Gurnam Singh Chadhuni

मोदी सरकार द्वारा लाए गए विवादास्पद कृषि कानूनों का विरोध दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है. लंबे समय से किसान यह मांग कर रहे हैं कि सरकार इन बिलों को वापस ले और इसी को लेकर लंबे समय से सड़कों पर आंदोलन भी चल रहा है. लेकिन मोदी सरकार इसे वापस लेने के लिए तैयार नहीं है.

कृषि बिलों के विरोध के साथ-साथ किसान इस बात को लेकर भी आक्रोशित हैं कि बीजेपी की राज्य सरकारों द्वारा किसानों को रोकने के लिए उनपर लाठी डंडे बरसाए जा रहे हैं, वाटर कैनन का इस्तेमाल हो रहा है. बीजेपी की राज्य सरकारें किसानों का दमन करने पर उतारू नजर आई कई जगहों पर.

इसी को लेकर किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी (Gurnam Singh Chadhuni) ने हरियाणा की मोदी सरकार और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को बड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि लाठीचार्ज का आर्डर तुमने दिया है खट्टर साहब, सुन लो अगर यह लाठीचार्ज का आर्डर कहीं हमने दे दिया तो यह बीजेपी और जेजेपी वाले मुंह नहीं करेंगे गांव की तरफ.

गुरनाम सिंह चढूनी (Gurnam Singh Chadhuni) ने कहा है कि हमारी शराफत का नाजायज फायदा मत उठाइए, हम रोक रहे हैं अपने लोगों को. इसलिए रोक रहे हैं कि हम बर्बादी नहीं चाहते. हम लड़ना नहीं चाहते, हम लोकतांत्रिक तरीके से अधिकार मांग रहे हैं. लेकिन इतने कमजोर मत जानिए देश के किसानों को. उन्होंने कहा कि हम अपना सबूत दे चुके हैं, हमारे परिवार सीमा पर लड़ रहे हैं, सबूत दे चुके हैं कि हिंदुस्तान की मिलिट्री आज दुनिया में मानी हुई है.

गुरनाम सिंह ने कहा कि हमारे बच्चे हमारे परिवारों से गए हैं. टाटा बिरला या किसी अडानी अंबानी का परिवार वहां पर नहीं है. इनमें वही खून है जो यहां किसान बैठे हैं. जो हमारे सीमा पर जवान बैठे हैं उनमें भी वही खून है. 10 महीने से हम इंतजार कर रहे हैं, 650- 700 किसान हमारे शहीद हो गए हैं. कई किसान दुखी होकर आत्महत्या कर गए.

किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा है कि सब्र की एक हद होती है, सब्र की एक सीमा होती है. हम इसलिए सोच रहे हैं कि कहीं यह आंदोलन कहीं उपद्रव ना हो जाए और आंदोलन टूट ना जाए. उपद्रव का आंदोलन टूट जाता है, क्योंकि हमारे सामने परमात्मा की और दया आ गयी. उन्होंने कहा कि हम इस आंदोलन को बड़े शांतिपूर्ण तरीके से चलाना चाहते हैं.

किसान नेता ने कहा कि आंदोलन में कोई उपद्रव हम नहीं करना चाहते. क्योंकि हम उपद्रव के भी नतीजे भुगतने चुके हैं. उन्होंने कहा कि हम किसी पर हाथ नहीं उठाएंगे. लेकिन मोदी सरकार हमें हमारे किसानों को इतना कमजोर भी ना समझे, साल बीतने वाला है, यह फैसला ना लेना पड़े कि अब तो दिल्ली घेराव था. अब मोदी के घर का घेराव होगा.

उन्होंने कहा कि देश का किसान मरने से नहीं डरता है. यह तो केवल हमारी जो कमेटी है, जो संयुक्त मोर्चा है, हम भी उसी में शामिल हैं, केवल उसके आदेश की तरफ देख रहा है, कि कब वह आदेश दे और कब हम दिल्ली को फतेह करें. उन्होंने कहा कि अभी मोदी जी समझ जाएं वक्त है गया हुआ वक्त हाथ नहीं आता. अभी तो हमने कुछ भी नहीं मांगा.

चढूनी ने कहा कि तीन काले कानून और एमएसपी ही तो मांग रहे हैं ना, वह भी सारे देश के लिए. किसान अपने लिए नहीं मांग रहा है, सारे देश के लिए मांग रहा है. उन्होंने कहा कि ₹25 किलो सेब खरीद रहा है अडानी और 250 में बेच रहा है. हमारा गेहूं ₹20 खरीद कर ₹50 किलो बेचेगा, सारा देश भूखा मरेगा.

गुरनाम सिंह चढूनी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर चुनाव तक ही आंदोलन करना पड़ गया तो फिर हम इनसे सरकार छीन लेंगे, फिर हम वोट इनको नहीं देंगे. उन्होंने किसानों से वादा करवाया और कहा कि वादा करिए कि फिर हम वोट इनको नहीं देंगे, इन चोरों को वोट हम नहीं देंगे. उन्होंने कहा कि क्यों दे हम इनको वोट? आंकड़ा देखिए आप. उत्तर प्रदेश के अंदर 8 करोड़ वोट किसानों के हैं. किसान परिवारों की, केवल जमीन के मालिकों की आठ करोड़ वोट है.

उन्होंने कहा कि साढे तीन करोड़ वोट पर उत्तर प्रदेश में सरकार बनती है. किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दो सरकारे बनाने की आप में क्षमता है, छीन क्यों नहीं लेते इनसे सरकार. हरियाणा सरकार के खिलाफ भी किसान है. उन्होंने कहा कि यहां भी तीन लाख सिर्फ मजदूर है और वह आंदोलन का समर्थन करके गए हैं. उन्होंने किसानों से कहा कि जितनी सरकार बनाने के लिए वोट चाहिए, उतनी वोट तो हमारे घर में है और अगर हम इनसे सरकार छीन ले, अपनी सरकार बना ले तो यह हमारी जमीन कॉरपोरेट को क्या देंगे.

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