Prashant Kishor news.

कांग्रेस के नेताओं को प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) द्वारा दिखाए गए रोडमैप से काफी ज्यादा उम्मीदें बढ़ गई हैं. लेकिन प्रशांत किशोर से कितनी उम्मीदें रखनी चाहिए? पिछले साल अक्टूबर में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने गोवा में कहा था, जब तक आप बीजेपी और मोदी की ताकत को समझेंगे नहीं, मानेंगे नहीं तब तक आप उन्हें काउंटर नहीं कर सकते, कभी पराजित नहीं कर सकते.

प्रशांत किशोर ने कहा था कि राहुल गांधी के साथ समस्या यह है कि उन्हें इस बात का एहसास नहीं है, लेकिन उन्हें लगता है कि लोग भाजपा को उखाड़ फेंकेगे. 6 महीने बाद प्रशांत किशोर 2024 के चुनाव में कांग्रेस को 400 सीटें जिताने की रणनीति समझा रहे हैं.

प्रशांत किशोर ने कांग्रेस को मीडिया रणनीति में बदलाव करने, संगठन को मजबूत करने और उन राज्यों पर ज्यादा ध्यान देने को कहा है जहां बीजेपी से सीधा मुकाबला है. बीते कुछ सालों में राज्य दर राज्य सत्ता गवां देने वाली कांग्रेस महज 2 साल में लोकसभा चुनाव को जीतने का सपना देख रही है. पर ऐसा होगा कैसे?

प्लान को जमीन पर उतारेंगे कैसे?

प्रशांत किशोर का प्लान कांग्रेस नेतृत्व को पसंद आया होगा, तभी उस पर एक्शन शुरू हो गया है. प्रशांत किशोर के प्लान को लागू करने के लिए कांग्रेस नेताओं का एक ग्रुप बनाया गया है. यह ग्रुप एक हफ्ते के भीतर सोनिया गांधी को रिपोर्ट देगा. इस बीच कांग्रेस नेताओं ने प्रशांत किशोर कि जल्द ही पार्टी में शामिल होने की बात कही है. जो ग्रुप बनाया गया है वह यह भी रिपोर्ट देगा कि कांग्रेस में प्रशांत किशोर की भूमिका क्या होनी चाहिए.

प्रशांत किशोर एक से एक चुनावी रणनीति बना सकते हैं, लेकिन लगातार हार से निराश कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को कैसे रिवाइव करेंगे? पार्टी का संगठन टूटा हुआ है, बागी नेताओं की लिस्ट लगातार बढ़ रही है. नेतृत्व का संकट तो पिछले लोकसभा चुनाव के बाद से ही है. ऐसे में सिर्फ 2 साल के भीतर कांग्रेस कैसे इन सारी कमियों को दूर करेगी, यह बड़ा सवाल है.

अध्यक्ष कौन बनेगा पार्टी का?

कांग्रेस के अंदर कई समस्याएं हैं, उनमें एक अध्यक्ष पद को लेकर भी है. कांग्रेस के पास राहुल गांधी के इस्तीफा देने के बाद से पूर्णकालिक अध्यक्ष नहीं है. सोनिया गांधी की अंतरिम अध्यक्ष बनकर पार्टी चला रही हैं. कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से अध्यक्ष बनने को कहा गया मगर दोनों ने मना कर दिया. किसी गैर गांधी को अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव आते ही वफादार कांग्रेसी चिढ़ जाते हैं.

ऐसे में जब गांधी परिवार खुद से कोई फैसला नहीं करता, अध्यक्ष पर असमंजस बना रहेगा. पार्टी को यह भी डर है कि गांधी परिवार का नेतृत्व नहीं रहेगा तो पार्टी एकजुट नहीं रहेगी. पार्टी के अंदर आंतरिक कलह भी चरम पर है. बागी गुट रह-रहकर कांग्रेस नेतृत्व के लिए असहज स्थितियां पैदा करता रहता है. एक धड़ा ऐसा भी है जो नेतृत्व पर सवाल कर रहा है. नेताओं को एक दूसरे पर भरोसा नहीं है.

2024 जीतना है तो बहुत मजबूत लड़ाई लड़नी होगी

कांग्रेस को प्रशांत किशोर ने 2024 का प्लान तो पकड़ा दिया है. मगर विरोधियों के सामने कड़ी चुनौती पेश करने के लिए पार्टी को बहुत कुछ करने की जरूरत है और मजबूत लड़ाई लड़ने की जरूरत है. फिलहाल कांग्रेस ऐसी स्थिति में नहीं दिखती कि वह बीजेपी को लोकसभा चुनाव में हरा दें. कई राजनीतिक जानकारों के अनुसार कांग्रेस का एकजुट रहना उसके लिए बड़ी चुनौती है. इस साल के अंत में और 2023 में कुछ राज्यों में चुनाव हैं. वहां कांग्रेस को हर हाल में जीतना होगा.

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