Mohan Bhagwat DP Flag

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रोफाइल पिक्चर में बदलाव किया है. दरअसल देश में इस समय हर घर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है. आजादी के इस महोत्सव में प्रधानमंत्री मोदी ने सभी से अपील की है कि वह अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल की तस्वीर तिरंगे में बदल लें. हर कोई अपने अपने हिसाब से तिरंगे का इस्तेमाल अपनी प्रोफाइल पिक्चर में कर रहा है.

कांग्रेस लगातार बीजेपी पर और आरएसएस पर हमलावर थी, यह कहते हुए कि प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बावजूद आरएसएस के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तिरंगा नहीं लगाया गया. प्रोफाइल पिक्चर में बदलाव नहीं हुआ. इसके साथ-साथ मोहन भागवत के सोशल मीडिया को लेकर भी कांग्रेस लगातार सवाल कर रही थी और इसके साथ साथ आरएसएस द्वारा तिरंगे का किए गए बहिष्कार की याद दिला रही थी.

राहुल गांधी तथा पूरी कांग्रेस लगातार तिरंगा अभियान को लेकर आरएसएस पर सवालिया निशान खड़े कर रहे थे और अब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत तथा आरएसएस के सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की प्रोफाइल पिक्चर में बदलाव किया गया है और तिरंगे को लगा दिया गया है. यह कहीं ना कहीं वैचारिक रूप से कांग्रेस की जीत दिखाई दे रही है. क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बावजूद आरएसएस और उसके पदाधिकारी अपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तिरंगे का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे और कांग्रेस के लगातार दबाव बनाने के बाद मोहन भागवत ने भी अपनी प्रोफाइल पिक्चर में बदलाव करके तिरंगा लगा दिया है.

आरएसएस पर आरोप लगते रहे हैं कि आजादी के बाद उसने तिरंगे का विरोध किया था और कहा था कि तिरंगा शुभ नहीं है. कई लोग यह भी आरोप लगाते हैं कि आरएसएस से जुड़े हुए लोगों ने तिरंगे को अपमानित किया था, जलाया था और यह भी एक तथ्यात्मक सच है कि आरएसएस के दफ्तरों में 52 साल तक तिरंगा नहीं फहराया गया और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चलाए गए तिरंगा अभियान के बावजूद संघ और उससे जुड़े हुए लोगों ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल मे बदलाव नहीं किया था.

लेकिन जिस तरह से कांग्रेस ने दबाव बनाया है वह कहीं ना कहीं कांग्रेस की वैचारिक जीत में तब्दील होता हुआ दिखाई दिया है. आरएसएस से जुड़े हुए ऑफिशियल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर से लेकर फेसबुक तक में बदलाव देखने को मिल रहा है. सभी में प्रोफाइल पिक्चर बदल कर तिरंगा लगा दिया है. कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया था.

यहां तक कहा जा रहा था कि आरएसएस ने कभी भी तिरंगे को पसंद नहीं किया. राहुल गांधी ने कहा था कि इतिहास गवाह है, “हर घर तिरंगा” मुहिम चलाने वाले उस द्रोही देशद्रोही संगठन से निकले हैं जिन्होंने 52 सालों तक तिरंगा नहीं फहराया. आजादी की लड़ाई से यह कांग्रेस पार्टी को उस वक्त भी नहीं रोक पाए और आज भी नहीं रोक पाएंगे. कुल मिलाकर कांग्रेस का दबाव साफ दिखाई दे रहा है तिरंगा मुहिम को लेकर आरएसएस और बीजेपी पर.

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