BJP.

2024 लोकसभा चुनाव को लेकर विपक्ष तमाम तरह के दावेदार रहा है और साथ ही साथ जनता से जुड़े हुए मुद्दों को उठा भी रहा है. विपक्ष की तरफ से लगातार कहा जा रहा है कि 2024 में मोदी प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे और बीजेपी (BJP) सत्ता में आने से चूक जाएगी. लेकिन बीजेपी ने 2024 का लोकसभा चुनाव जीतने के लिए अभी से कमर कस ली है. इसके लिए बीजेपी की रणनीति साफ दिखाई दे रही है. 2019 में बीजेपी जहां जीती थी प्रचंड बहुमत से जीती थी. जिस राज्य में हारी थी वहां पूरी तरीके से साफ हो गई थी.

10 राज्यों की लोकसभा सीटों पर बीजेपी ने एकतरफा कब्जा कर लिया था, जिसमें गुजरात और राजस्थान जैसे राज्य शामिल हैं. यहां विपक्ष को कोई सीट नहीं मिली थी. इसके अलावा 11 राज्य ऐसे थे जहां पर मोदी लहर का असर नहीं हुआ था और बीजेपी एक भी सीट नहीं जीत पाई थी, जिसमें केरल और तमिलनाडु जैसे राज्य शामिल हैं. बिहार तथा महाराष्ट्र में सहयोगियों तथा अपने दम पर बीजेपी ने बेहतर प्रदर्शन किया था. 2019 में जहां से खत्म हुआ था बीजेपी वहीं से शुरुआत करने के मूड में दिखाई दे रही है.

2019 के लोकसभा चुनाव में 144 सीटें ऐसी थी जहां बीजेपी नंबर 2 या फिर 3 पर थी. बीते मंगलवार को बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा और अमित शाह ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा की है. अगर मीडिया रिपोर्ट पर भरोसा किया जाए तो बीजेपी की तरफ से हारी हुई सीटों पर जीत कैसे सुनिश्चित हो इसकी जिम्मेदारी वरिष्ठ नेताओं को दी गई है और नड्डा तथा अमित शाह की मीटिंग में दी गई जिम्मेदारी का रिव्यू किया गया है. बीजेपी हारे हुए राज्यों पर फोकस नहीं कर रही है, बल्कि हारी हुई सीटों पर फोकस कर रही है. 2024 तक प्रधानमंत्री मोदी का कार्यकाल 10 साल का हो जाएगा.

2024 के लोकसभा चुनाव में तमाम राजनीतिक विश्लेषकों को और विपक्ष को भी यही लग रहा है कि सत्ता विरोधी लहर होगी. पिछले कुछ महीनों में बीजेपी के कई घटक दलों ने उसका दामन छोड़ दिया है. बिहार में नीतीश कुमार, महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे तथा पंजाब में अकाली दल के अलग हो जाने से बीजेपी का राजनीतिक समीकरण बिगड़ गया है. सत्ता विरोधी लहर तथा जो लंबे समय से बीजेपी के साथ गठबंधन में थे, उन दोनों का साथ छोड़ कर चले जाना यह बीजेपी को चिंता में डाले हुए हैं. इस वजह से अगर बीजेपी को इन राज्यों में नुकसान होता है तो इसकी भरपाई किसी दूसरे राज्य से बीजेपी करने की फिराक में है.

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से भी अमित शाह कहीं ना कहीं चिंतित होंगे, क्योंकि अगर 2019 के लोकसभा चुनावों पर अगर गौर किया जाए तो कांग्रेस लगभग 209 सीटों पर फाइट करने में कामयाब हुई थी और नंबर दो पर थी. ऐसे में अगर भारत जोड़ो यात्रा की तरफ जनता का जुड़ाव होता है तो इसका बहुत बड़ा खामियाजा 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को उठाना पड़ सकता है. इसलिए बीजेपी का पहला होकर उन सीटों पर है जहां वह नंबर 2 पर थी. फिर उनका फोकस नंबर 3 और 4 पोजीशन वाली सीटों पर होगा, ताकि 50-60 सीटें हारी हुई जगहों से मैनेज हो सके.

जिस दिन बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा और अमित शाह के बीच बैठक हो रही थी उसी दिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली में थे और विपक्ष के बीच भी हलचल दिखाई दे रही है. राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा पर हैं और महंगाई बेरोजगारी सहित जनता से जुड़े हुए तमाम मुद्दों पर वह बीजेपी को बैकफुट पर धकेलने में कामयाब हो रहे हैं. बीजेपी लंबे समय से मंदिर-मस्जिद, हिंदू-मुसलमान जैसे मुद्दों के सहारे चुनाव लड़ती रही है और जीत भी रही है. लेकिन एक ही मुद्दे पर हर बार जनता विपक्ष को नकार कर बीजेपी का साथ दे दे यह मुमकिन नहीं दिखाई दे रहा है. इसलिए बीजेपी ने इस बार मुद्दा ही चेंज कर दिया है और परिवारवाद के सहारे वह 2024 के लोकसभा चुनाव को जीतना चाहती है.

बीजेपी भ्रष्टाचार और परिवारवाद के मुद्दे पर विपक्ष को, खास तौर पर कांग्रेस को घेरने की कोशिश कर रही है. तो वहीं राहुल गांधी आज भी महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे पर रैली कर रहे हैं. बीजेपी विपक्ष की बनाई हुई पिच पर आना ही नहीं चाहती, उसके पास अपने मुद्दे हैं और उसे लगता है कि जनता महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को तवज्जो नहीं देगी और परिवारवाद के मुद्दे पर वह कांग्रेस को नकार देगी. बीजेपी इसी उम्मीद में शायद 2024 का लोकसभा चुनाव जीतने की फिराक में है. इसलिए अभी से वह उन सीटों पर फोकस कर रही है जहां 2024 में वह दूसरे नंबर पर थी.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here