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इस समय महामारी से देश ग्रसित है. लाखों लोग अपनी जान गवा चुके हैं और लाखों अब भी संक्रमित हैं. हर किसी के सर पर मौत मंडरा रही है. जिस तरह से वायरस अपना दायरा बढ़ा रहा है, कहा नहीं जा सकता कब किसके साथ क्या हो जाए.

जिस समय मौजूदा सरकार चुनावी रैलियां कर रही थी उस समय आने वाली मुसीबत से निपटने की तैयारी करनी चाहिए थी. जिस समय मौजूदा सरकार राज्यों के चुनाव जीतने में लगी हुई थी मीडिया का साथ लेकर, उस समय देश के नागरिकों की जिंदगी बचाई जा सके, इसकी कोशिश करनी चाहिए थी. लेकिन अफसोस सरकार चुनावी मोड में थी.

आज हर कोई परेशान है कई संगठन ऐसे मजदूरों की मदद करने में लगे हुए हैं. इसमें सबसे ऊपर यूथ कांग्रेस है. यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास और उनकी टीम राहुल गांधी के निर्देश पर बढ़-चढ़कर जरूरतमंदों की मदद कर रही है, चाहे वह ऑक्सीजन से संबंधित हो, बेड दिलाने से संबंधित हो या फिर प्लाज्मा की व्यवस्था करनी हो यूथ कांग्रेस हर मोर्चे पर तैयार नजर आ रही है.

लेकिन सवाल आज यूथ कांग्रेस या फिर दूसरे वह लोग, जो जरूरतमंदों के काम आ रहे हैं, उनसे नहीं है. सवाल आज उनसे है जो लंबे समय से देश में हिंदू और मुसलमान कर रहे थे. मंदिर के नाम पर देश की युवा पीढ़ी को गुमराह कर रहे थे. सवाल आज उनसे है जिनके लिए शिक्षा और स्वास्थ्य से जरूरी मंदिर था. सवाल आज उनसे है जो आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित करने की जगह देश में धर्म की अफीम की खेती कर रहे थे.

आज वह लोग कहीं नजर नहीं आ रहे हैं, जो मंदिर के नाम पर घर घर जाकर चंदा इकट्ठा कर रहे थे कुछ महीनों पहले. कहां हैं वह लोग जो जय श्रीराम के नारे लगाते हुए भगवा कपड़े पहन कर गली मोहल्ले तक जाकर लोगों के घर घर जाकर पर्ची काटकर चंदा ले रहे थे? चंदा इकट्ठा करने वालों को आपने ऑक्सीजन सिलेंडर बांटते हुए देखा क्या? चंदा इकट्ठा करने वालों को आज मुसीबत की घड़ी में मजदूरों की मदद करते हुए देखा क्या?

जो लोग घर घर जाकर जय श्री राम का नारा लगाकर मंदिर के नाम पर चंदा ले रहे थे, उन्हें अपने जरूरतमंदों को हॉस्पिटल में एडमिट कराते हुए देखा क्या? प्लाजमा की जरूरत जिन्हें थी क्या उन्हें इन लोगों ने प्लाज्मा मुहैया कराया क्या? जो लोग हॉस्पिटल के अंदर एडमिट भी नहीं हो पा रहे हैं, उन्हें बेड नहीं मिल पा रहा है, क्या चंदा इकट्ठा करने वालों ने उनकी कोई मदद की क्या?

मंदिर के नाम पर चंदा इकट्ठा करने वाले अगर देश की मुसीबत के समय घरों में बैठे हैं. जब देश की जनता ऑक्सीजन की कमी से मर रही है, सरकार की नाकामियों तले अपना दम तोड़ रही है, उस समय अगर मंदिर के नाम पर देश को गुमराह करके, मंदिर के नाम पर देश की जनता से चंदा लेने वाले घर बैठे हैं तो यही सही वक्त है ऐसे लोगों की पहचान करने का. देश के अंदर बड़े-बड़े ट्रस्ट हैं, धर्म के नाम पर बनाए गए हैं.

ट्रस्ट भगवान के नाम पर बनाए गए हैं और कई कथावाचक हैं, कई उपदेशक हैं, जो पहले मंदिर की पैरवी कर चुके हैं. लगातार टीवी पर आकर जहर भी उगलते रहे हैं. क्या ऐसे लोगों को भी आप लोगों ने इस महामारी के दौर में जरूरतमंदों की मदद करते हुए देखा है क्या? मंदिर और भगवान के नाम पर इन्होंने जनता का बहुत पैसा लूटा है. आखिर यह लोग देश के संकट काल में देश के लिए अपना पैसा क्यों नहीं निकल रहे हैं? बस ऐसे ही समझने की जरूरत है जनता को.

अगर ऐसे लोगों की पहचान इस वक्त जनता ने कर ली तो शायद आने वाली पीढ़ियां हिंदू मुसलमान मंदिर-मस्जिद के झगड़े से निकलकर शिक्षा और स्वास्थ्य की बातें करें. देश इस वक्त जिस मुसीबत में है उससे साफ पता चल रहा है कि इस देश को मंदिर मस्जिद की नहीं बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य की जरूरत है. क्योंकि मंदिर और मस्जिद के नाम पर लड़ाने वाली राजनीति ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को तबाह कर के रख दिया है.

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