Government of Rajasthan Ashok Chandna

आने वाले 10 जून को 15 राज्यों की 57 सीटों पर राज्यसभा सांसदों का चुनाव होना है. इसमें राजस्थान में भी 4 सदस्यों के लिए चुनाव होगा. इस चुनाव से पहले राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार में मंत्री अशोक चांदना (Ashok Chandna) ने अपने बागी तेवर दिखाए हैं. चांदना गहलोत सरकार में खेल मंत्री हैं. उन्होंने अशोक गहलोत के प्रमुख सचिव कुलदीप रांका के खिलाफ लिखते हुए अपने इस्तीफे की बात कही है.

अशोक चांदना 9 बीते गुरुवार को एक ट्वीट किया. जिसमें लिखा कि, माननीय मुख्यमंत्री जी मेरा आपसे व्यक्तिगत अनुरोध है कि मुझे इस जलालत भरे मंत्री पद से मुक्त कर मेरे सभी विभागों का चार्ज कुलदीप रांका को दे दिया जाए. क्योंकि वैसे भी वही सभी विभागों के मंत्री हैं. वहीं अशोक चांदना के बयान पर राजस्थान सरकार में पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कहा है कि चांदना का बयान आवेदन में दिया गया है. वह मेरे छोटे भाई की तरह हैं. उनसे बात करते हुए समझाया जाएगाा. इस मामले को राजनीतिक नजर से नहीं देखा जाएगा.

आपको बता दें कि राजस्थान में अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के खिलाफ लगातार बगावती तेवर देखने को मिल रहे हैं. चार दिन में चार विधायकों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ बागी तेवर दिखाए हैं. इसी कड़ी में कांग्रेस से इस्तीफा दे चुके डूंगरपुर के विधायक और युवक कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश घोघरा, राजेंद्र बिधूड़ी और प्रतापगढ़ के विधायक रामलाल मीणा का भी नाम शामिल है. इन सभी पर पार्टी के खिलाफ बयानबाजी करने का आरोप है.

आपको बता दें कि लंबे समय से राजस्थान में पार्टी दो गुटों में विभाजित दिखाई दे रही है. इसी कड़ी में पिछले कुछ महीनों से या यूं कहें कि जब से राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनी है तभी से अशोक गहलोत का अपना एक धड़ा है और सचिन पायलट (Sachin Pilot) का अपना एक धड़ा है. सचिन पायलट गुट के लोग सचिन को जल्दी से जल्दी मुख्यमंत्री बनवाने की बात करते हैं और कहते हैं कि अगर सचिन पायलट राजस्थान के मुख्यमंत्री नहीं बने तो फिर कांग्रेस की सरकार है रिपीट नहीं होगी.

कांग्रेस के कुछ नेता भी राजस्थान के अंदर कांग्रेस में लगातार फूट डालने की कोशिशों में लगे हुए हैं. आचार्य प्रमोद कृष्णम (Acharya Pramod Krishnam) भी लगातार राजस्थान सरकार को अस्थिर करने जैसी बयान बाजी करते रहते हैं और वह खुलकर सचिन पायलट का समर्थन करते हुए अशोक गहलोत के खिलाफ बयानबाजी करते हैं. इसी कड़ी में उन्होंने एक ट्वीट किया है. जिसमें उन्होंने लिखा है कि, ख़राबी “इंजन” में है और आप “डिब्बे” बदलने की बात कर रहे हो.

आपको बता दें कि पंजाब में भी चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री बदल दिया गया था और कैप्टन अमरिंदर सिंह को कांग्रेस से निकालकर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया था. चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया था और पंजाब में जहां लग रहा था कि कांग्रेस फिर से सरकार बना लेगी, वहां कांग्रेस बुरी तरीके से हार गई. तो क्या एक बार फिर से राजस्थान को पंजाब बनाने की कोशिश कांग्रेस के नेता कर रहे हैं?

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