Deepak Chaurasia

दीपक चौरसिया को गोदी पत्रकार भी कहा जाता है. दीपक चौरसिया अक्सर सोशल मीडिया पर भाजपा आईटी सेल के कर्मचारियों की तरह काम करते हुए नजर आते हैं. दीपक चौरसिया मोदी सरकार का प्रचार प्रसार करने के लिए जाने जाते हैं. विपक्षी पार्टियों को अक्सर बदनाम करते हुए सोशल मीडिया से लेकर अपने कार्यक्रम तक नजर आ जाते हैं.

दीपक चौरसिया न्यूज़ एंकरिंग भी करते हैं. लेकिन दीपक चौरसिया (Deepak Chaurasia) सोशल मीडिया (Social Media) पर बीजेपी के नेताओं को सपोर्ट करते हुए उनके बयानों को आगे बढ़ाते हुए नजर आते हैं. बीजेपी सरकार की आलोचना करने वाले लोग दीपक चौरसिया को बिल्कुल भी पसंद नहीं है. दीपक चौरसिया अक्सर बीजेपी की आलोचना करने वालों को अलग-अलग नामों से पुकारते हैं.

इस समय पूरे देश में कोरोना (Corona) तबाही मचाये हुए हैं. हॉस्पिटल से लेकर श्मशान घाट तक मरीजों की और मरने वालों की लाइन लगी हुई है. चारों तरफ जरूरी दवाइयों और ऑक्सीजन (Oxygen) को लेकर अफरा-तफरी मची हुई है. सरकार लगातार दावे कर रही है लेकिन जनता तो परेशान है, यही सच है.

इन सबके बीच दीपक चौरसिया जनता की आवाज ना बन कर एक बार फिर से सत्ता की कठपुतली बनकर ट्वीट करते हुए नजर आए. उन्होंने ट्वीट किया कि इस भयावह समय में भी वामपंथी गिद्ध शमशान घाटों में लाशों की गिनती कर रहे हैं और हमारे डॉक्टर समेत कोरोना से अलग-अलग मोर्चे पर लड़ रहे योद्धा साँसों को बचाने में लगे हैं. कोरोना योद्धाओं को सलाम.

आपको बता दें कि कई बड़े पत्रकार इस वायरस के कारण अपनी जान गवा चुके हैं. मीडिया जगत के कई बड़े नाम अभी भी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं. सोशल मीडिया पर कई तथाकथित बड़े पत्रकार जो सत्ता पक्ष का समर्थन करते हैं, वह आम जनता से मदद मांगते हुए नजर आए हैं पिछले दिनों. और सोशल मीडिया पर बढ़ चढ़कर लोगों ने एक दूसरे की मदद भी की है.

उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक महामारी का कहर जारी है. सरकार दावे कुछ भी कर रही हो, लेकिन चरमराई हुई स्वास्थ्य व्यवस्था सरकार के दावों की पोल खोल रही है. जनता जिस समय बदहाल व्यवस्था का शिकार हो रही थी या हो रही है, उस समय नेता चुनाव में व्यस्त थे. अगर पहले स्थिति की गंभीरता को समझते हुए फैसले लिए गए होते तो शायद आज कुछ जाने बचाई जा सकती थी.

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