Varun Gandhi Rahul Gnadhi

भारत जोड़ो यात्रा को राहुल गांधी और उनके साथ नफरत के खिलाफ एक मुहिम के तौर पर पेश कर रहे हैं. राहुल गांधी का दावा है कि सच्चाई के लिए वह यह लड़ाई लड़ रहे हैं और संघ बीजेपी मिलकर देश में नफरत फैला रहे हैं. जवाबी हमले में बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिया है. दिल्ली पहुंचते ही राहुल गांधी ने लाल किले से अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि वह नफरत फैलाते हैं और हम प्यार बांटते हैं। हम सभी भारतीयों को गले लगाते हैं.

बीजेपी की तरफ से कई नेताओं ने राहुल गांधी की इस यात्रा पर पलटवार किया और उनके द्वारा दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया दी. लेकिन बीजेपी के एक विधायक रमेश मेंदोला तो दो कदम आगे बढ़कर गांधी परिवार को ही नफरत के नाम पर नसीहत देने लगे. रमेश मेंदोला ने राहुल गांधी को लिखा अपना पत्र ट्विटर पर शेयर किया है, जिसमें वह अंग्रेजी कहावत ‘चैरिटी बिगिंस एट होम’ का हवाला देते हुए घर से ही नफरत कर करने की सलाह दे रहे हैं.

रमेश मेंदोला की सलाह है कि राहुल गांधी को अपनी चाची मेनका गांधी और चचेरे भाई वरुण गांधी के प्रति नफरत खत्म करनी चाहिए. आपको बता दें कि ब्रेक के बाद भारत जोड़ो यात्रा उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों से गुजरने वाली है. बीजेपी सांसद वरुण गांधी को लेकर समय-समय पर अलग-अलग कयास लगाए जाते रहे हैं और वह पिछले कुछ सालों से बीजेपी की ही सरकार यानी अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर होकर बयान बाजी भी करते रहे हैं.

पिछले दिनों ऐसी खबरें थी कि वरुण गांधी तृणमूल कांग्रेस यानी ममता बनर्जी की पार्टी ज्वाइन कर सकते हैं. ऐसे कयासों में उनके अपने ही परिवार की पार्टी कांग्रेस से लेकर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन करने तक की बातें पिछले महीनों में चल चुकी हैं. लेकिन अभी तक कोई ठोस रूप सामने नहीं आया है. लेकिन ऐसी चर्चाओं को बल इसलिए भी मिलता है क्योंकि वरुण गांधी काफी दिनों से बीजेपी नेतृत्व और यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ लोक हित से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं.

इंदिरा गांधी के परिवार से बेदखल किए जाने के बाद बीजेपी ही मेनका गांधी का मजबूत सहारा बनी. बीजेपी ने ही मेनका गांधी को केंद्र में सरकार बनने पर मंत्री भी बनाया और उनके बेटे वरुण गांधी को सांसद भी बनाया. लेकिन यह सब तब की बातें हैं जब राजनाथ सिंह के हाथों में कमान रही. मोदी शाह का दबदबा बढ़ने के साथ ही वरुण गांधी को हाशिए पर धकेल दिया गया.

2014 के चुनाव जीतने के बाद बीजेपी की सरकार बनने पर मेनका गांधी को भी मंत्री बनाया गया था. लेकिन 2019 का चुनाव आते-आते परिस्थितियां काफी प्रतिकूल हो गई और तब ऐसी खबरें आई कि बीजेपी नेतृत्व मां बेटे दोनों में से किसी एक को ही टिकट देना चाह रहा था.

इस बीच बहुत सारी बातें हुई. लेकिन 21 दिसंबर को कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में सोनिया गांधी ने इल्जाम लगाया था कि केंद्र सरकार सुनियोजित तरीके से न्यायपालिका को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, जो बहुत ही परेशान करने वाला है. सोनिया गांधी का कहना रहा कि सरकार जनता की नजर में न्यायपालिका की पोजीशन को कमतर बनाने का प्रयास कर रही है.

21 दिसंबर को ही इंडियन एक्सप्रेस में वरुण गांधी का न्यायपालिका को लेकर एक लेख प्रकाशित हुआ. न्यायपालिका की स्वतंत्रता सबसे ऊपर होनी चाहिए, अपना लेख वरुण गांधी ट्विटर पर भी पोस्ट करते हैं और लिखते हैं सशक्ति न्यायपालिका के बगैर लोकतंत्र कमजोर हो सकता है. निश्चित तौर पर वरूण गांधी वस्तुस्थिति की विस्तार से बात करते हैं और कई मामलों का उदाहरण देते हुए हाल में सरकार और सुप्रीम कोर्ट के रुख का भी बारी-बारी जिक्र करते हैं.

बाकी बातें अपनी जगह है. लाख टके की बात यह है कि वरुण गांधी साफ तौर पर सोनिया गांधी की बातों का सपोर्ट करते हैं. भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत से लेकर दिल्ली पहुंचने तक दक्षिण की राजनीति का ही दबदबा देखने को मिला है. भारत जोड़ो यात्रा निकलने से पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री इस यात्रा को रवाना किया था और दिल्ली में दाखिल होने से पहले उनकी बहन और डीएमके सांसद कनिमोडी को भी राहुल गांधी के साथ पदयात्रा में देखा गया. दिल्ली में तो राजनीतिक पारी पहले ही शुरू कर चुके कमल हसन भी डटे हुए दिखाई दिए.

दिल्ली में यात्रा के ब्रेक के बाद भारत जोड़ो यात्रा पश्चिम उत्तर प्रदेश के बागपत और कुछ हिस्सों से होकर गुजरने वाली है. यूपी में यात्रा का सफर 110 किलोमीटर का होगा. अखिलेश यादव, मायावती सहित कई नेताओं को इस यात्रा में शामिल होने के लिए न्योता भेजा गया है. माना जा रहा है कि आरएलडी नेता जयंत चौधरी भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हो सकते हैं. यूपी में कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद तैयारियों पर नजर रखे हुए हैं और प्रियंका गांधी के भी यात्रा में मौजूद रहने की बात है.

प्रियंका गांधी को 2019 में कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाए जाने के बाद वरुण गांधी के कांग्रेस के साथ आने के कयास लगाए जा रहे थे. प्रियंका गांधी और वरुण गांधी के अच्छे रिश्तो की दुहाई देते हुए दलीलें भी दी जा रही थी. एक बार फिर वैसी ही परिस्थितियां बन रही है, लेकिन यूपी कोई भारत जोड़ो यात्रा का अंतिम पड़ाव तो है नहीं. वरुण गांधी के कश्मीर तक पहुंच कर राहुल गांधी के साथ तिरंगा फहराने का स्कोर बचा हुआ है, बाकी होगा तो वही जो राहुल गांधी को मंजूर होगा.

वैसे भी राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा कर रहे हैं और नफरत को खत्म करने की बात कर रहे हैं और वरुण गांधी पिछले कुछ सालों से अपनी ही सरकार यानी बीजेपी की सरकार के खिलाफ मुखर होकर बयान बाजी कर रहे हैं और पिछले कुछ समय से लगातार सूत्रों के हवाले से ऐसी खबरें आ रही हैं कि वरुण गांधी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं. तो यह कोई अचंभित करने वाला निर्णय नहीं होगा अगर इस यात्रा में वरुण गांधी शामिल होते हुए दिखाई दे और अगर परिवार एकजुट होता है और वरुण गांधी कांग्रेस में शामिल होते हैं और राहुल गांधी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस यात्रा में चलते हैं तो निश्चित तौर पर 2024 के चुनाव में कांग्रेस मजबूती के साथ वापसी कर सकती है.

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