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

विपक्ष भी लामबंद हो रहा है और भारत जोड़ो यात्रा के जरिए अगर राहुल गांधी बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाने में कामयाब रहे तो निश्चित रूप से बीजेपी 2024 में सत्ता से बेदखल हो सकती है. महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और काले धन के नाम पर 2014 में मोदी प्रधानमंत्री बनने में कामयाब हो गए थे. लेकिन इन्हीं मुद्दों पर उनकी सरकार चारों तरफ से घिरी हुई है. रोजगार देने के मामले में यह सरकार फेल साबित हुई है. महंगाई को रोकने में भी नाकाम हुई है. भ्रष्टाचार को लेकर विपक्ष लगातार आरोप लगा ही रहा है. ऐसे में अगर जनता का झुकाव थोड़ा सा भी कांग्रेस की तरफ हुआ तो तीसरी बार मोदी का प्रधानमंत्री बनने का सपना धरा का धरा रह जाएगा.

ध्रुवीकरण वाले मुद्दों के सहारे बीजेपी पिछले कुछ सालों में कई चुनाव जीती है. 2019 का लोकसभा चुनाव तो मंदिर और धारा 370 के नाम पर ही जीत गए थे. लेकिन 2024 में बीजेपी अगर एक बार फिर से धार्मिक मुद्दों को आगे करके चुनाव जीतने की कोशिश करती है तो उसे नाकामी हाथ लग सकती है. क्योंकि जनता अब पिछले दो कार्यकाल का हिसाब मांगने के मूड में दिखाई दे रही है. महंगाई, बेरोजगारी से जनता त्रस्त दिखाई दे रही है और जब जनता जरूरी मुद्दों पर सवाल जवाब करेगी उस वक्त बीजेपी चुनाव जीतने की परिस्थितियों में नहीं रहेगी.

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