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भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया है. अभी भारतीय टीम के लिए धोनी खेलते हुए नहीं दिखाई देंगे.

एमएस शुक्रवार को ही चेन्नई के बाकी खिलाड़ियों के साथ अनुकूलन शिविर में हिस्सा लेने के लिए चेन्नई पहुंचे थे. ऐसे में किसी को भी बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि पूर्व कप्तान अचानक से ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर देंगे. धोनी टेस्ट फॉर्मेट से काफी पहले ही संंन्यास ले चुके हैं.

हालांकि एमएस धोनी आईपीएल खेलते रहेंगे. ऐसे में उनके प्रशंसक आईपीएल में धोनी को खेलते हुए देख सकते हैं. 39 वर्षीय एमएस धोनी टेस्ट क्रिकेट से पहले ही संन्यास का ऐलान कर चुके थे. हालांकि वनडे और टी-20 में भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बने हुए थे. लेकिन अब धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया है. धोनी क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में टीम इंडिया के कप्तान भी रह चुके हैं. साथ ही धोनी के नाम कई बड़े कीर्तिमान भी दर्ज हैं.

महेंद्र सिंह धोनी ने इंस्टाग्राम में पोस्ट कर खुद के संन्यास लेने का ऐलान किया है. अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में एमएस धोनी ने लिखा है, ‘आप सभी के प्यार और समर्थन के लिए बहुत धन्यवाद. आज शाम 7.29 बजे के बाद से मुझे रिटायर समझा जाए.’ अपने इस पोस्ट के साथ ही धोनी ने एक वीडियो भी शेयर किया है.

एमएस धोनी पिछले साल न्यूजीलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले के बाद से ही सक्रिय क्रिकेट से दूर चल रहे थे और क्रिकेट पंडितों और पूर्व क्रिकेटरों के बीच तब से ही लगातार उनके भविष्य को लेकर चर्चा चल रही थी, लेकिन इन चर्चाओं के बीच एमएस ने हमेशा ही चुप्पी साधे रखी.

अपने करियर में धोनी अभी तक हर फॉर्मेट में मिलाकर 17,266 रन बना चुके हैं, जिनमें 16 शतक और 108 अर्धशतक शामिल हैं. 38 वर्ष के धोनी ने भारत के लिये 350 वनडे, 90 टेस्ट और 98 टी20 खेले हैं. वह विकेट के पीछे 829 बल्लेबाजों को शिकार बना चुके हैं. धोनी ने वनडे में एक विकेट भी लिया है.

23 दिसंबर 2004 को बांग्लादेश के खिलाफ वनडे सीरीज के पहले मैच में उतरे लंबे बालों वाले धोनी उस वक्त बिना किसी पहचान वाले खिलाड़ी थे. जो घरेलू क्रिकेट पर नजर रखते रहे हों, सिर्फ वो ही उनके बारे में कुछ जानते थे. टीम इंडिया में आने से पहले धोनी ‘इंडिया ए’ टीम के साथ केन्या दौरे पर गए थे, जहां ट्राइएंगुलर सीरीज में उन्होंने अपने बल्ले से जोरदार प्रदर्शन किया था और फिर सेलेक्टर्स की निगाहें उनकी ओर मुड़ी थीं.

हालांकि, धोनी की शुरुआत किसी बुरे सपने से कम नहीं रही. अपने पहले ही मैच में सिर्फ एक गेंद खेलकर वो रन आउट हो गए. वो भी बिना खाता खोले. अगले 2 मैच में भी धोनी सिर्फ 12 और 7 रन ही बना सके. अब इसे उस दौर की टीम इंडिया में एक अच्छे विकेटकीपर बल्लेबाज की कमी कहें, या धोनी की क्षमता पर टीम मैनेजमेंट का भरोसा, धोनी को पाकिस्तान के खिलाफ 2005 की घरेलू वनडे सीरीज में भी मौका मिल गया. उस पारी के बाद रांची से निकले इस सुपरस्टार ने दुनिया की क्रिकेट पर राज किया और अपने ‘कैप्टन कूल’ अंदाज से टीम को इंडिया को दो बार वर्ल्ड चैंपियन बनाया.

सीरीज के दूसरे मैच में कप्तान सौरव गांगुली ने धोनी को तीसरे नंबर पर भेजने का फैसला लिया. उस एक फैसले के बाद इतिहास पूरी तरह से बदल गया. विशाखापत्तनम में हुए इस मैच में धोनी ने सिर्फ 123 गेंद में 148 रन ठोक डाले थे. इसके बाद तो बस धोनी युग की शुरुआत भारतीय क्रिकेट में हो गई. धीरे-धीरे टेस्ट टीम में धोनी ने अपनी जगह बनाई और 2007 आते-आते 26 साल के धोनी को भारतीय टीम की कमान मिल गई.

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