Amit-shah

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव (Assembly elections) की तैयारियों के बाद, भारी भरकम रैलियों के बाद, चुनावी प्रचार के बाद चार राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं. पश्चिम बंगाल में अभी कुछ चरण बचे हुए हैं, जिसके बाद पांचों राज्यों के चुनाव परिणाम 2 मई को जनता के सामने आएंगे.

तमिलनाडु, केरल, पांडिचेरी, असम के अंदर विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं, वोटों की गिनती और चुनाव परिणाम बाकी है. जैसे ही इन चार राज्यों में चुनाव संपन्न हुए थे, ठीक उसके बाद ईवीएम को लेकर खबरें आने लगी थी, वीडियो वायरल होने लगे थे. असम में तो भाजपा के उम्मीदवार की गाड़ी में जनता ने ईवीएम पकड़ी थी, जिसका वीडियो खूब वायरल हुआ था और सोशल मीडिया पर तरह तरह के कयास लगाए जाने लगे थे.

असम में भाजपा विधायक की गाड़ी में जो ईवीएम पकड़ी गई थी, उस पर चुनाव आयोग पूरी तरीके से बैकफुट पर था, चुनाव आयोग पूरी तरीके से घिर चुका था. चुनाव आयोग को जनता ने कटघरे में खड़ा कर दिया था. चुनाव आयोग को मजबूरी में बयान जारी करना पड़ा था और सफाई देनी पड़ी थी. हालांकि चुनाव आयोग ने जो तर्क दिया था वह तर्क जनता के गले नहीं उतर रहा था.

भाजपा उम्मीदवार की गाड़ी में जो ईवीएम पकड़ी गई थी, उसके वीडियो को और उस खबर को तमाम विपक्षी नेताओं ने मुद्दा बनाया था. प्रियंका गांधी ने तो उसको लेकर ट्वीट भी किया था और राहुल गांधी ने भी इस पर अपना बयान जारी किया था ट्विटर के माध्यम से. असम में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने पूरी ताकत झोंक दी थी. गोदी मीडिया द्वारा भी असम में भाजपा की एकतरफा जीत नहीं बल्कि कांटे की टक्कर दिखाई जा रही थी.

गोदी मीडिया अगर किसी राज्य में भाजपा की एकतरफा जीत नहीं, बल्कि कांटे की टक्कर दिखा रही हो तो इस स्थिति को समझा जा सकता है और ऐसे वक्त में ईवीएम को लेकर जो वीडियो वायरल हुए थे और खबरें सामने आ रही थी, उससे साफ पता चल रहा था कि असम में भाजपा चुनाव हार सकती है. असम में जो भाजपा के उम्मीदवार की गाड़ी में ईवीएम पकड़ी गई, उसके बाद से भाजपा भी सवालों के घेरे में थी, भाजपा की जीत भी सवालों के घेरे में थी.

ईवीएम को लेकर जो सवाल उठ रहे थे, चुनाव आयोग को जिस तरीके से कटघरे में खड़ा किया जा रहा था, चुनाव आयोग जिस तरीके से तर्क विहीन सफाई दे रहा था, चुनाव आयोग जिस तरीके से बैकफुट पर नजर आ रहा था. मौजूदा वक्त में खेल पलट चुका है. चुनाव आयोग से इस समय ईवीएम को लेकर कोई सवाल नहीं पूछ रहा है. असम के अंदर जो ईवीएम पकड़ी गई थी उसको लेकर कोई सवाल खड़े नहीं कर रहा है.

तमाम लोग ईवीएम से जुड़ी खबरों को और चार राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भूल चुके हैं. विपक्षी पार्टी के नेता भी इन बातों को भूल कर कोरोना वायरस से जुडी हुई खबरों को तवज्जो देने लगे हैं. देश इस समय महामारी से गुजर रहा है, इस पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं. सवाल यही है कि क्या अचानक से कोरोना वायरस ने रफ्तार पकड़ ली या फिर जानबूझकर एजेंडा सेट किया गया?

मीडिया में और सोशल मीडिया पर जिस तरीके से कोरोना वायरस की खबरों को लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को तवज्जो दी जा रही है क्या वह सब कुछ अचानक से हुआ या फिर एजेंडा सेट किया गया किसी के द्वारा? बहरहाल जैसी खबरें निकल कर सामने आ रही हैं, उससे यही पता चल रहा है कि कोरोना वायरस देश को अपने चुंगल में जकड़ रहा है. लोगों की जिंदगी खतरे में है. स्वास्थ्य सुविधाएं पूरे देश में पूरी तरीके से चरमरा गई हैं.

लेकिन फिर भी चुनाव आयोग बचे हुए बंगाल में चुनाव को कई चरणों की बजाय एक चरण में खत्म कराने से मना कर रहा है. प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लगातार रोड शो और रैलियां कर रहे हैं. पांचों राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम 2 मई को आ जाएंगे. 2 मई को पता चल जाएगा कि कौन से राज्य में किस पार्टी की सरकार बन रही है और कौन सी पार्टी हार रही है.

फिलहाल सभी का ध्यान लचर स्वास्थ्य व्यवस्था पर और लोगों की जिंदगी बचाने पर है. असम में ईवीएम मशीनों का क्या हो रहा है, किसी को कुछ भी पता नहीं. क्या उसके बाद कोई ईवीएम मशीन किसी उम्मीदवार की गाड़ी में नहीं ले जाई गई या फिर ले जाई गई और कोई खबर नहीं आई? क्योंकि सभी का ध्यान महामारी से लड़ने में और एक दूसरे के प्रति मानवता दिखाते हुए मदद करने में है.

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