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पिछले 7 साल में ऐसा देखने को नहीं मिला कि, भाजपा बल्क में हो रहे विधानसभा चुनाव (Assembly elections) में जीरो पर आउट हुई हो. भाजपा का विजय रथ लगातार आगे बढ़ता गया है. जनता के विरोध के बावजूद भाजपा विपक्ष और जनता के बिखराव का फायदा उठाकर जीतती रही है.

जहां पर जनता ने विपक्षी पार्टियों को सरकार बनाने का मौका दिया, वहां पर भी भाजपा (BJP) ने कमल खिला लिया. चाहे वह गोवा का मामला रहा हो या फिर कर्नाटक और मध्य प्रदेश का, यहां जनता ने कांग्रेस और कांग्रेस के गठबंधन को सरकार बनाने का मौका दिया लेकिन आखिर में सरकार बनाई भाजपा ने.

भाजपा पिछले 7 साल में साम दाम दंड भेद हर चीज का उपयोग करके केंद्र और राज्यों में सरकार बनाने का दंभ भरती रही और बनाया भी. दिल्ली एक अपवाद रहा, जहां पर फिर से आम आदमी पार्टी की सरकार चल रही है और अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री. लेकिन मौजूदा वक्त में जो चुनाव हो रहे हैं, चाहे वह असम का हो, पांडिचेरी का हो, तमिलनाडु का हो चाहे फिर केरल का हो या फिर पश्चिम बंगाल, इन पांचों राज्यों में भाजपा की हालत खराब है.

मीडिया में भले भाजपा को अधिकतर राज्यों में सरकार बनाते हुए दिखाया जा रहा है. लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है. पश्चिम बंगाल (West Bengal) में भाजपा ने पिछले कुछ समय से अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से लेकर नरेंद्र मोदी तक पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में काफी मेहनत करते हुए नजर आ रहे हैं. मीडिया भी भाजपा को पश्चिम बंगाल चुनाव में काफी कवर कर रही है.

मीडिया जितना भाजपा के नेताओं को कवर कर रही है, उतना विपक्ष के नेताओं को कवर नहीं कर रही है. चाहे वह ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) हो या फिर कांग्रेस (Congress) के नेता हो. भाजपा के नेता और मीडिया कुछ भी दावा करें लेकिन पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार नहीं बना पाएगी, जमीनी हकीकत भाजपा और मीडिया के दावे से उलट है. अधिक से अधिक भाजपा सीटे ले आती है तो वह पश्चिम बंगाल में विपक्षी पार्टी जरूर बन सकती है.

लेकिन जिस तरीके से कांग्रेस और लेफ्ट का गठबंधन जमीन पर प्रचार करता हुआ दिख रहा है उससे यह भी हो सकता है कि भाजपा तीसरे नंबर पर चली जाए पश्चिम बंगाल में. अगर बात असम (Assam) की करें तो भाजपा असम में NRC और CAA की बात नहीं कर रही है. असम में यह बड़ा मुद्दा था भाजपा के लिए. लेकिन भाजपा ने असम विधानसभा चुनाव प्रचार में इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है. असम में चाहे हिंदू हो या मुसलमान उन्हें डर है कि अगर भाजपा की सरकार बन गई तो भाजपा NRC लागू करेगी.

क्योंकि भाजपा की सरकार रहते हुए NRC लागू हुआ था. जिसमें 17 लाख से अधिक हिंदू बाहर हो गए थे. भाजपा का यह प्रयोग असम में पूरी तरीके से फेल साबित हुआ था. असम में चाहे हिंदू हो या फिर मुसलमान कांग्रेस के गठबंधन का खुलकर सपोर्ट कर रहे हैं. भाजपा के आने से असम की जनता के बीच में डर फैल जाएगा. इसलिए जनता से बात करने पर यही लग रहा है कि भाजपा की वापसी असम मे मुमकिन नहीं है.

बात अगर केरल (Kerala) की कि जाए तो केरल में भाजपा कहीं दिखाई ही नहीं देती है. केरल में हर 5 साल में सरकार बदलती है. कभी लेफ्ट के नेतृत्व में सरकार बनती है तो कभी कांग्रेस के नेतृत्व में. इसलिए केरल में सरकार बनाने के बारे में अगर भाजपा सोच रही हो तो यह मुमकिन नहीं है. तमिलनाडु (Tamil Nadu) में स्टालिन के नेतृत्व में कांग्रेस का गठबंधन जोर शोर से चुनाव प्रचार में लगा हुआ है. भाजपा गठबंधन भी तमिलनाडु में अपनी पूरी ताकत झोंके हुए हैं.

लेकिन मौजूदा माहौल को देखकर यही लग रहा है कि स्टालिन के नेतृत्व में कांग्रेस का गठबंधन इस बार बाजी मार ले जाएगा. अगर बात पांडिचेरी को लेकर की जाए तो चुनाव की घोषणा से पहले से ही पांडिचेरी में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है. उससे पहले पांडिचेरी में कांग्रेस की सरकार थी. सरकार को अस्थिर करके वहां पर भाजपा ने पिछले दरवाजे से राष्ट्रपति शासन लगवा दिया.

अगर तमिलनाडु कांग्रेस का गठबंधन जीत लेता है, तो पांडिचेरी (Pondicherry) भी कांग्रेस के हाथ में आ जाएगा और दोबारा से वहां कांग्रेस के शासन देखने को मिल सकता है. मीडिया से उलट और भाजपा के दावों के विपरीत भाजपा पांचो राज्य हार सकती है और यह भाजपा के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं होगा. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उनके करियर की सबसे बड़ी हार होगी और यही अमित शाह के लिए भी कहा जा सकता है.

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