Ashok gehlot Sachin

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने का ऐलान किया था. इसके बाद से ऐसी चर्चा थी कि गहलोत के अध्यक्ष बनने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ेगा और उनकी जगह सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा. सोनिया गांधी ने इसके लिए सचिन पायलट और अशोक गहलोत से बात भी की थी. हालांकि सचिन को लेकर अभी कोई ऐलान नहीं हुआ था उससे पहले ही राजस्थान में बगावत हो गई और अशोक गहलोत गुट के करीब 80 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया.

इस वक्त कांग्रेस के अंदर राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर चर्चाएं चल रही थी और भारत जोड़ो यात्रा भी चल रही थी. इसी बीच राजस्थान में राजनीतिक संकट गरमा गया है. कांग्रेस आलाकमान द्वारा सचिन पायलट को अगला मुख्यमंत्री बनाने की संभावना के बीच अशोक गहलोत के समर्थक विधायकों ने अपना इस्तीफा दे दिया है. उधर पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस मामले को सुलझाने के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन को हर विधायक से बात करने के निर्देश दिए. हालांकि रात भर चले सियासी ड्रामे के बाद विधायकों से बातचीत में कोई हल नहीं निकला है.

राजस्थान में बात बनती हुई दिखाई नहीं दे रही है. विधायकों ने जो शर्त रखी है वह पार्टी का आलाकमान मानने को तैयार नहीं है. इतना ही नहीं राजस्थान पहुंचे मलिकार्जुन खरगे और अजय माकन आज गहलोत से मुलाकात करेंगे. इसके बाद वह दिल्ली आएंगे. उधर राहुल गांधी ने भी राजस्थान मामले की जानकारी ली है. उन्होंने केरल से केसी वेणुगोपाल को दिल्ली भेजा है. वह दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात कर सकते हैं.

विधानसभा अध्यक्ष के आवास पर देर रात तक माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे ने विधायकों को मनाने की कोशिश की. बात नहीं बनी और सभी विधायक अपने घर चले गए. जो जानकारी निकल कर आ रही है उसके मुताबिक घर जाने से पहले विधायकों ने तीन शर्त रखी है. मिली जानकारी के अनुसार नाराज विधायकों का कहना है कि जब तक इस बात पर सहमति नहीं बनेगी तब तक कोई विधायक बैठक में शामिल नहीं होगा.

सूत्रों के मुताबिक अशोक गहलोत ने पर्यवेक्षकों से दो टूक कह दिया है, कांग्रेस के वफादार के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी छोडूंगा, गद्दार के लिए नहीं. दूसरी तरफ मिली जानकारी के अनुसार आलाकमान इस बार शर्तों के आगे झुकने के लिए तैयार नहीं दिख रहा है. अशोक गहलोत और उनका समर्थक गुट सचिन पायलट को गद्दार बता रहा है. दूसरी तरफ आलाकमान इस बार शर्तों के आगे झुक कर फैसला लेने के लिए तैयार नहीं दिख रहा है.

दरअसल राजस्थान में जो कुछ भी हो रहा है उसके पीछे अशोक गहलोत की भूमिका बताई जा रही है. और ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके और पायलट के बीच मनमुटाव किसी से छुपा हुआ नहीं है. कई मौकों पर दोनों नेता एक दूसरे पर बयान बाजी कर चुके हैं. मुख्यमंत्री गहलोत पायलट को नकारा तक कह चुके हैं. गहलोत और उनके समर्थक विधायक चाहते हैं कि 2020 के सत्ता संकट के समय जिसने पार्टी को कमजोर करने की कोशिश की उसे मुख्यमंत्री पद पर नहीं बैठाया जाए.

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