Rahul Gandhi In Bharat Jodo Yatra

देश की राजनीति में हम 2014 से देख रहे हैं कि बीजेपी लगातार जीत रही है. बीजेपी ने देश में धर्मनिरपेक्षता पर पूरा माहौल बदल कर रख दिया है. अपनी ऐतिहासिक धर्मनिरपेक्षता से वोट घटने के डर से सॉफ्ट हिंदुत्व अपनाने के लिए कांग्रेस पार्टी की काफी आलोचना हुई थी. राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा ने कांग्रेस को साफ-सुथरी धर्मनिरपेक्षता की पटरी पर वापस ला दिया है. उन्होंने हिंदू राष्ट्रवाद से प्रेरित सांप्रदायिक घृणा की बार बार आलोचना की है.

लाल किले पर राहुल गांधी ने कहा कि हर मुद्दे पर ‘हिंदू-मुसलमान, हिंदू-मुसलमान, चिल्लाने से बड़े आर्थिक समस्याओं से ध्यान भटकता है. उन्होंने इन नफरती संदेशों को मात देने के लिए सद्भाव और संप्रदायिक प्रेम का आह्वान किया. यह हिम्मत दिखाने से संभवत तुरंत वोटों की बहार नहीं आ जाएगी लेकिन कांग्रेस की गिरावट रोकने में मदद जरूर मिल सकती है. इससे युवाओं का दिल जीतने में कांग्रेस को जरूर मदद मिलेगी, जब उन्हें लगेगा कि कांग्रेस राजनीतिक कीमत चुका कर भी सिद्धांतों के साथ खड़ी है.

कांग्रेस पार्टी को हाल ही में हिमाचल प्रदेश चुनाव में छोटी सी जीत मिली है. उसे बीजेपी के मुकाबले सिर्फ 1% ज्यादा वोट मिला है. यह 1% अधिक वोट संभवत यात्रा से राहुल गांधी के बढ़े कद के कारण मिला है. चुनावी अभियान की शुरुआत में ओपिनियन बीजेपी को आगे बता रहे थे. लेकिन यात्रा आगे बढ़ी तो कांग्रेस को ताकत मिल गई. राहुल गांधी की ‘पप्पू’ की छवि से कुछ और चीजों को बल मिला है. बीजेपी ने खुद माना की यात्रा का असर हुआ है. कुछ दक्षिण पंथियों ने कहा कि यात्रा को शहरी नक्सलियों, लुटियंस के रईसों और देश विरोधी ताकतों का समर्थन मिल रहा है. इन आरोपों से राहुल गांधी का संकल्प मजबूत होना चाहिए ना कि कमजोर.

कोई भी यात्रा जमीनी बदलाव की जगह ज्यादातर तमाशा ही होती है, लेकिन राहुल गांधी की यात्रा के साथ ऐसा नहीं है. राहुल गांधी को अपनी लंबी पदयात्रा से हुए लाभ को भुनाना होगा. सांप्रदायिक सद्भाव उनकी वापसी के एजेंडे का एक हिस्सा जरूर हो सकता है, लेकिन उन्हें मतदाताओं को और भी कारण बताने होंगे कि आखिर वह कांग्रेस को वोट क्यों करें. हालांकि जब नफरत का कारोबार हो रहा है तब सेक्युलरिज्म एक अच्छा प्रस्थान बिंदु है. हिंदू राष्ट्रवादी और दावा करते हैं कि सेकुलरिज्म को बढ़ावा देने से हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचती है.

कोई भी विद्वान आपको यही बताएगा कि हिंदुत्व सहिष्णुता का नाम है ना कि घृणा का. लेकिन हजारों ट्रोल नफरती भाषणों को हिंदुत्व का उत्थान और घृणा की आलोचना को पीड़ादायक हिंदू विरोधी गतिविधि मानते हैं. बिहार के आरजेडी नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने पिछले सप्ताह कहा कि मुसलमानों के लिए देश का माहौल इतना खराब है कि उन्होंने अपने बच्चों को विदेश में बसने की सलाह दी है.

बिहार बीजेपी ने हिंदू भावना को ठेस पहुंचाने के लिए सिद्दीकी को निशाना बनाया. उनकी पार्टी आरजेडी ने उनका समर्थन किया. लेकिन गठबंधन दल जेडीयू ने ना खुद को किनारे कर लिया बल्कि उन्हें यह कहने को भी मना लिया कि अगर किसी की भावना आहत हुई है तो वह अपने बयान के लिए माफी मांगते हैं. यह एक आजाद और खुले समाज के लिए हानिकारक परिस्थिति है. निश्चित रूप से माफी उन्हें मांगने चाहिए जिन्होंने सांप्रदायिक माहौल खराब किया है, ना कि जो इसके पीड़ित है.

राहुल गांधी को सेक्युलर पॉलिटिक्स के लिए और हिम्मत से आगे बढ़ना चाहिए और रक्षात्मक मुद्रा अपनाने की नीति त्याग देनी चाहिए. धर्मनिरपेक्षता एक सुंदर अवधारणा है इसके गुणों को चीख चीख कर बताना चाहिए.

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