Hardeep-Puri

देश में किसान आंदोलन जारी है. कई राज्यों के किसान पिछले 80 से अधिक दिनों से दिल्ली बॉर्डर पर बैठे हुए हैं. इस आंदोलन का नेतृत्व शुरुआत से ही पंजाब के किसानों के हाथों में रहा है. हालांकि 26 जनवरी की हिंसा के बाद गाजीपुर बॉर्डर पर राकेश टिकैत मजबूत बनकर उभरे हैं.

लेकिन दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन की शुरुआत होने से पहले से ही पंजाब में किसान आंदोलन कर रहे थे. इस दौरान बीजेपी के लिए सबसे कमजोर कड़ी के रूप में पंजाब के अंदर उसके संगठन का कमजोर होना भी माना जा सकता है. बीजेपी के पास पंजाब में एक भी मजबूत सिख नेता नहीं हैं. सिख नेताओं के अभाव के कारण किसान नेताओं से बातचीत के लिए सरकार की तरफ से अबतक कोई सिख नेता को सामने नहीं लाया गया है.

बीजेपी में अगर सिख नेताओं की बात की जाए तो नवजोत सिंह सिद्धू के कांग्रेस में जाने के बाद हरदीप सिंह पुरी पार्टी के सबसे बड़े सिख चेहरे हैं. हालांकि उनका जन्म दिल्ली में हुआ था और पंजाब की राजनीति में वो अधिक पकड़ नहीं रखते हैं. आज हरदीप सिंह पुरी का जन्मदिन है. उन्हें एक राजनेता के साथ-साथ एक पूर्व अधिकारी के रूप में भी जाना जाता है. उन्होंने एक IFS अधिकारी के रूप में कई देशों में काम किया है. पुरी को ब्राजील, जापान, श्रीलंका और यूनाइटेड किंगडम में महत्वपूर्ण राजनयिक पदों पर काम करने का अनुभव है.

1988 से 1991 के बीच, वह बहुपक्षीय व्यापार वार्ता के दौरान उरुग्वे दौरे में विकासशील देशों की मदद करने के लिए UNDP / UNCTAD बहुपक्षीय व्यापार वार्ता परियोजना के समन्वयक भी रह चुके हैं. जनवरी 2011 से फरवरी 2013 तक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद आतंकवाद-रोधी समिति के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया और अगस्त 2011 और नवंबर 2012 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने सेवा दी थी.

दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में मास्टर ऑफ आर्ट्स की पढ़ाई करने वाले पुरी के पिता भी एक राजनयिक रह चुके थे. उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य बनने वाले पुरी केंद्र सरकार में केन्द्रीय नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले उन्होंने केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं. दिल्ली में कच्ची कॉलॉनी में रहने वालों को मालिकाना हक दिलवाने की घोषणा करने के कारण पिछले साल वो काफी चर्चाओं में रहे थे.

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर भी वो लगातार सक्रिय रहे हैं. हरदीप सिंह पुरी को उनके कार्यक्षेत्र में निजीकरण का हिमायती माना जाता है. पिछले साल उन्होंने कहा था कि एयर इंडिया को बेचने के अलावा अब कोई और विकल्प नहीं है. जिसके बाद उनकी कड़ी आलोचना हुई थी. हालांकि आर्थिक सुधारों को लेकर भी वो काफी गंभीर रहे हैं. नए कृषि कानूनों को लेकर भी देश भर में जारी आंदोलन को रोकने में सरकार उनके अनुभव का लाभ उठा सकती है. एक सिख नेता के रूप में भी वो उपयोगी साबित हो सकते हैं.

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