rahul gandhi

राहुल गांधी (Rahul Gandhi) इस देश के इकलौते ऐसे राजनेता है जो महामारी की शुरुआत से ही देश को और इस देश की सरकार को आगाह कर रहे थे. लेकिन मौजूदा सत्ता ने अपनी मशीनरी के सहारे और गोदी मीडिया के सहारे राहुल गांधी की बातों को तवज्जो ना देकर उनका मजाक उड़ाया.

राहुल गांधी लगातार देश की जरूरतों को समझते हुए, देश पर आने वाली मुसीबत को समझते हुए सरकार से जरूरी कदम उठाने की अपील कर रहे थे. लेकिन मीडिया राहुल गांधी को तवज्जो न देकर, उनकी बातों को कवरेज ना देकर भाजपा की प्रचार एजेंसी बनकर कर काम कर रही थी. भाजपा चुनाव प्रचार करती रही और मीडिया भाजपा का.

जब महामारी नहीं फैली थी उस समय राहुल गांधी अपनी चुनावी रैलियों के जरिए भी लगातार अपील कर रहे थे कि देश पर बहुत बड़ी मुसीबत आने वाली है और सरकार को इस ओर ध्यान देकर पहले से सतर्क होकर देश की रक्षा में जुट जाना चाहिए. लेकिन प्रधानमंत्री चुनावी प्रचार में व्यस्त थे.

आज अगर राहुल गांधी की बातों को तवज्जो दी गई होती सरकार के द्वारा भी और मीडिया के द्वारा भी तो शायद कुछ जाने बच सकती थी. लेकिन सरकार के लिए जरूरी था चुनाव और गोदी मीडिया (Godi Media) के लिए जरूरी था मौजूदा सत्ता का प्रचार और इसी जरूरत में हजारों लोग अपनी जान गवा बैठे.

राहुल गांधी लगातार सवाल कर रहे थे कि जिस समय देश पर मुसीबत आने वाली थी, उस समय सरकार कर क्या रही थी? तैयारी क्यों नहीं की? राहुल गांधी के ही सवाल को अब मद्रास हाई कोर्ट ने दोहराते हुए पूछा है कि, केंद्र सरकार आखिर पिछले 14 महीने से क्या रही थी? पहले बिहार फिर बंगाल और क्या?

बता दे कि पूरे देश में जिस समय महामारी अपना पैर पसार रही थी, उस समय प्रधानमंत्री मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह तक अपनी चुनावी रैलियों और रोड शो में व्यस्त थे. देश में हजारों लोग अपनी जान गवा रहे थे और प्रधानमंत्री बंगाल की चुनावी रैली में भीड़ देखकर खुश हो रहे थे. इस बात के लिए प्रधानमंत्री की आलोचना भी हुई थी.

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