Modi Government ED

नेशनल हेराल्ड के कार्यालय पर ईडी (ED) की कार्रवाई के बाद सोनिया गांधी के आवास तथा कांग्रेस कार्यालय के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती पर कांग्रेस ने मोदी सरकार (Modi Government) पर निशाना साधा है. कांग्रेस ने कहा है कि यह कांग्रेस को धमकाने का प्रयास है और एक तरह से यह पार्टी की घेराबंदी की गई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा है कि कांग्रेस की घेराबंदी की जा रही है. दिल्ली पुलिस ने हमारे मुख्यालय, कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति के घरों को घेर लिया है. यह प्रतिशोध की राजनीति का सबसे खराब रूप है.

जयराम रमेश ने कहा कि हम झुकेंगे नहीं! हम चुप नहीं रहेंगे! हम मोदी सरकार (Modi Government) के अन्याय और विफलताओं के खिलाफ आवाज और अपना मुद्दा उठाना जारी रखेंगे. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि ईडी की कार्रवाई के बाद कांग्रेस की घेराबंदी की गई है. अब सवाल उठता है कि अचानक से ही पूरे देश में ईडी को लेकर इतनी हलचल क्यों है? खास तौर पर राजनीतिक गलियारों में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की जा रही कार्यवाही चर्चा में है. अचानक ही जैसे ईडी ने हलचल पैदा कर दी है.

मोदी सरकार (Modi Government) ने ED को फ्री हैंड दिया है. इसका मतलब क्या है?

देखा जाए तो अभी 2024 के लोकसभा चुनाव में काफी समय बचा हुआ है, लेकिन बीजेपी की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. इन सब के बीच जिस तरह से राजनीतिक गलियारों में ईडी को लेकर हलचल पैदा हुई है, उससे सवाल उठता है कि 2024 के चुनाव में बीजेपी (Modi Government) का मुख्य मुद्दा क्या होगा? किस मुद्दे को लेकर बीजेपी 2024 के चुनाव में जनता के बीच जाएगी? महामारी के दौर से देश धीरे-धीरे उबर रहा है. वैक्सीन को लेकर भी बीजेपी की तरफ से प्रचार जारी है. लेकिन क्या सिर्फ इसी के सहारे बीजेपी चुनाव मैदान में जाएगी?

ऐसा लगता नहीं है कि इन मुद्दों के सहारे ही बीजेपी (Modi Government) 2024 के चुनाव में जाएगी. बीजेपी जरूर किसी बड़े मुद्दे को लेकर 2024 के लोकसभा चुनाव की वैतरणी पार करने की कोशिश करेगी और हमेशा से बीजेपी ऐसे मुद्दों को लेकर चुनाव लड़ती है जिससे लोगों की भावनाएं अधिक से अधिक जुड़ी हुई हो. इस बार भी बीजेपी ने लोगों की भावनाओं से जुड़े हुए मुद्दों पर काम करना अभी से शुरू कर दिया है. खास तौर पर गरीब और मध्यम वर्ग की भावनाओं से जुड़े हुए मुद्दों पर बीजेपी आगे बढ़ती हुई दिखाई दे रही है.

BJP काले धन को बनाएगी मुद्दा? ईडी उसी काम पर लगी है?

राजनीतिक गलियारों में इस वक्त ईडी की गूंज है. बंगाल में अभी नोटों की गड्डीयो को देखकर लोगों का मुंह खुला का खुला रह गया. मेहनत मजदूरी करके जैसे तैसे अपना घर चलाने वाले लोग जब ऐसी तस्वीरें देखते हैं तो उनके सामने यही सवाल होता है कि इतना पैसा कैसे आया? इसके साथ ही ईडी की कार्रवाई महाराष्ट्र में भी जारी है. विपक्ष की ओर से कहा जा रहा है कि सरकार जानबूझकर निशाना बना रही है. हालांकि केंद्र सरकार द्वारा यह प्रचारित किया जा रहा है कि काले धन पर प्रहार किया जा रहा है. जनता का पैसा लूट कर बैठे लोगों पर कार्यवाही हो रही है.

ईडी के द्वारा जिन विपक्षी नेताओं पर कार्यवाही हो रही है उससे गरीब मध्यमवर्ग को यह दिखाने की कोशिश की जाएगी कि विपक्ष जब सत्ता में था या फिर जिन राज्यों में उनकी सरकार है वहां जनता का पैसा वह लूट रहे हैं. काले धन से जनता की भावनाएं जुड़ी हुई है और मीडिया के माध्यम से जब नोटों की गड्डियां दिखाई जा रही है घर-घर तक, तो जनता को यही लग रहा है कि मोदी ने जनता का पैसा लूटने वालों पर प्रहार किया है और एक तरह से एक बड़े वोट बैंक पर टारगेट किया गया है. जिस तरह से एक के बाद एक छापेमारी हो रही है उससे इस बात के संकेत साफ मिल रहे हैं कि आने वाले वक्त में यह चुनावी मुद्दा जरूर बनेगा और ऐसे मुद्दों से जनता की भावनाएं जुड़ी हुई होती हैं.

काले धन के नाम पर 2014 में भी बीजेपी ने सरकार बना ली थी. 2024 के चुनाव में जाने से पहले बीजेपी को एक ऐसे मुद्दे की तलाश थी जिससे कार्यकर्ताओं में उत्साह पैदा किया जा सके, आम जनता को यह लगे कि सरकार कुछ बड़ा कर रही है. बंगाल, महाराष्ट्र तथा दिल्ली इन सब जगहों पर ईडी की पूछताछ और कार्रवाई हो रही है. भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर सरकार काम कर रही है, यह जनता को अभी से दिखाने की कोशिश हो रही है. हालांकि विपक्ष का यही कहना है कि यह कार्यवाही एकतरफा हो रही है और राजनीतिक रूप से प्रेरित है.

ईडी को अचानक से मोदी सरकार (Modi Government) ने जिस तरह से फ्री हैंड दिया है उससे तमाम क्षेत्रीय दल भयभीत दिखाई दे रहे हैं. हालांकि कांग्रेस अभी भी सीना ताने हुए खड़ी दिखाई दे रही है, लेकिन कब तक यह आने वाला वक्त बताएगा. ईडी का मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था, लेकिन वहां भी ईडी की शक्तियां किसी प्रकार कम नहीं हुई. इसको लेकर कई विपक्षी दलों ने सवाल भी खड़े किए. ED की छापेमारी एक के बाद एक कई जगहों पर जारी है. ईडी की कार्यवाही के बाद दिल्ली में मंत्री सत्येंद्र जैन हिरासत में है. महाराष्ट्र के अंदर भी ईडी ने हड़कंप मचा हुआ है. संजय राउत कस्टडी में है.

प्रवर्तन निदेशालय द्वारा कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी तथा पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से भी पूछताछ हुई है, हालांकि ईडी के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन पूरे देश में जारी है. कांग्रेस इस पूरे मुद्दे पर एकजुट दिखाई दे रही है. लेकिन दूसरे क्षेत्रीय दल डरे हुए हैं, सहमे हुए हैं. बंगाल में भी ईडी ने हड़कंप मचाया हुआ है. पार्थ चटर्जी और उनकी सहयोगी अर्पिता चटर्जी के साथ नोटों के बंडल की चर्चा पूरे देश में है और इस काले धन के मुद्दे के सहारे मोदी (Modi Government) और उनकी पूरी पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव के समर में जाना चाहती है और इस जनता की भावनाओं से जुड़े हुए मुद्दे (काला धन) पर एक बार फिर से जीत हासिल करना चाहती है.

ED के सहारे जिस तरह से पूरे देश में छापेमारी हो रही है और नोटों के बंडल मीडिया के माध्यम से घर-घर तक दिखाए जा रहे हैं, उससे जनता के बीच यही संदेश देने की कोशिश हो रही है कि सरकार (Modi Government) काले धन पर तेजी से चोट कर रही है. बीजेपी के नेता जनता तक यही बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं कि काला धन भारत के मेहनती और संघर्षरत मध्यम और निम्न आर्थिक वर्गों का पैसा है जिसे विपक्ष ने लूटा है. बीजेपी की तरफ से यही बताने की कोशिश अब होगी कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भ्रष्टाचार पर चोट हुई है.

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