Mudassir's mother Nikhat Parveen

रांची हिंसा में मा’रे गए 15 साल के लड़के मुदस्सिर की मां निखत परवीन ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि मुझे मेरे बेटे की मौ’त का गुस्सा नहीं है. वह शहीद हो गया है. हमारे हुजूर पाक हमारे दिल में बसते हैं और जो दिल में बसते हैं उनके लिए हम सीने पर गो’ली खाने के लिए तैयार हैं. इसे मौ’त नहीं कहते इसे सहादत कहते हैं.

रांची हिंसा में मुदस्सिर के अलावा 21 साल के साहिल की भी मौ’त गोली लगने से हुई है. हालांकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि यह मौ’त पुलिस की गोली लगने से हुई है या फिर किसी दूसरी बंदूक से निकली गोली से. लेकिन जिन दोनों मुस्लिम लड़कों को गोली लगी वह निहायत ही गरीब घर से आते थे. साहिल ऑटो वाले का बेटा था तो वहीं मुदस्सीर के अब्बा सब्जी फल का ठेला लगाते थे.

रांची का हिंदपीढ़ी मोहल्ला यही वह इलाका है जहां 10 जून को शुक्रवार के दिन हिंसा उपद्रव और आगजनी देखने को मिली. आपको बता दें कि मुदस्सिर की मां की आंखों के आंसू नहीं सूख रहे हैं. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मेरे बेटे की मौ’त की जिम्मेदार सरकार है. सड़क पर क्या हो रहा था सबके सामने है, सभी को पता है जिसके कारण मेरा बेटा मरा है उसकी भी मौ’त होना चाहिए. बेटे ने हाल में ही मेट्रिक का एग्जाम दिया था. 2 दिन बाद उसका रिजल्ट आने वाला था.

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, कंप्यूटर का क्लास का करता था पूरी बस्ती में बच्चे बूढ़े जवान उससे मोहब्बत करते थे. जिसे सब प्यार करें, ऐसा बच्चा कैसा होगा आप समझ सकते हैं. उन्होंने कहा कि मेरा बच्चा गुनाहगार नहीं था, कभी उसकी किसी से लड़ाई नहीं हुई, तब उस 15 साल के बच्चे को गो’ली क्यों मार दी गई? अगर मेरे बाबू ने ईट, पत्थर, तलवार, लाठी चलाई होती तब मैं मानती वह गलत था और गोली मार दी गई. लेकिन वह निहत्था था.

आपको बता दें कि इसके अलावा जिस दूसरे बच्चे की मृत्यु हुई है उसकी मां सोनी परवीन का भी रो रो कर बुरा हाल है. अब इतने आंसू बह चुके हैं कि आंखें सूख गई हैं, चीख चीख कर गला बैठ गया है. वह मीडिया से बात करते हुए कहती हैं कि साहिल पांच वक्त का नमाजी था, कभी किसी से झगड़ा नहीं हुआ. सुबह उठकर मोबाइल की दुकान पर काम करने जाता और शाम को वापस आ जाता था. वही घर चलाया करता था.

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