EVM Latest News Akhilesh Yadav

इस बार सबूतों के साथ आरोप गंभीर लगे हैं. पहले भी वीडियो वायरल (Video viral) होते रहे हैं. लेकिन इस बार सबूतों के साथ वायरल हुए हैं, रंगे हाथों पकड़े गए हैं. पहले जो सबूत है और जो आरोप लगे हैं उसको पढ़िए और उसके बाद फिर नीचे कुछ सवाल है जो गंभीर हैं उसको समझना जरूरी है.

ईवीएम (E.V.M.)

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने एक वीडियो दिखाते हुए कहा है कि, इसमें साफ तौर पर दिखता है कि यूपी में ईवीएम (E.V.M.) चोरी हुई है. उन्होंने यूपी में ईवीएम के रख-रखाव, प्रबंधन और चुनाव आयोग के अधिकारियों को लेकर कई सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा है कि एग्जिट पोल के नतीजे इसलिए बीजेपी के पक्ष में दिखाए जाते हैं ताकि ईवीएम की गड़बड़ियों को ढका जा सके.

उत्तर प्रदेश में काउंटिंग से पहले ही ईवीएम और बैलट बॉक्स की छेड़छाड़ को लेकर मंगलवार को उत्तर प्रदेश के 5 शहरों में जमकर हंगामा हुआ है. सबसे ज्यादा बवाल वाराणसी में हुआ है. वाराणसी में पहाड़िया मंडी स्थित स्ट्रांग रूम के बाहर एक गाड़ी में ईवीएम मिली यह खबर लखनऊ पहुंची तो अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उधर हजारों की संख्या में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता पहाड़िया पहुंच गए और खूब हंगामा किया.

वाराणसी प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र है और यहां पर बीजेपी की हालत इतनी खराब थी कि प्रधानमंत्री मोदी को बनारस में डेरा डालना पड़ गया. हालांकि प्रधानमंत्री मोदी के रोड शो में जमकर भीड़ दिखाई दी थी. लेकिन अब जो ईवीएम को लेकर वीडियो सामने आए हैं वह कई तरह के सवाल खड़े कर रहे हैं चुनाव आयोग पर.

समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता जब पहाड़िया स्थित स्ट्रांग रूम पर पहुंचे तो उन्होंने डीएम को ही घेर लिया. बवाल बढ़ता देख 15 थानों की फोर्स को मौके पर बुलाना पड़ गया. इसके बाद अर्धसैनिक बल की टीम पहुंची और डीएम को कैंपस के अंदर सुरक्षित स्थान पर ले गई. देर रात कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने कहा कि ईवीएम मूवमेंट प्रोटोकॉल में चूक हुई है, जिसकी रिपोर्ट आयोग को भेजी गई है. वहीं डीएम कमिश्नर को मतगणना प्रक्रिया से बाहर करने की अब जरूरत से मांग की गई है.

सवाल यह उठता है कि जिस चूक की बात कमिश्नर दीपक अग्रवाल कर रहे हैं, अगर लोगों की नजर में यह घटना नहीं आती, तो भी चूक की बात कमिश्नर कबूल करते या फिर इसको दबा दिया जाता? ईवीएम को लेकर आखिर बार-बार चूक क्यों हो रही है? कहीं यह जानबूझकर तो नहीं किया जा रहा है? सवाल तो सोशल मीडिया पर यह भी उठाया जा रहा है कि यह सब कुछ एक पार्टी विशेष को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है, यह चूक जानबूझकर हुई है. क्या इन सवालों के जवाब हैं कमिश्नर के पास?

प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के अलावा बरेली में भी कूड़े की गाड़ी में बैलट बॉक्स से भरे हुए तीन बॉक्स मिलने पर देर रात तक हंगामा हुआ है. सोनभद्र में भी बैलेट पेपर बदलने का आरोप समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने लगाया है.

सुल्तानपुर में हंगामा

सुल्तानपुर के लंभुआ से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी तथा पूर्व विधायक संतोष पांडे ने एक वीडियो अपने फेसबुक पेज पर शेयर किया है. जिसमें एक डीसीएम पर कुछ बॉक्स लदे हुए थे. वीडियो के वायरल होते ही समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता मंडी गेट पर पहुंचे और हंगामा करने लगे. खबर मिलते ही एसएसपी विपुल श्रीवास्तव भारी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे. उन्होंने किसी भी प्रकार की धांधली की बात को सिरे से खारिज कर दिया है.

उधर पूरे मामले पर डीएम रवीश गुप्ता ने कहा है कि केंद्रीय विद्यालय में जो ईवीएम के खाली बॉक्स से उन्हें मंडी में शिफ्ट कर रहे थे. इस पर विरोध होने पर निर्देश दिए गए हैं कि 11 से पहले वहां कोई मूवमेंट नहीं करना है.

सवाल मुद्दे का

हर चुनाव के बाद ठीक इसी तरह से अलग-अलग जगहों पर कभी बैलट बॉक्स पाए जाते हैं तो कभी ईवीएम मशीनें पाई जाती है. असम में तो बीजेपी प्रत्याशी की गाड़ी में ईवीएम मशीन पाई गई थी. उत्तर प्रदेश में भी दूसरी गाड़ियों में ईवीएम मशीनें मिल रही हैं, विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं. अगर ईवीएम मूवमेंट का निर्देश चुनाव आयोग की तरफ से रहता है तो इसको सार्वजनिक चुनाव से पहले क्यों नहीं किया जाता?

अगर गाड़ियों में ईवीएम ले आई ले जाई जाती है तो इसकी जानकारी उससे पहले सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती? अगर मूवमेंट की जानकारी सार्वजनिक कर दी जाएगी तो ईवीएम को लेकर सवाल खड़े नहीं होंगे. अगर नहीं की जा रही है, इसका मतलब सच में ईवीएम के साथ कुछ धांधली हो रही है?

ईवीएम के साथ छेड़छाड़ के वीडियो आते हैं. ईवीएम स्ट्रांग रूम से बाहर मिलती है. ईवीएम दूसरी गाड़ियों में लदी हुई पाई जाती है, वीडियो वायरल होते हैं और अगर इस पर विपक्षी पार्टी के नेता सवाल उठाते हैं तो मीडिया के द्वारा और बीजेपी के नेताओं के द्वारा उनका मजाक उड़ाया जाता है, यह कहते हुए की हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ रहे हैं या फिर जीत नहीं पाए तो ईवीएम को दोष और यह कहकर बात को दबाने की कोशिश की जाती है, विपक्षी पार्टी के नेताओं को चुप कराने की कोशिश की जाती है.

लेकिन असल सवाल छूट जाता है अगर ईवीएम मशीन ए स्ट्रांग रूम से बाहर पाई जाती है दूसरी गाड़ियों में मिल रही है कूड़े के ढेर में मिल रही है तो इसकी जवाबदेही किसकी है कहां चूक हो रही है जवाब कौन देगा? मीडिया द्वारा कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव ने लगाया आरोप या फिर किसी और विपक्षी पार्टी के नेताओं द्वारा कुछ आरोप लगाए जा रहे हैं तो मीडिया उनका नाम लेकर कह रही है कि इनके द्वारा आरोप लगाया जा रहा है.

लेकिन क्या मीडिया यह आरोप चुनाव आयोग पर नहीं लगा सकती? मीडिया इसकी छानबीन नहीं कर सकती? मीडिया सिर्फ एक पार्टी विशेष का प्रचार करने के लिए है? सच क्या है, झूठ क्या है, ईवीएम को लेकर, ईवीएम मशीनों के बाहर लाने और ले जाने को लेकर, इसकी जानकारी मीडिया क्यों नहीं दे रहा है?

बीजेपी के तमाम बड़े नेता, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, अनुराग ठाकुर, यह सभी लोग अखिलेश यादव का मजाक उड़ा रहे हैं और कह रहे हैं कि हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ने की कोशिश कर रहे हैं अखिलेश यादव. लेकिन बीजेपी की सरकार में तमाम वीडियो आ रहे हैं, वायरल हो रहे हैं, इसकी जांच क्यों नहीं करवाने की बात हो रही है? अगर जांच हो जाएगी तो सब कुछ सामने आ जाएगा. अखिलेश यादव का मजाक उड़ा कर क्या इन वायरल हो रहे वीडियो की खबर को दबाने की कोशिश हो रही है?

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