Nitin Gadkari news

नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चाओं में बने रहते हैं. इस बार भी उन्होंने एक बयान दिया है. यह बयान भारतीय राजनीति को लेकर है और ऐसा लगता है कि जैसे वह भारतीय राजनीति में अभी जो कुछ भी चल रहा है उससे खुश नहीं है. गडकरी अक्सर किसी ना किसी बहाने कुछ ना कुछ जरूर ऐसा बोल देते हैं जिसका कनेक्शन बीजेपी की अंदरूनी राजनीति से लोग निकालने लगते हैं.

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) जब भी ऐसा कुछ बयान देते हैं तो सबसे पहले अपना टायर गेट तय करते हैं. जब भी बोलते हैं तो सीधे निशाने पर लगता है. ज्यादातर मामलों में साफ-साफ समझ में आता भी है, जबकि वह साफ बयान नहीं देते हैं. नितिन गडकरी अपने बयान में जैसे भी शब्दों का इस्तेमाल करते हैं लेकिन कटाक्ष करना वह कतई नहीं भूलते हैं और उनके बयान मे इस बात का वह ख्याल रखते हैं कि शब्दों का सफर मंजिल तक निश्चित तौर पर पहुंचे.

नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) का ताजा बयान जो उन्होंने दिया है उसमें कहा है कि आज राजनीति सिर्फ सत्ता के लिए हो रही है. जन सरोकार और विकास के मुद्दे से आज की राजनीति का लेना देना नहीं है. उनके इस बयान से ऐसा लग रहा है कि वह अपनी खुद की पार्टी पर निशाना साध रहे हैं. जबकि उन्होंने साफ तौर पर कुछ भी नहीं कहा है. लेकिन ऐसा लग रहा है कि उनका निशाना प्रधानमंत्री मोदी और उनके सहयोगी गृह मंत्री अमित शाह की तरफ है. लेकिन उनके बयान में यह साफ नहीं है, लेकिन समझने वाले समझ रहे हैं.

Nitin Gadkari खुद को कहां देख रहे हैं?

सबसे अहम बात यह है कि अपनी नजरों से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) खुद को भारतीय राजनीति में कहां देख रहे हैं? सवाल यह है कि नितिन गडकरी राजनीति छोड़ने जैसी बातें क्यों कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि कभी-कभी लगता है कि राजनीति छोड़ दी जाए, क्योंकि अब राजनीति सत्ता के लिए हो रही है. साफ तौर पर नितिन गडकरी ने ऐसा कुछ तो नहीं कहा लेकिन संकेत काफी हद तक राजनीति से ऊब जाने जैसा ही है. अमित शाह जब बीजेपी के अध्यक्ष बने और केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी उसके बाद से ही ऐसा लगता है कि बीजेपी सत्ता पाने के लिए साम-दाम-दंड-भेद हर तरीके अपनाती रही है. तो क्या नितिन गडकरी का यह बयान इसी से संबंधित था?

लेकिन गडकरी ने अपने बयान में यह भी कहा कि हमें यह समझने की जरूरत है कि आखिरकार राजनीति क्या है? अपनी बातों से राजनीति को लेकर जो स्केच वह खींच चुके हैं, हो सकता है लोग उसके दायरे में अपने अपने हिसाब से सोच रहे हो. कुछ लोगों का ध्यान राजनीति की बुराइयों की तरफ गया होगा, हो सकता है कुछ लोगों को लगा हो कि वह तो सत्ता के केंद्र में जमे हुए हैं इसलिए उनके मन में ऐसे उल जलूल ख्याल आते होंगे. ऐसे भी लोग होंगे जो नितिन गडकरी जैसा बनना चाहते होंगे और उनके ही मुंह से ऐसी बातें सुनकर पुनर्विचार करने लगे होंगे.

नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) अपने बयान में कहते हैं कि, अगर बारीकी से देखें तो राजनीति समाज के लिए, समाज का विकास करने के लिए है. लेकिन मौजूदा वक्त को अगर देखा जाए तो राजनीति का इस्तेमाल शत प्रतिशत सत्ता पाने के लिए किया जा रहा है. जाहिर है यह सुनते ही ज्यादातर लोग अलग-अलग कयास लगाने लगे होंगे. नितिन गडकरी की पार्टी बीजेपी केंद्र में सत्ता पर काबिज है और देश के कई राज्यों में भी. कुछ दिन पहले उनकी पार्टी ने महाराष्ट्र में भी सत्ता में हिस्सेदारी पाने में सफल हुई है.

महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन क्या Nitin Gadkari को रास नहीं आया?

नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने जो बयान दिया है उसके कई मतलब निकाले जा सकते हैं. कहीं ऐसा तो नहीं है कि नितिन गडकरी को महाराष्ट्र में महीना भर पहले हुए सत्ता परिवर्तन से बीजेपी की जो भूमिका सामने आई है वह पसंद नहीं आई? नितिन गडकरी को संघ के काफी करीब माना जाता है. वह संघ के मुख्यालय नागपुर का ही लोकसभा से प्रतिनिधित्व भी करते हैं. बीती बातों को याद करें तो संघ प्रमुख मोहन भागवत ने देवेंद्र फडणवीस को किसी तरह की तोड़फोड़ ना करने की सलाह दी थी. वह फिर भी नहीं माने. एक बार रात को से एक्टिव हुए तो सुबह ही सुबह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ गए. 72 घंटे बाद उतर भी गए थे.

अगर महाराष्ट्र को लेकर नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ऐसा कुछ बयान दे रहे हैं तो निश्चित तौर पर वह तकलीफ में होंगे. अगर महाराष्ट्र निवासी होने के नाते उनको उद्धव ठाकरे की सरकार का काम अच्छा लग रहा होगा तो भी सत्ता हासिल करने के लिए बीजेपी ने जो किया है निश्चित तौर पर उन्हें तकलीफ दे रहा होगा. बीजेपी इस समय सत्ता के शिखर पर है और गोल्डन पीरियड की तरफ बढ़ रही है और ऐसे मौके पर नितिन गडकरी निराश है. नितिन गडकरी बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, लेकिन हाल फिलहाल उनकी भूमिका एक मंत्रालय तक सीमित है. खास बात यह है कि नितिन गडकरी के कामकाज की तारीफ भी होती है और नितिन गडकरी कई बार अपनी ही सरकार के खिलाफ भी बयान बाजी कर देते हैं.

नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने कहा कि पहले राजनीति विकास के लिए होती थी, समाज के लिए होती थी. लेकिन आज सत्ता के लिए हो रही है और देखा जाए तो कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि दूसरी पार्टियों की राज्य की सरकारों को गिराने के लिए कई बार विधायकों की खरीद फरोख्त होती हुई दिखाई देती है. कई दिनों तक ड्रामा चलता है, मीडिया में एक अलग माहौल देखने को मिलता है और अंत में कई राज्यों की सरकारों को गिरा दिया गया और उन पार्टियों के विधायकों को अपनी पार्टी में मिलाकर बीजेपी ने वहां सरकार बना ली. शायद नितिन गडकरी इन बातों से दुखी हैं और जिस तरह की राजनीति इस वक्त देश में हो रही है वह उन्हें कतई पसंद नहीं आ रही है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here