Wednesday, February 14, 2024
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हाथ लग सकती है बड़ी निराशा?

बीजेपी इस बात को माने या ना माने लेकिन यह सच है कि इस वक्त उसके सामने विपक्ष का कोई सबसे बड़ा नेता चुनौती बना हुआ है तो वह सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी हैं. वैसे तो बीजेपी राहुल गांधी की छवि धूमल करने का प्रयास शुरू से करती रही है, लेकिन अब उसे वह सफलता हासिल नहीं हो रही है जो शुरुआत के दिनों मे हुई थी.

बेशक भारत जोड़ो यात्रा के बाद राहुल गांधी की छवि में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिल रहा है. जनता के बीच राहुल की स्वीकार्यता भी ढी है. राहुल कभी भी जनता के बीच पहुंच जा रहे हैं. कभी ट्रक ड्राइवर से उनकी बातचीत वायरल हो रही है, तो कभी स्टूडेंट के साथ चर्चा करते हुए नजर आ जाते हैं. इसके अलावा धान के किसानों के साथ उनकी मुलाकात भी काफी चर्चा में रही.

अभी कुछ ही दिन पहले एक सब्जी वाले का वीडियो खूब वायरल हुआ था. वीडियो वायरल होने के बाद पूरे देश से सहानुभूति सब्जी वाले को हासिल हुई थी. सोशल मीडिया के जरिए भी कई लोगों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया था. गरीब सब्जी वाले ने राहुल गांधी से मिलने की इच्छा जताई थी और उसके बाद राहुल गांधी से मुलाकात भी हुई.

राहुल गांधी सीधे जनता से कनेक्ट हो रहे हैं और उनकी इस छवि का सकारात्मक प्रभाव राजनीति में भी देखने को मिल रहा है, जो लोग राहुल गांधी की कभी आलोचना करते थे आज उनके मुरीद हुए जा रहे हैं. निसंदेह देखा जाए तो राहुल इस वक्त विपक्ष की सबसे बड़ी आवाज और और जिस तरह से उनको जनता का समर्थन मिल रहा है उससे सत्ताधारी दल काफी बेचैन भी नजर आ रहा है.

राहुल गांधी के समर्थकों को हो सकती है निराशा?

बीजेपी के सामने 2014 के बाद से अब तक कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है. यह बात निर्विरोध है कि चुनाव में अगर कोई गठबंधन बीजेपी को चुनौती दे सकता है, सत्ता से बेदखल कर सकता है तो उसमें कांग्रेस की भूमिका सबसे अहम होगी. यह भी सभी को मालूम है कि कांग्रेस इस वक्त ऐसी स्थिति में नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी पार्टी को अपने दम पर 2024 के चुनाव में शिकस्त दे दे.

अगर 2024 के राजनीति रण में केंद्र की मोदी सरकार को हराना है तो निश्चित तौर पर कांग्रेस को एक मजबूत गठबंधन तैयार करना होगा. हालांकि कांग्रेस ने ऐसा किया भी है, जिसमें नीतीश कुमार से लेकर ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल जैसे तमाम छत्रप शामिल है.

मजबूत रणनीति के साथ जनता को लेकर अगर कांग्रेस के नेतृत्व में यह गठबंधन जनता को साथ लेकर भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी को चुनौती देता है तो निश्चित तौर पर 2024 का लोकसभा चुनाव दिलचस्प होगा और हो सकता है कि यह गठबंधन बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को केंद्र की सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दे.

अगर यह गठबंधन 2024 के लोकसभा चुनाव को जीतकर केंद्र की सत्ता हासिल करता है तो प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार कौन होगा यह देखना दिलचस्प होगा. एक तरफ कांग्रेस के तमाम नेता और कार्यकर्ता यह चाहते हैं कि राहुल गांधी 2024 के चुनाव में देश के प्रधानमंत्री बने. दूसरी तरफ क्षेत्रीय पार्टियों के नेता और समर्थक अपनी-अपनी पार्टियों के नेताओं का नाम आगे कर रहे हैं, ऐसे में राहुल गांधी के लिए प्रधानमंत्री पद तक पहुंचाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है.

अगर कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन 2024 के चुनाव में सत्ता हासिल करने में कामयाब होता है तो कांग्रेस खुद राहुल गांधी के अलावा किसी और नाम पर दूसरी पार्टियों को सहमत कर सकती है. अभी आधिकारिक तौर पर ऐलान तो नहीं हुआ है लेकिन कांग्रेस के अंदर से ही इस वक्त कांग्रेस के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम सामने आ रहा है. तमाम राजनीतिक गलियारों में और सोशल मीडिया पर इस बात की चर्चा है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन अगर 2024 का चुनाव जीतने में सफल होता है तो वह देश को पहला दलित प्रधानमंत्री दे सकता है. ऐसे में राहुल गांधी के समर्थकों के हाथ में निराशा लग सकती है.

2004 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद सभी को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री सोनिया गांधी बनेगी. लेकिन अचानक ही डॉ. मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री बने और कांग्रेस के इस फैसले ने देश और दुनिया को चौंका दिया था. ठीक इसी तरह का फैसला 2024 में भी कांग्रेस की तरफ से देखने को मिल सकता है, अगर जनता कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन पर भरोसा जताती है तो.

राहुल गांधी की क्या हो सकती है भूमिका?

बीजेपी के साथ-साथ वह क्षेत्रीय दल भी राहुल गांधी के नाम पर सहमत होते हुए नजर नहीं आते हैं, जो इस वक्त कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हैं. राहुल गांधी को भले ही भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के नेता उतनी तवज्जो ना देते हो. लेकिन राहुल गांधी के बयानों का असर राजनीतिक गलियारों में सबसे तेज दिखाई देता है.

अगर 2024 का लोकसभा चुनाव विपक्ष जीतने में कामयाब होता है और राहुल गांधी के अलावा किसी और व्यक्ति के नाम पर प्रधानमंत्री पद के लिए सहमति बनती है तो निश्चित तौर पर उसमें राहुल गांधी की भूमिका काफी अहम होगी.

वैसे भी 2004 के बाद 2014 तक यूपीए की सरकार थी और राहुल गांधी ने उस सरकार में कोई भी पद नहीं लिया था. राहुल गांधी कोई भी मंत्रालय नहीं संभाल रहे थे या फिर 2009 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद भी राहुल गांधी प्रधानमंत्री नहीं बने. तो इस बार अगर 2024 में राहुल गांधी के पास ऐसा मौका आता है तो निश्चित तौर पर वह इसे ठुकरा सकते हैं.

2014 के बाद से ही कांग्रेस तथा राहुल गांधी की तरफ से जनता के मुद्दे उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है. लेकिन भारत जोड़ो यात्रा के बाद जनता के बीच राहुल गांधी की स्वीकार्यता बड़े स्तर पर देखने को मिल रही है और अगर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को 2024 में सरकार बनाने का मौका मिलता है तो उसे सरकार में जो फैसले होंगे उसमें राहुल गांधी की भूमिका निसंदेह नजर आएगी.

चाहे महंगाई का मुद्दा हो या फिर महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराध की बात हो या फिर युवाओं को सरकार की तरफ से मिल रही निराशा की बात हो, राहुल गांधी इन मुद्दों को उठाने में सबसे आगे रहे हैं और अगर 2024 में बीजेपी सत्ता से बेदखल होती है तो निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री कोई भी हो, कोई भी मंत्रालय किसी के भी पास हो, जनता को उम्मीद राहुल गांधी से ही होगी और राहुल को जानता की उम्मीद पर खरा उतरना होगा.

क्या सच में बदलाव के लिए तैयार दिखाई दे रही है जनता?

बस कुछ ही महीना के अंदर देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होंगे. इनमें राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना जैसे राज्य प्रमुख हैं. राजस्थान छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में कांग्रेस तथा भाजपा के बीच सीधी टक्कर देखने को मिलेगी. राजस्थान तथा छत्तीसगढ़ में इस वक्त कांग्रेस की सरकार है. वही मध्य प्रदेश में भी जनता ने कांग्रेस को जनादेश दिया था, बाद में बीजेपी ने तमाम हथकंडे अपना कर कांग्रेस के विधायकों को तोड़कर एक बार फिर से सरकार बना ली थी.

जो तमाम सर्वे इस वक्त मीडिया में दिखाए गए हैं उनमें छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से कांग्रेस की सरकार वापसी करती हुई नजर आ रही है. वहीं राजस्थान में भी कांग्रेस ने अपनी आपसी लड़ाई को लगभग खत्म कर दिया है और सचिन पायलट तथा गहलोत के एक होने से तमाम राजनीतिक विश्लेषक यह मान रहे हैं कि बीजेपी राजस्थान में कहीं भी टक्कर में नजर नहीं आ रही है.

बात अगर मध्य प्रदेश की करें तो पिछले चुनाव में भी मध्य प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को जनादेश दिया था, लेकिन फिर भी बीजेपी ने सरकार बना ली. इस बार मध्य प्रदेश के जो भी सर्व नजर आ रहे हैं या फिर जनता का जो मूड दिखाई दे रहा है, शिवराज सरकार के लिए खतरे की घंटी साफ नजर आ रही है. कांग्रेस बीजेपी से सीधी टक्कर में चुनाव जीते हुए नजर आ रही है. कमलनाथ के नेतृत्व में मध्य प्रदेश कांग्रेस एकजुट नजर आ रही है. सिंधिया के जाने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी लगभग खत्म हो चुकी है.

वही बात अगर तेलंगाना की की जाए तो बीजेपी यहां लड़ाई में कहीं है ही नहीं. तेलंगाना में KCR की पार्टी और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई है और इस बार तेलंगाना में भी कांग्रेस सरकार बनाने के दावे कर रही है. तमाम राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि कांग्रेस तेलंगाना का चुनाव जीत सकती है, तेलंगाना में कांग्रेस दिखाई दे रही है.

जिन राज्यों का जिक्र यहां हुआ है, अगर वहां सभी जगह बीजेपी चुनाव हार जाती है और कांग्रेस जोरदार वापसी करती है तो निश्चित तौर पर 2024 के लोकसभा चुनाव पर इसका असर साफ तौर पर देखा जाएगा और कांग्रेस एक मजबूत दावेदार के तौर पर उभर कर सामने आएगी. कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन भी कांग्रेस के नेताओं की बातों को गंभीरता से लेंगे और निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री उम्मीदवार कौन होगा 2024 के लोकसभा चुनाव में, इसको लेकर कांग्रेस की बात को तमाम उसके सहयोगी दल मानने पर मजबूर हो सकते हैं.

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