Rohit Sardana

मशहूर पत्रकार (Journalist) और आज तक पर दंगल (Dangal) प्रोग्राम करने वाले रोहित सरदाना (Rohit Sardana) की हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई है. वह कोविड-19 पॉजिटिव भी थे. आज दोपहर रोहित सरदाना ने नोएडा (Noida) के मेट्रो हॉस्पिटल (Metro Hospital) में आखिरी सांस ली. तमाम लोग शोक में है, किसी को भरोसा नहीं हो रहा है इस खबर पर.

इन सबके बीच सोशल मीडिया पर देखने को मिल रहा है कि रोहित की मृत्यु पर जहां कुछ लोग गहरे सदमे में है और दुख व्यक्त कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग अपनी खुशी का भी इजहार कर रहे हैं. सरदाना की मृत्यु पर कुछ संवेदनहीन लोग सोशल मीडिया पर अपनी खुशी का इजहार कर रहे हैं और वह भी अलग अलग तरीके से. कहीं ट्वीट करके कहीं सोशल मीडिया पोस्ट (social media post) करके तो कहीं पर किसी की पोस्ट पर हंसने का रिएक्शन देकर.

कोई यहां अमर होकर नहीं आया है जिंदगी कोई इंश्योरेंस पॉलिसी (Insurance policy) नहीं है की रिन्यू करवा लिया. 1 दिन सभी को जाना है. लेकिन रोहित सरदाना की आकस्मिक मृत्यु ने झकझोर कर रख दिया है. कोरोना वायरस की चपेट में वैसे तो बहुत सारे लोग आए हैं और इस वायरस ने उन को निगल लिया. लेकिन रोहित सरदाना की मृत्यु पर इस तरीके की खुशी का इजहार कहां तक सही है? विचारधारा और आपकी विचारधारा में फर्क क्या है?

हम सबके अंदर संवेदना होनी चाहिए, चाहे व्यक्ति दूसरी विचारधारा का हो, चाहे उसके विचारों से हमारे विचार मेल ना खाते हो, लेकिन किसी की मृत्यु पर इस तरीके से खुशी का इजहार करना मुर्दा इंसान की पहचान है. क्या रोहित सरदाना की बीवी बच्चे नहीं होंगे? अगर आप उनकी मृत्यु पर हंस रहे हैं तो फिर आप उनकी छोटी-छोटी बच्चियों के ऊपर भी हंस रहे हैं. क्या आपके घर पर इंसान नहीं है? अगर आपके घर कुछ होता है और दूसरे हंसे, तो आपको कैसा महसूस होगा?

रोहित सरदाना की विचारधारा का विरोध कर सकते हैं आप. उनके जो कार्यक्रम होते थे उनका विरोध कर सकते हैं आप, आपका हक है. लेकिन उनकी मृत्यु पर खुश हो जाना, यह आपके इंसान होने की तो पहचान नहीं हो सकती. कहा गया है कि आप दूसरों के साथ भी वैसा ही बर्ताव करें जैसा खुद के साथ चाहते हैं. तो क्या हम चाहते हैं कि हमारी भी मौत पर या आप लोग चाहते हैं आप की भी मौत पर दूसरे यूं ही खुशी का इजहार करें?

इंसान हैं तो सोचिएगा जरूर.

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