Assembly elections

आने वाले कुछ ही महीनों में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव (Assembly elections) होने हैं. बीजेपी हर हाल में उत्तर प्रदेश का विधान सभा चुनाव जीतना चाहती है. क्योंकि अगर बीजेपी 2022 का विधानसभा चुनाव उत्तर प्रदेश का हारती है तो 2024 में उसे खासी मुश्किल हो सकती है.

2022 उत्तर प्रदेश का विधानसभा (Assembly elections) चुनाव जीतने के लिए बीजेपी हर हथकंडे अपना रही है. चाहे वह ध्रुवीकरण का मामला हो या फिर अयोध्या के नाम पर हिंदुओं को एकजुट होने की अपील, बीजेपी किसी भी चीज से पीछे नहीं हट रही है. बीजेपी ऐसा इसलिए भी कर रही है, क्योंकि जनता के मुद्दों के नाम पर चुनाव लड़ने के लिए बीजेपी के पास कुछ है नहीं.

जनता के टैक्स के पैसों से मीडिया में प्रचार हो रहा है, बैनर और होर्डिंग भी खूब लग रही है. लेकिन जनता के सामने जाकर काम के नाम पर, जनता की भलाई के नाम पर वोट मांगने के लिए बीजेपी के पास कुछ नहीं है. पेट्रोल डीजल और गैस सिलेंडर की कीमतें जनता को लगातार बीजेपी से दूर कर रही है.

महंगाई के नाम पर, रोजगार के नाम पर बीजेपी जनता के सामने मुंह दिखाने की स्थिति में नहीं है. इसलिए बीजेपी कुछ ऐसा ढूंढ रही थी जिसके नाम पर वह ध्रुवीकरण करके एक बार फिर से उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज हो सके. इसलिए अब ऐसा कह सकता है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी को चारा दिखाई दे चुका है.

असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश में मुसलमानों को एकजुट करने के लिए निकल चुके हैं. असदुद्दीन ओवैसी अपनी रैलियों में बीजेपी से कई गुना अधिक अखिलेश यादव और उनकी पार्टी को तथा कांग्रेस को कोस रहे हैं. यह बीजेपी के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.

असदुद्दीन ओवैसी ठीक बीजेपी की राह पर प्रचार कर रहे हैं.. बीजेपी हिंदुओं को एकजुट करने की बात करती है और ओवैसी भी मुसलमानों को एकजुट करने की बात कर रहे हैं और उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की खराब स्थिति के लिए अखिलेश यादव और उनकी पार्टी को दोष दे रहे हैं. ओवैसी का कहना है कि उत्तर प्रदेश में जितने मुसलमान हैं उनको एक तरफ होना होगा.

जिस तरह की ध्रुवीकरण की राजनीति ओवैसी कर रहे हैं, बीजेपी को इसी तरह की राजनीति की उम्मीद उनसे थी भी. क्योंकि इससे सीधा फायदा बीजेपी को होगा. ओवैसी के भाषणों से हिंदुओं में उबाल आएगा और वह लाख परेशानियों के बाद भी बीजेपी के साथ बना रहेगा. इसलिए कहा जा सकता है कि ओवैसी कहीं से भी मुसलमानों का भला नहीं बल्कि बीजेपी को लाभ ही लाभ पहुंचाने की कोशिश अपनी तरफ से कर रहे हैं.

ओवैसी के भाषणों से बीजेपी को हिंदू मुस्लिम करने का अच्छा खासा आधार मिलेगा, जिसके दम पर जनता के मुद्दों से बीजेपी चुनाव में जनता का ध्यान हटाने में कामयाब हो जाएगी. ओवैसी मुसलमानों को एकजुट करने की बात कर रहे हैं. मतलब कहीं ना कहीं वह विपक्ष के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं और विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. अगर ओवैसी निष्पक्ष राजनीति कर रहे हैं, सांप्रदायिक राजनीति नहीं कर रहे हैं तो वह हिंदुओं से वोट क्यों नहीं मांग रहे हैं?

बीजेपी राहुल गांधी या फिर अखिलेश यादव को किसी मजलूम से मिलने की इजाजत नहीं देती उत्तर प्रदेश में और पुलिस प्रशासन के दम पर उन्हें रोकने की कोशिश होती है. लेकिन ओवैसी को लगातार सभाएं करने की इजाजत बीजेपी की तरफ से दी जा रही है, आखिर इसके पीछे क्या कारण हो सकता है? ओवैसी के भाषण से माहौल खराब होता है, यह बात बीजेपी को मालूम है. उसके बाद भी लगातार सभाएं करने की इजाजत देना कहीं ना कहीं यह साबित करता है कि, बीजेपी चाहती है कि उत्तर प्रदेश में ओवैसी जहरीले भाषण दे, ताकि उसे फायदा मिल सके.

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