Maharashtra

महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव के बाद महाविकास आघाडी सरकार में मंत्री एकनाथ शिंदे अचानक से गायब हो चुके हैं. कहा जा रहा है जो उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है. चुनाव से पहले ऐसी चर्चा थी कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच संबंधों में दरार आ गई है. बताया जा रहा है कि एकनाथ शिंदे शिवसेना के 12 विधायकों के साथ गुजरात के सूरत के एक होटल में रुके हुए हैं.

ऐसे में एकनाथ शिंदे के बागी होने के बाद मुख्यमंत्री उद्धव को सत्ता बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है. इस बार महाराष्ट्र में बड़ा बवंडर सामने आया है. बीजेपी के पास विधानसभा में 106 विधायक हैं, निर्दलीयों को मिलाकर यह संख्या 113 पहुंच रही थी. लेकिन राज्यसभा चुनाव में उसे 123 वोट मिले थे. तो एमएलसी चुनाव में 134 वोट मिले हैं. इस तरह एकनाथ शिंदे के खुलकर बगावत का झंडा उठाने के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के सामने सरकार बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है.

महाराष्ट्र की विधानसभा में कुल 228 सदस्य हैं. इसके लिहाज से सरकार बनाने के लिए 145 विधायक चाहिए. शिवसेना के एक विधायक का निधन हो गया है, जिसके चलते अब 287 विधायक बचे हैं और सरकार के लिए 144 विधायक चाहिए. बगावत से पहले शिवसेना की अगुवाई में बने महाविकास आघाडी को 169 विधायकों का समर्थन हासिल था. जबकि बीजेपी के पास 113 विधायक और विपक्ष में पांच अन्य विधायक हैं.

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार को 169 विधायकों का समर्थन हासिल था. इसमें शिवसेना के 56 एनसीपी के 53 और कांग्रेस के 44 विधायक शामिल थे. इसके अलावा समाजवादी पार्टी के 2, PGP के 2, BVA के 3 और 9 निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी सरकार को हासिल था. दिलचस्प बात यह है कि साल 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा था लेकिन सरकार के लिए दोनों ही दलों की राहें जुदा हो गई थी.

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महाराष्ट्र के अंदर सरकार बनने के बाद से ही बीजेपी के कई नेता दावा करते रहे हैं कि महाविकास आघाडी सरकार जल्दी गिरने वाली है. ऐसे में शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के बगावत के बाद क्या उद्धव सरकार गिर सकती है और इसमें बीजेपी का हाथ है, इसको लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. इसके लिए महाराष्ट्र की विधानसभा में विधायकों का सियासी गणित भी काफी मायने रखता है. उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने और उनकी सरकार ढाई साल का वक्त पूरा कर चुकी है. क्या पूरे 5 साल यह सरकार चल पाएगी, इसको लेकर भी सवालिया निशान खड़े हो गए हैं.

कैसे बिगड़ गया गणित?

एकनाथ शिंदे के साथ बगावत करने वाले 26 विधायक बताए जा रहे हैं. यह पहले उद्धव ठाकरे के साथ थे. ऐसे में सरकार से इन 26 विधायकों का समर्थन हटा देते हैं तो 143 विधायक बचते हैं. ऐसे में निर्दलीय तथा अन्य छोटी पार्टियों के दो से तीन विधायक अगर ठाकरे सरकार का साथ छोड़ देते हैं तो यह लगभग तय है कि ठाकरे सरकार के लिए विधानसभा में बहुमत साबित करना मुश्किल हो जाएगा. हालांकि इस तरह से बहुमत के कम नंबर पर महा विकास आघाडी आ गई है.

बीजेपी को सरकार से बाहर रखने के लिए विपक्षी दलों का एक कामयाब फार्मूला था महाविकास आघाडी. लेकिन जिस तरह से भगदड़ मच रही है उससे उद्धव सरकार पर संकट गहरा होता जा रहा है. एनसीपी के दो विधायक जेल में है, जिसके चलते राज्यसभा और विधानसभा चुनाव में वोट नहीं दे सके हैं. ऐसे में उद्धव सरकार की चिंता एकनाथ शिंदे ने बढ़ा दी है और अब देखना है कि कैसे महाविकास आघाडी सरकार को उद्धव ठाकरे बचा पाते हैं.

बीजेपी के कई नेताओं ने दावा किया है कि देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार बनने जा रही है. इस बीच खबर आ रही है कि उद्धव ठाकरे के सामने एकनाथ शिंदे ने बड़ी शर्त रखी है. उन्होंने कहा है कि एनसीपी कांग्रेस का साथ छोड़कर उद्धव ठाकरे बीजेपी के साथ सरकार बनाएं. हालांकि यह सब कुछ मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है, अभी कुछ भी पुख्ता जानकारी नहीं आई है.

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