Wednesday, February 14, 2024
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2024 का लोकसभा चुनाव जीतने के लिए बीजेपी किस हद तक जा रही है?

विपक्ष के गठबंधन को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर आपसी मतभेदों को भुलाकर विपक्ष एकजुट रहा तो निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाले बीजेपी गठबंधन के सामने चुनौती दे सकता है. विपक्षी गठबंधन की बैठकें अलग-अलग राज्यों में हो रही हैं. मुंबई में भी हाल ही में विपक्षी गठबंधन के नेताओं की बैठक हुई उसके बाद राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस भी हुई.

जिस वक्त पूरे देश और मीडिया की नजरे विपक्षी गठबंधन की बैठक पर थी उसी वक्त सरकार की तरफ से संसद का विशेष बुलाने का ऐलान किया गया. पूरे देश और मीडिया का फोकस विपक्ष की बैठक से शिफ्ट होकर सरकार द्वारा बुलाए गए विशेष सत्र पर आ गया.

अगर केंद्र की मोदी सरकार यह विशेष सत्र बुलाने का फैसला पहले से कर चुकी थी तब तो यह सामान्य बात है. लेकिन विपक्ष की बैठक से ध्यान हटाने के लिए अचानक से लिया गया फैसला अगर सरकार का यह है तो निश्चित तौर पर 2024 लोकसभा चुनाव में विपक्ष के बनने वाले गठबंधन से बीजेपी और यह सरकार घबराई हुई है.

अभी तो विपक्षी गठबंधन की कुछ बैठकें ही हुई हैं और सरकार ने गैस के दामों में कटौती कर दी है. उसके बाद मुंबई में होने वाली विपक्ष की बैठक के वक्त ही संसद का विशेष सत्र बुलाने का फैसला कर लिया गया. कहीं ना कहीं अगर यह पहले से लिया गया निर्णय नहीं है तो बीजेपी विपक्षी एकता से घबराई हुई है. 2024 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए वह कुछ भी करने को तैयार बैठी है.

सरकार द्वारा संसद का विशेष सत्र बुलाने का जैसे ही फैसला मीडिया में सुर्खियां बटोरने लगा वैसे ही तमाम राजनीतिक विश्लेषक और मीडिया के पत्रकार अलग-अलग कयास लगाने लगे. कुछ लोगों का कहना है कि संसद के विशेष सत्र में एक देश एक चुनाव का कानून ला सकती है सरकार. कुछ लोगों का कहना है की यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर भी सरकार फैसला ले सकती है.

इसके अलावा सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चाएं हैं कि 2024 का लोकसभा चुनाव जीतने के लिए केंद्र की मोदी सरकार की तरफ से यूनिफॉर्म सिविल कोड, एक देश एक चुनाव और राम मंदिर के उद्घाटन को मुद्दा बनाकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों को दबाया जा सकता है और जनता का ध्यान एक बार फिर से उसके जरूरी मुद्दों से हटाकर भावनात्मक मुद्दों पर शिफ्ट करके बीजेपी चुनाव जीतने का प्रयास कर सकती है.

कर्नाटक का विधानसभा चुनाव कांग्रेस ने जनता के मुद्दों पर लड़ा. महंगाई को मुद्दा बनाया, बेरोजगारी को मुद्दा बनाया. जनता को राहत देने की गारंटी देकर कर्नाटक का विधानसभा चुनाव कांग्रेस ने बीजेपी को हराकर जीत लिया. कर्नाटक की जनता से कांग्रेस ने जो वादे किए थे उसमें अधिकतर वादे कांग्रेस में सरकार बनने के कुछ दिनों बाद ही पूरे कर दिए.

कर्नाटक के विधानसभा चुनावों के बाद जनता अब अपने जरूरी मुद्दों पर लौटने लगी है. महंगाई की उसे फिक्र होने लगी है और यह बात केंद्र की मोदी सरकार भी महसूस कर रही है. इसीलिए उसने गैस के दामों में कटौती की है. हालांकि जिस वक्त दाम बढ़ रहे थे उस वक्त इसका ठीकरा प्राइवेट कंपनियों पर फोड़ा गया. लेकिन जैसे ही गैस के दामों में कटौती हुई, कहा गया कि मोदी जी ने जनता को राहत दी है, अपनी बहनों को रक्षाबंधन का तोहफा दिया है.

जिस वक्त महंगाई बढ़ रही है कहा जा रहा है कि सरकार के हाथ में नहीं है, लेकिन महंगाई अगर थोड़ी बहुत अचानक से कम की जा रही है तो इसका श्रेय मोदी जी को दिया जा रहा है. इन बातों को अब जनता अब समझ रही है और जो कुछ भी खेल महंगाई और बेरोजगारी से ध्यान भटकने के लिए पिछले 9-10 साल से खेला जा रहा है वह अब सरकार के काम नहीं आ रहा है.

विपक्ष का गठबंधन इस वक्त मजबूत दिखाई दे रहा है और अगर आपसी मतभेद को किनारे लगाकर जनता के मुद्दों पर विपक्ष ने चुनाव 2024 का लडा तो निश्चित तौर पर केंद्र की मोदी सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं. इसीलिए संसद का विशेष सत्र मोदी सरकार की तरफ से बुलाया गया है और अगर एक देश एक चुनाव की बात आती है तो निश्चित तौर पर यह बड़ा मुद्दा होगा. इसके अलावा राम मंदिर के उद्घाटन का मुद्दा भी चुनावों से ठीक पहले उछाला जा सकता है.

अब देखना है यह है कि विपक्ष का गठबंधन जनता को उसके मूल मुद्दे पर वोट देने के लिए प्रेरित कर पता है या फिर एक बार फिर से 2024 में बीजेपी जनता के तमाम मुद्दों पर विफल होने के बावजूद भावनात्मक मुद्दों पर वोट लेने में कामयाब हो पाती है?

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