Pathaan Movie Saint Mahant Paramhans Das

बॉलीवुड के खिलाफ विरोध (Pathaan Movie Controversy) और बहिष्कार की मुहिम बहुत पहले से चल रही है, लेकिन मामला अब कहीं अधिक गंभीर हो रहा है. विरोध की आग में कुछ लोग और संगठन हिंसा का समर्थन करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं. यहां तक कि आग लगाने और जिंदा ज’लाने तक की बातें की जा रही हैं. हैरानी इस बात की है कि ऐसे बयान वह लोग दे रहे हैं जिन्हें अहिंसा की प्रतिमूर्ति माना जाता रहा है.

Pathaan Movie Controversy

शाहरुख खान की फिल्म “पठान” (Pathaan Movie) का गाना बेशर्म रंग (Besharam Rang | Pathaan) जब से रिलीज हुआ उस वक्त से ही दीपिका पादुकोण की बिकनी को लेकर बवाल मचा हुआ है. उसके बाद ‘झूमे जो पठान’ (Pathaan song Jhoome Jo Pathaan) गाने में शाहरुख का किलर लुक और शानदार डांसिंग मूव्स देख फैंस के दिलों की धड़कनें भी तेज हो गई. इस कॉन्ट्रोवर्सी का लाभ शाहरुख खान को मिला है. दूसरा गाना रिलीज हुआ और 30 मिनट के अंदर ही 1 मिलियन व्यूज मिल गए.

लेकिन इन सबसे इतर फिल्म पठान (Pathaan Movie 2022)  के खिलाफ अयोध्या के तपस्वी छावनी के संत महंत परमहंस दास (Saint Mahant Paramhans Das) ने कहा कि यदि फिल्म जिहादी शाहरुख खान उनको मिल गया तो वह उसे जिंदा जला देंगे. यदि उनको जलाने का साहस किसी और ने किया होता तो वह उसका मुकदमा खुद लड़ेंगे. दूसरी तरफ अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत राजू दास ने कहा कि जिस थिएटर में यह फिल्म लगेगी उसे हम लोग फूंक को देंगे.

इससे पहले अयोध्या के तपस्वी छावनी के संत महंत परमहंस दास की तरफ से कहा गया कि पठान फिल्म में भगवा का अपमान किया गया हैं. भगवा हनुमान जी का रंग है. भगवा सूर्य का रंग है. भगवा अग्नि का रंग है. भगवा विश्व शांति का प्रतीक है. सभी सनातन धर्म के मानने वाले लोगों की आन बान शान है. उन्होंने कहा कि बॉलीवुड के तीनों खान आमिर खान, शाहरुख खान और सलमान खान गंदगी फैला रहे हैं.

यह माना जा सकता है कि गलत बातों का विरोध बिल्कुल जायज है. हम सभी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में रह रहे हैं. हमारा संविधान हमें विरोध का अधिकार देता है, लेकिन विरोध के साथ हिंसा या हिंसक बातों का अधिकार बिल्कुल नहीं देता. धर्म के नाम पर हिंसा का खेल अब बंद होना चाहिए. हम 21वीं सदी में जी रहे हैं. चांद के बाद मंगल पर घर बसाने की बातें हो रही हैं. धरती के बाद अंतरिक्ष में नए-नए खोज हो रहे हैं. इन सबके बीच धर्म के नाम पर किसी का सिर क’लम कर देना, किसी की चमड़ी उधेड़ देने या किसी को ज’लाने की बात कहना कहां तक जायज है?

कुछ दिन पहले भी दूसरे धर्म के लोग भी नूपुर शर्मा को लेकर ऐसी ही बातें कर रहे थे अब सनातन संस्कृति से जुड़े हुए संत भी ऐसी ही बातें कर रहे हैं फिर बात करने वाले मौलानाओं में और संतों में क्या फर्क रह जाएगा? हम तो उन कट्टरपंथी मौलानाओं का भी विरोध करते हैं, जो जरा सी बात पर किसी का सिर कलम करने की बात करते हैं, किसी की जान लेने की सोचते हैं. हमारे समाज में संत महात्मा शांति के दूत रहे हैं. उनका तेज तो ऐसा रहा है कि उनके आगे हिंसक इंसान भी शांत हो जाता है.

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