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अध्यक्ष पद ग्रहण करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने भाषण में कांग्रेस को मजबूत करने की बात कही. लेकिन जिन बातों पर उन्होंने सबसे अधिक फोकस किया वह थी राजस्थान के उदयपुर में हुए चिंतन शिविर के ब्लूप्रिंट को लागू करना और पार्टी में युवाओं की भागीदारी को बढ़ाना. उनके भाषण से यह साफ होता है कि कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस अध्यक्ष का फोकस पार्टी में युवाओं को मजबूती देने पर है. ऐसे में इसका राजस्थान पर भी असर पड़ना लाजमी है. तो क्या आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए मुश्किल पैदा होने वाली है?

मलिकार्जुन खड़गे ने अपने भाषण में कहा कि उदयपुर में जो ब्लूप्रिंट लागू हुआ था उसे लागू करने की जिम्मेदारी हम सब पर है. उदयपुर में हमने तय किया था कि युवाओं को आगे बढ़ाया जाएगा. संगठन में 50% पद 50 की उम्र से कम लोगों को देंगे. इसके अलावा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को सशक्त किया जाएगा. जिला, ब्लाक राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खाली पदों को भरा जाएगा. उन्होंने कहा कि उदयपुर संकल्प शिविर में जो निर्णय लिया है उसे पूरा किया जाएगा. उनका पूरा फोकस युवाओं पर था. साथ ही उन्होंने कहा कि देश भर में ब्लॉक से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक संगठन में जो भी नियुक्तियां नहीं हुई है उसे भरा जाएगा.

मलिकार्जुन खड़गे की बात को अगर राजस्थान के संदर्भ में देखा जाए तो कई मायने निकलते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर पार्टी युवाओं वाला फार्मूला लागू करती है तो इसका बड़ा असर राजस्थान की राजनीति पर आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है. मलिकार्जुन खड़गे दिल्ली में जिस वक्त बयान दे रहे थे उसी वक्त राजस्थान के मुख्यमंत्री गहलोत उनके ठीक सामने बैठे थे. गहलोत के सामने ही खड़गे ने युवाओं पर फोकस की बात की. एक तरफ जहां कांग्रेस पार्टी का फोकस पूरी तरह युवाओं पर नजर आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ गहलोत लगातार अनुभव की वकालत करते आए हैं. हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के दिन सहित कई मौकों पर गहलोत ने अनुभव की वकालत की है.

उदयपुर में जो संकल्प लिया था उस पर काम करने का संकेत कांग्रेस राजस्थान से दे सकती है. इसकी बड़ी वजह राजस्थान में चल रहे सियासी संकट और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को माना जा रहा है. कांग्रेस को जानने वालों का मानना है कि गुजरात और हिमाचल में चुनाव बेहद नजदीक है. वहीं कर्नाटक में भी मार्च में चुनाव होने हैं. ऐसे में इन राज्यों में कांग्रेस ज्यादा छेड़छाड़ से बचना चाहेगी. वही राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित पांच राज्यों में दिसंबर 2023 में चुनाव होने हैं. इसके लिए साल भर से अधिक का समय कांग्रेस के पास है. ऐसे में इन राज्यों में अपने नए ब्लूप्रिंट को अप्लाई करके कांग्रेस बदलाव के संकेत दे सकती है.

राजस्थान को लेकर कांग्रेस लंबे समय से सियासी संकट से जूझ रही है. अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच विवाद अभी सुलझा नहीं है. माना जा रहा है कि कांग्रेस राजस्थान के मसले को सुलझाने में लगेगी. गहलोत और पायलट खेमे के बीच विवाद कितना बड़ा है यह पिछले दिनों देखने को मिला था. 25 सितंबर को जिस तरह विधायकों ने इस्तीफे दिए और उसके बाद मंत्रियों विधायकों की ओर से लगातार बयानबाजी की गई. ऐसे में अब कांग्रेस राजस्थान का मुद्दा जल्द से जल्द सुलझाने का प्रयास करेगी. विवाद का हल निकालने से पहले कांग्रेस 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव को भी सोचकर जरूर चल रही होगी.

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