Mallikarjun Kharge

मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) को बुधवार को औपचारिक रूप से निर्वाचन पत्र सौंपा गया और इसी के साथ उन्होंने एआईसीसी मुख्यालय में पदभार ग्रहण कर लिया. इस दौरान शशि थरूर ने पार्टी को आगे ले जाने में कांग्रेस के नए अध्यक्ष को पूरा सहयोग और समर्थन देने का संकल्प लिया. इससे पहले कांग्रेस में सीताराम केसरी गैर गांधी अध्यक्ष रहे थे. कांग्रेस के 137 साल के इतिहास में अध्यक्ष पद के लिए छठवीं बार चुनाव हुए.

कांग्रेस का अध्यक्ष पद संभालते ही मल्लिकार्जुन खड़गे काफी आक्रामक नजर आएं. उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि न्यू इंडिया में भूख, प्रदूषण, महंगाई बढ़ रही है. नए भारत में गोडसे को देशभक्त और महात्मा गांधी को देशद्रोही कहा जाता है. वे आरएसएस का संविधान लाना चाहते हैं. एक नया भारत बनाने के लिए वे कांग्रेस मुक्त भारत चाहते हैं. क्योंकि वह जानते हैं कि जब तक कांग्रेस है वह ऐसा नहीं कर सकते. हम ऐसा नहीं होने देंगे और इसके लिए लड़ते रहेंगे.

मलिकार्जुन खड़गे के सामने चुनौतियों का पहाड़ है. कांग्रेस को जिंदा करने की चुनौती है उनके सामने. 2023 में 10 राज्यों में विधानसभा के चुनाव में उनके नेतृत्व क्षमता की झलक देखने की कोशिश भी राजनीतिक विश्लेषक करेंगे. कांग्रेस 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में बुरी तरह शिकस्त खा चुकी है. अब उसके सामने 2024 के लोकसभा चुनाव में करो या मरो वाली स्थिति आ खड़ी हुई है. ऐसे में 2024 से ठीक पहले जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं वहां जीत दिलाने की चुनौती उनके सामने है.

कर्नाटक में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. यहां बीजेपी अंदरुनी कलह से जूझ रही है. कांग्रेस को उम्मीद है कि मल्लिकार्जुन खड़गे के अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी को कर्नाटक में फायदा होगा. लोकसभा चुनाव 2014 से पहले 10 राज्यों में विधानसभा चुनाव होंगे और खड़गे के सामने सबसे बड़ी परीक्षा पार्टी को कम से कम प्रमुख राज्यों में जीत दिलाने की होगी. हिमांचल तथा गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की क्या रणनीति होती है, इसको लेकर पार्टी के नए अध्यक्ष क्या कदम उठाते हैं, इस पर भी ज्यादातर लोगों की नजरें हैं.

कांग्रेस पार्टी भी अपनी अंदरूनी समस्याओं से जूझ रही है उससे निपटना भी खड़गे के लिए चुनौती भरा हो सकता है. उन्होंने कहा था कि मैं उदयपुर घोषणापत्र को लागू करूंगा. इसके साथ ही अगर बात राजस्थान की करे तो अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच जारी खींचतान से खड़गे कैसे निपट ते हैं यह भी देखना दिलचस्प होगा. राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले कुछ बदलाव होता है या फिर अशोक गहलोत ही मुख्यमंत्री बने रहते हैं और अगर ऐसा होता है तो सचिन पायलट का रुख क्या होता है, इस पर भी सबकी नजरें टिकी हुई है.

आपको बता देंगे कांग्रेस इस वक्त बीजेपी को कई मोर्चों पर घेरने की कोशिश कर रही है. सबसे पहले कांग्रेस ने गैर गांधी अध्यक्ष बनाकर परिवारवाद के मुद्दे पर बीजेपी को जवाब देने की कोशिश की है. इसके अलावा राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के सहारे कांग्रेस ने बीजेपी के माथे पर बल ला दिया है. हालांकि इस यात्रा को मीडिया में तवज्जो कम मिल रही है. लेकिन जिस तरह का जनसैलाब राहुल गांधी की इस यात्रा के साथ देखने को मिल रहा है उससे कहीं ना कहीं बीजेपी चिंतित जरूर होगी.

पिछले गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने बीजेपी को अच्छी फाइट दी थी. इस बार भी कांग्रेस गुजरात में बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद कर रही है. लेकिन दूसरी तरफ बीजेपी तथा आम आदमी पार्टी के बीच धार्मिक मुद्दों पर खींचतान जारी है. आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल धार्मिक मुद्दों को उछाल कर गुजरात में आम आदमी पार्टी की सरकार बनाने के दावे कर रहे हैं. दूसरी तरफ बात अगर कांग्रेस पार्टी की की जाए तो राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के जरिए महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर बीजेपी से सवाल कर रहा है. वहीं बीजेपी इस उम्मीद में है कि मोदी के नाम के करिश्मे के सहारे वह एक बार फिर गुजरात पता करने में कामयाब होगी.

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