Eknath Shinde shivsena update

एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने बगावत का फुलप्रूफ प्लान पहले से ही तैयार किया हुआ था. इस प्लान की गोपनीयता इसी से समझी जा सकती है कि सूरत जाते समय शिंदे अपने साथ सिक्योरिटी भी नहीं ले गए. शिंदे के साथ रातो रात मुंबई छोड़ने वाले 40 विधायक जब सूरत के ला मेरिडियन होटल पहुंच गए तब लोगों को खबर लगी.

एमएलसी चुनाव से पहले ही तैयार हो गई थी स्क्रिप्ट

जानकारी के मुताबिक सूरत जाने की पूरी स्क्रिप्ट सोमवार को हुए विधान परिषद चुनाव से 2 दिन पहले लिखी गई थी और चुनाव के दौरान बीजेपी के हंगामे के बाद इसे अमलीजामा पहनाया गया. काउंटिंग के दौरान बीजेपी की ओर से क्रॉस वोटिंग का संदेह जताते हुए कुछ देर के लिए हंगामा भी किया गया. इसके बाद महाविकास आघाडी के नेताओं का ध्यान उस तरफ चला गया और शिंदे और उनके समर्थित विधायक इसी का फायदा उठाते हुए धीरे से सूरत से निकल लिए.

ऑपरेशन लोटस

ऑपरेशन लोटस के सबसे बड़े किरदार यानी एकनाथ शिंदे और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की दोस्ती जगजाहिर है. फडणवीस सरकार में उनके पास पीडब्ल्यूडी मंत्रालय था. बाला साहब के जाने के बाद शिंदे, बीजेपी और शिवसेना के बीच एक कड़ी के रूप में देखे जाते थे. स्मृद्धि एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट के दौरान एकनाथ शिंदे विधान परिषद और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच मजबूत राजनीतिक दोस्ती और मजबूत हुई. इसी दोस्ती का परिणाम आज की इस बगावत को माना जा रहा है.

उद्धव से नाराजगी की वजह?

एकनाथ शिंदे की बगावत एक दिन का परिणाम नजर नहीं आती है, बल्कि यह उद्धव ठाकरे द्वारा लगातार उनकी की जा रही अवहेलना और अनदेखी के कारण हुई है. शिवसेना प्रमुख के मुख्यमंत्री बनने से पहले एकनाथ शिंदे का नाम महाविकास आघाडी के मुख्यमंत्री पद के लिए आया था. इसके बाद उन्हें नगर विकास मंत्री बना दिया गया. जानकारी के मुताबिक शिंदे अपने मंत्रालय में मुख्यमंत्री और उनके बेटे आदित्य ठाकरे के दखल की वजह से नाराज थे.

एकनाथ शिंदे के करीबी लोगों का कहना था कि बिल्डर लॉबी से जुड़े लोग सीधे मुख्यमंत्री से मिल रहे हैं और उनके काम में अड़चन पैदा कर रहे थे. सूत्रों का कहना है कि शिंदे के साथ होटल में रुके अन्य सभी विधायक महाराष्ट्र के ग्रामीण भाग से आते हैं. वह ऐसे इलाके से आते हैं जहां शिवसेना के नाम का उनको कोई फायदा नहीं होता है. वह अपने दम पर किसी भी पार्टी में रहने के दौरान चुनाव जीत सकते हैं. ऐसे में वह महाविकास आघाडी के मंत्रियों द्वारा की जा रही है अवहेलना से नाराज थे. कई बार मीटिंग में भी उन्होंने अपने इलाकों को फंड नहीं मिलने की बात कही थी.

एकनाथ शिंदे कितने ताकतवर?

एकनाथ शिंदे को ठाकरे परिवार के बाद सबसे ताकतवर शिवसैनिक माना जाता है. 1980 में शिव सैनिक बने एकनाथ शिंदे लगातार चार बार से विधायक हैं. 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद जब शिवसेना भाजपा से अलग हुई तब उद्धव ठाकरे ने उन्हें विधायक दल का नेता चुना था.

शिवसेना का क्या कहना है?

इस पूरे मामले पर सामना में लिखे संपादकीय में शिवसेना ने कहा है कि महाराष्ट्र की सरकार को गिराने के लिए एक भी मौका बीजेपी वाले छोड़ते नहीं है. ढाई साल पहले अजीत पवार प्रकरण सुबह हुआ था, उसमें सफलता नहीं मिली. अब वही बेचैन आत्मा एकनाथ शिंदे की गर्दन पर बैठकर ऑपरेशन कमल कर रही है. कुछ भी करके राज्य की सरकार गिराना है इससे नफरत से वह लोग ग्रसित हैं. सोमवार को विधान परिषद की दसवीं सीट जीतते ही शिवसेना के कुछ विधायकों को उठा कर गुजरात ले जाया गया. उनके अगल-बगल कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी. इसमें से दो चार विधायकों ने वहां से निकलने और भागने का प्रयत्न किया.

सामना में आगे लिखा गया है कि विधायकों के साथ उनके शारीरिक हानि होने तक मारपीट की गई. अकोला के विधायक नितिन देशमुख को इतना मारा गया कि उन को हार्ट अटैक आ गया और उनको अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. विधायक कैलाश पाटिल घेराबंदी तोड़कर वहां से निकल लिए और भारी बारिश के बीच चलते हुए किसी तरह सड़क पर पहुंचकर मुंबई आए. इस तरह 4-5 विधायकों ने वहां से भागने का प्रयत्न किया. तब गुजरात पुलिस ने उन्हें पकड़कर ऑपरेशन कमल वालों के हवाले कर दिया. यह कैसा तरीका है, ऐसे में क्या लोकशाही की इज्जत रहेगी?

सत्ता की मस्ती नहीं चलेगी

सामना में आगे लिखा गया है कि शिवसेना के वर्धापन दिवस पर उद्धव ठाकरे ने एक जोरदार वक्तव्य दिया था, महाराष्ट्र में सत्ता की मस्ती नहीं चलेगी. केंद्रीय सत्ता की मस्ती दिखाकर महाराष्ट्र में तोड़फोड़ की राजनीति शुरू है. मां का दूध बेचने वाली औलाद शिवसेना में नहीं, ऐसा शिवसेना प्रमुख हमेशा कहते हैं. ऐसे लोग शिवसेना में पैदा हो, महाराष्ट्र मिट्टी से बेईमानी है. शिवसेना यह मां है. उस की कसमें खाकर राजनीति करने वालों ने मां के दूध का बाजार शुरू कर दिया है. उस बाजार के लिए सूरत का चुनाव किया गया. क्या इसे एक संयोग ही समझा जाए?

शिवसेना ने आगे लिखा है कि, छत्रपति शिवाजी महाराज से सूरत लूटा था और उसी सूरत में आज महाराष्ट्र की अस्मिता पर घाव करने का प्रयास शुरू है. भारतीय जनता पार्टी की आंख में महाराष्ट्र की ठाकरे सरकार चुभ रही है, उससे भी ज्यादा शिवसेना चुभ रही है. इसलिए पहले शिवसेना पर वार करो और फिर महाराष्ट्र सरकार पर घाव करो. ऐसी राजनीति में स्पष्ट दिखाई दे रहा है मध्यप्रदेश और राजस्थान में जिस तरह से तोड़फोड़ की राजनीति करके सरकार गिराई गई, वहीं महाराष्ट्र में प्रयोग करना और खुद को किंगमेंकर बताकर अपनी आरती उतारने का तीन अंकी नाटक शुरु है.

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