Abhinav Pandey
फोटो साभार सोशल मीडिया

कोरोना ने देश के हेल्थ सिस्टम को बेनकाब कर दिया है. ऐसा लग रहा है कि कोरोना की पहली लहर का सबक मोदी सरकार ने नहीं लिया. दिल्ली से लेकर अहमदाबाद, सूरत तक हर जगह लोगों की एक ही शिकायत है बेड नहीं मिल रहे हैं, ऑक्सीजन नहीं मिल रही है.

सुविधाएं न मिलने के कारण मरीज एंबुलेंस में दम तोड़ रहे हैं. गुजरात के बनासकांठा जिले के पालनपुर के सिविल अस्पताल में बेड ना मिलने से बीमार शख्स ने एंबुलेंस में दम तोड़ दिया. 2014 विधानसभा चुनाव के समय गुजरात मॉडल (Gujarat model) की बहुत बात हुआ करती थी, लेकिन आज इस पर कोई बात नहीं होती है.

कोरोना का कहर वैसे तो पूरे देश में जारी है, लेकिन पूरे गुजरात और खास तौर पर अहमदाबाद, सूरत से भयावह तस्वीरें सामने आई है. अभी तक जहां मृतकों के परिजन अपनों के शव के लिए कतार लगाकर बैठे हैं, अपनों के इलाज का इंतजार करने वाले आज अपनों की लाश समेटने का इंतजार कर रहे हैं.

अस्पताल के गेट पर स्पीकर से मृतक के नाम का ऐलान तक हो रहा है और रोते बिलखते परिजन लड़खड़ाते कदमों से लाश लेने चल देते हैं. सिहरन पैदा कर देने वाली यह तस्वीरें अहमदाबाद के सिविल अस्पताल से आ रही हैं. इन्हें देख कर किसी का भी कलेजा फट जाए. अगर सरकार ने ध्यान दिया होता तो जाने बचाई जा सकती थी.

गुजरात मॉडल पर ही एबीपी न्यूज़ के पत्रकार अभिनव पांडेय ने एक ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा है कि गुजरात मॉडल ध्वस्त हो चुका है, उस मॉडल की मीनारों पर लाशें ही लाशें लटक रही हैं, अहमदाबाद, सूरत में एंबुलेंस की कतारें नेताओं के काफिले से बड़ी हो चुकी हैं. जब विकास का केंद्र ऐसा है तो बाकी देश की कल्पना करना बेमानी हो जाता है.

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