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मुख्तार अंसारी को बुधवार तड़के पंजाब से बांदा जेल लाया गया. बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के उत्तर प्रदेश आने के बाद उसकी मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही है. अब उत्तर प्रदेश सरकार मुख्तार अंसारी की विधानसभा सदस्यता खत्म करवाने को लेकर विधिक राय ले सकती है.

पिछले 24 साल से लगातार विधायक मुख्तार अंसारी की अगर विधानसभा सदस्यता जाती है तो उत्तर प्रदेश सरकार के लिए यह बड़ी कामयाबी होगी. कानून के मुताबिक अगर कोई विधानसभा सदस्य विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होने से 60 दिन तक अनुपस्थित रहता है तो आर्टिकल 190 के तहत उसकी सदस्यता खत्म हो सकती है.

इस आर्टिकल 190 के अलावा मुख्तार अंसारी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को भी सदस्यता खत्म करने का आधार यूपी सरकार बनाने वाली है. आपको बता दें कि मुख्तार अंसारी पर उत्तर प्रदेश में 52 मुकदमे दर्ज हैं. जिनमें 15 ट्रायल स्टेज पर हैं.

मुख्तार अंसारी पर बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या कराने का भी आरोप लगा था. इस मामले की जांच सीबीआई ने की थी. लेकिन गवाहों के मुकर जाने के बात मुख्तार अंसारी इस केस में बरी हो गया था. इसी बीच मुख्तार अंसारी के यूपी आते ही उसे एमपी एमएलए कोर्ट ने तलब कर लिया है.

लखनऊ जेल के अधिकारियों के साथ मारपीट के 21 साल पुराने केस में मुख्तार अंसारी को तलब किया गया है. कोर्ट की ओर से मुख्तार अंसारी को पेश करने का कई बार आदेश दिया गया था, लेकिन पंजाब की रोपड़ जेल में बंद होने के कारण वह पेश नहीं हो सका था.

उल्लेखनीय है कि मुख्तार अंसारी को लाने के लिए योगी सरकार और पंजाब सरकार के बीच उच्चतम न्यायालय तक मामला चला. 26 मार्च को शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाते हुए मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश भेजने का आदेश दिया था. न्यायालय ने पंजाब की जेल में बंद मुख्तार अंसारी को दो सप्ताह में उत्तर प्रदेश भेजने का निर्देश दिया था.

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