Abhinav Pandey
फोटो साभार सोशल मीडिया

देश में इस समय दहशत का माहौल है कोरोना वायरस के रोजाना बढ़ते औसतन साढे तीन लाख से अधिक मामलों ने देशवासियों को मुश्किल में लाकर खड़ा कर दिया है. दिन प्रतिदिन यह वायरस लोगों की जिंदगी निगल रहा है.

ऑक्सीजन की किल्लत अभी भी पूरे देश में बनी हुई है. ऑक्सीजन की कमी से देश के अलग-अलग हिस्सों में, अलग-अलग अस्पतालों में लोगों की जान जा रही है. तमाम राज्य सरकारें और केंद्र सरकार कुछ भी दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन सरकारों के दावे से बिल्कुल उलट हैं.

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि कोविड-19 से निपटने में मोदी सरकार पूरी तरीके से फेल साबित हुई है. मोदी सरकार के मंत्री और खुद प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह कोरोना वायरस के खिलाफ जीत के दावे कर रहे थे. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तो ऑक्सीजन को लेकर झूठ बोल रहे हैं, उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन की कहीं कोई कमी नहीं है.

इन सबके बीच दिल्ली की हालत भी बद से बदतर होती जा रही है. दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी किल्लत है. दिल्ली में मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. दिल्ली में मरने वालों की संख्या भी बढ़ रही है, अरविंद केजरीवाल की सरकार भी इस वायरस से निपटने में पूरी तरीके से फेल साबित हुई है. केजरीवाल सरकार प्रचार में रह गई और अब जनता बेहाल हो रही है.

केजरीवाल सरकार को फटकार लगाते हुए हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है. हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए पूछा कि, अगर आपसे नहीं संभल रहा तो केंद्र को जिम्मेदारी दे दें? बता दें कि न्यायपालिका सरकारों के रवैए के खिलाफ पूरी तरीके से सख्त बनी हुई है. न्यायपालिका लगातार वायरस के खिलाफ लड़ने में की गई चूक को लेकर कड़ी टिप्पणी कर रही है.

हाईकोर्ट द्वारा की गई टिप्पणी को लेकर एबीपी न्यूज़ के पत्रकार अभिनव पांडेय ने ट्वीट किया कि हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि- अगर आपसे नहीं संभल रहा तो केंद्र को जिम्मेदारी दे दें? मैं तो कहता हूं दे देना चाहिए. कम से कम यूपी की तरह दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी तो दूर हो जाएगी. डबल इंजन की ताकत मिल जाएगी.

बता दे कि अभिनव पांडेय ने अपने ट्वीट के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार पर तंज किया है. उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार है और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं. उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन की भारी किल्लत है. उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है. सरकार नाकाम है, फिर भी मुख्यमंत्री जमीनी हकीकत से उलट बयान बाजी कर रहे हैं.

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