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योग से कहीं अधिक अपने कारोबार को लेकर सुर्खियों में रहने वाले बाबा रामदेव और उनकी अगुवाई वाली कंपनी पतंजलि आयुर्वेद एक अलग विवाद में फंसते हुए दिखाई दे रही है. पतंजलि आयुर्वेद की कुछ दवाइयों का प्रचार प्रसार सरकार को इस कदर खटका है कि, उसने कई राज्यों को पतंजलि के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का निर्देश दे दिया है.

जिन दवाइयों को लेकर और उनके प्रचार प्रसार को लेकर यह मामला है, वह दवाइयां हार्ट, शुगर और लीवर के इलाज का दावा करती हैं और कई अखबारों में इनके विज्ञापन छपे थे. यही विज्ञापन कुछ डॉक्टरों और अन्य लोगों को नागवार गुजरी और उन्होंने सरकार से शिकायत कर डाली कि इन दवाइयों का विज्ञापन सरासर गैरकानूनी है.

एक रिपोर्ट द टेलीग्राफ में छपी थी उसके मुताबिक शिकायत करने वालों में केरल के एक डॉक्टर केवी बाबू हैं, जिन्होंने आरटीआई दाखिल कर सरकार से कई जानकारियां भी मांगी थी. उन्होंने फरवरी में केंद्र सरकार से शिकायत की थी कि पतंजलि आयुर्वेद ने अखबारों में विज्ञापन देकर दावा किया है कि Lipidom नाम की दवा 1 हफ्ते के भीतर कोलेस्ट्रोल घटाती है और कई लोगों को हार्ट की प्रॉब्लम और शुगर से बचाती है.

पतंजलि की और कई दवाइयों के बारे में शिकायत की गई थी. शिकायतकर्ता का कहना है कि यह दवाइयां इन बीमारियों के इलाज में कितनी असरदार है इस पर बहस हो सकती है, लेकिन इनका विज्ञापन कानून का उल्लंघन है. उनका दावा है कि ड्रग एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट 1954 के तहत हार्ट, ब्लड प्रेशर या लिवर से जुड़ी बीमारियों की दवाओं का विज्ञापन और प्रचार नहीं किया जा सकता.

केंद्रीय रेगुलेटरी अथॉरिटी ने शिकायतों को पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े आयुष मंत्रालय को फॉरवर्ड कर दिया था. अब मंत्रालय ने इसे संज्ञान में लिया है और राज्यों को इस बारे में निर्देश दिया है. आयुष मंत्रालय ने पतंजलि से ऐसे विज्ञापन वापस लेने को कहा है. साथ ही उत्तराखंड सरकार से पतंजलि के खिलाफ जरूरी कार्रवाई करने और एक्शन टेकन रिपोर्ट सौंपने को कहा है.

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