Putin Biden

पिछले हफ्ते यूक्रेन पर स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन का एलान करते वक्त रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा था, बीच में बाहर का कोई भी अगर दखल देने की सोचेगा तो उसे परिणाम भुगतने होंगे. ऐसे परिणाम जो उसने इतिहास में कभी नहीं देखे होंगे. जानकार मानते हैं कि पुतिन सीधे नाटो देशों को परमाणु हमले की धमकी दे रहे थे.

किस हद तक जा सकते हैं?

रूसी राष्ट्रपति पुतिन किस हद तक जा सकते हैं इसे समझने के लिए उनका 2018 का बयान याद करना चाहिए. 2018 में आई एक डॉक्यूमेंट्री में पुतिन की तरफ से कहा गया था कि, अगर कोई रूस का सफाया करने का फैसला करता है तो हमें जवाब देने का कानूनी अधिकार है. हां, यह मानवता और दुनिया के लिए आपदा होगी. लेकिन मैं रूस का नागरिक हूं और इस देश का राष्ट्रपति भी. हमें ऐसी दुनिया की जरूरत क्यों है जिसमें रूस ना हो?

यूक्रेन के आसमान से मिसाइलें बरस रही है..रूस ने यूक्रेन में तबाही मचा रखी है. भारत में अपने नागरिकों को आज ही यूक्रेन छोड़ने को कहा है. भारतीय दूतावास की तरफ से यूक्रेन में रह रहे भारतीयों को कहा गया है कि आज किसी भी तरह यूक्रेन छोड़ दें.

रूसी राष्ट्रपति पुतिन इस समय पश्चिमी देशों की ताकत की परीक्षा भी ले रहे हैं. यदि अमेरिका, पश्चिमी देश, नाटो और नाटो की सदस्यता हासिल करने की उम्मीद रखने वाले देश यूक्रेन में पुतिन को नहीं रोक पाए तो यूरोप के दूसरे हिस्सों में भी रूसी आक्रामकता हावी होगी. खासकर फिनलैंड, रोमानिया और स्वीडन में.

अगर ऐसा होता है तो यह सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं रहेगा. संभव है कि चीन ताइवान की तरफ आक्रामक हो जाए. अभी यह धारणा बन रही है कि पश्चिमी देशों की युद्ध रोकने की क्षमता गिर रही है. अगर यह धारणा और मजबूत हुई कि पश्चिमी देश अब पहले की तरह ताकतवर नहीं रह गए हैं तो आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन खुलेआम होते हुए देखा जा सकता है.

यूक्रेन में रूस की रणनीति क्या है?

माना जा रहा है कि आज रात रूस यूक्रेन की राजधानी पर बड़ा हमला कर सकता है कुछ ऐसी रिपोर्ट भी आ रही है जिसमें दावा किया जा रहा है कि रूस ने यूक्रेन पर धावा बोलने के लिए एक बड़ी सेना यूक्रेन की तरफ रवाना कर दी है. सैटेलाइट तस्वीरों से दावा किया जा रहा है कि रूस की बख्तरबंद गाड़ियों का बड़ा काफिला बढ़ रहा है. सैटेलाइट तस्वीरों के सामने आने के बाद रूस की कार्रवाई को लेकर आशंकाएं जताई जा रही है.

ऐसी भी रिपोर्ट सामने आ रही है कि रूस की राजधानी में घुसने से पहले रूस अपनी सेना को और मजबूत कर रहा है. कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि रूस यूक्रेन की आबादी वाले इलाकों को एक खास रणनीति के तहत घेर रहा है. जानकारों की मानें तो रूस की रणनीति इन आबादी वाले शहरों की रसद लाइन काटना है. यानी ऐसे शहरों को खाना पानी और अन्य जरूरी सामानों से वंचित करना. रूस जो भी रणनीति बना रहा हो लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक सवाल के जवाब में कहा है कि अमेरिका को परमाणु हमले से डरने की जरूरत नहीं है.

माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने पुतिन के द्वारा परमाणु हमले की धमकी दिए जाने के बाद यह बयान दिया है और बताने की कोशिश की है कि अमेरिका किसी परमाणु हमले से नहीं डरता और शायद अगर ऐसी कोई नौबत आई तो अमेरिका भी इस युद्ध में रूस से आमने-सामने की जंग लड़ता हुआ दिखाई दे.

लड़ाई को अब तक एक हफ्ते गुजर चुके हैं. लग रहा है कि पुतिन ने यूक्रेन के लिए पश्चिमी देशों के सहयोग को कम करके आंका था. यही नहीं रोज के खिलाफ जो अंतरराष्ट्रीय गठबंधन खड़ा हो रहा है उसमें पूर्वी यूरोप के देश भी शामिल हो रहे हैं. घटनाओं पर नजर दौड़ाई जाए तो ऐसा भी लग रहा है कि पुतिन ने यूक्रेन पर हमले को लेकर रूस के अंदर होने वाले आंतरिक विरोध को भी कम करके आंका था.

रूस के अंदर इस युद्ध के खिलाफ कर रहे विरोध प्रदर्शनों में अब तक 7000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है. अब यह भी दिखने लगा है कि वह प्रेम के लोग किस हद तक रूस का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं यही इस युद्ध के नतीजे भी तय करेगा.

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