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पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म हो चुके हैं. पांच राज्यों में सबसे रोचक और दिलचस्प तथा पूरे देश की निगाहें जिस राज्य पर टिकी हुई थी वह था पश्चिम बंगाल तथा इसके अलावा उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव.

पूरे देश में कोरोना अपना कहर बरपा रहा था और अभी भी बरपा रहा है. लेकिन जिस वक्त पश्चिम बंगाल के अंदर विधानसभा चुनाव के अलग-अलग चरण को लेकर चुनावी रैलियां तथा रोड शो हो रहे थे, उस वक्त प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री अमित शाह की लगातार आलोचना हो रही थी.

राहुल गांधी ने शुरुआत की थी. राहुल गांधी ने कहा था कि वह पश्चिम बंगाल की अपनी सारी रैलियों को स्थगित कर रहे हैं. कांग्रेस पश्चिम बंगाल बुरी तरीके से हार गई, लेकिन कहीं ना कहीं कांग्रेस ने एक मैसेज जरूर दिया था कि चुनावी जीत से कहीं अधिक कांग्रेस को जनता की जान प्यारी है.

प्रधानमंत्री लगातार लाखों की भीड़ इकट्ठी करके चुनावी रैलियां करते रहे. गृह मंत्री अमित शाह लगातार रोड शो करते रहे. नतीजा यह निकला कि पूरे देश के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में कोरोना लगातार तबाही मचा रहा है. प्रधानमंत्री की आलोचना हुई, लेकिन प्रधानमंत्री नहीं माने. प्रधानमंत्री मोदी लाखों की भीड़ देखकर मंच से खुशी का इजहार करते रहे.

विधानसभा चुनाव और पंचायत चुनाव को लेकर चुनाव आयोग भी जनता के निशाने पर था. जिस तरीके से चुनाव आयोग का रवैया रहा है उसको लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल दागे. लेकिन चुनाव आयोग इन चुनावों में सत्ताधारी पार्टी के सामने असहाय नजर आया. चुनाव आयोग प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की चुनावी रैलियों और रोड शो पर किसी भी तरीके की पाबंदी लगाने में नाकाम रहा.

अब चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के सामने दलील दे रहा है. सुप्रीम कोर्ट के सामने आखिर चुनाव आयोग के मुंह से सच्चाई निकल गई. कह दिया “हम चुनाव कराते हैं, अगर दूर के इलाके में प्रधानमंत्री मोदी 2 लाख लोगों की रैली करें तो भीड़ पर गोलियां नहीं चलवा सकते” चुनाव आयोग भी असहाय निकला.

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