Uttar Pradesh Assembly Elections Yogi sarkaar

कुछ ही महीनों बाद उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Elections) होने हैं. बीजेपी लगातार दावे कर रही है कि वह उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी. इसके साथ-साथ योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) भी लगातार हवा हवाई दावे कर रहे हैं सत्ता में वापसी को लेकर.

अलग-अलग न्यूज़ चैनलों द्वारा सर्वे की भी भरमार दिखाई दे रही है. जिसमें योगी सरकार को जनता का भरपूर समर्थन दिखाया जा रहा है और 2022 में फिर से योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार की वापसी बताई जा रही है. न्यूज़ चैनलों के सर्वे किस आधार पर हो रहे हैं आजकल यह बात जनता भली-भांति जान चुकी है.

लेकिन उत्तर प्रदेश के अंदर कुछ राजनीतिक पार्टियों के और कुछ गैर राजनीतिक संगठनों द्वारा किए गए सर्वे में यह बात सामने आ रही है कि 75% लोग यह मानकर चल रहे हैं कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जनता के हित में काम नहीं किया है, जिस वक्त जनता को सरकार की जरूरत थी उस वक्त योगी सरकार अपने प्रचार में व्यस्त थी. योगी सरकार में जिस तरीके से अफसरशाही हावी रही है उससे भी उत्तर प्रदेश की जनता नाराज नजर आ रही है.

आलोचना की आवाज को जिस तरीके से योगी सरकार में कुचलने की कोशिश हुई है यह बात भी उत्तर प्रदेश की जनता को नागवार गुजरी है. आलोचना को बर्दाश्त करने में योगी सरकार पूरी तरीके से विफल रही है. आलोचना करने वालों पर कई तरह की धाराएं लगाकर उनपर एफआईआर तक दर्ज की गई है और सलाखों के पीछे तक भेजा गया है.

जनता के टैक्स के पैसे से जिस तरीके से योगी सरकार ने अपना प्रचार किया है और उत्तर प्रदेश को लेकर झूठे विज्ञापन दिए हैं और अपनी सरकार को हर मामले में नंबर वन बताया है, उससे भी उत्तर प्रदेश की जनता घासी नाराज है. क्योंकि जो दावे योगी सरकार लगातार विज्ञापनों के माध्यम से कर रही थी वह जनता के बीच हकीकत में नजर नहीं आ रहे थे. कानून व्यवस्था की बदतर हालत उत्तर प्रदेश में किसी से छुपी नहीं है.

गरीब मजबूर को डराया गया है, धमकाया गया है, मुंह बंद कराने की कोशिश की गई है .विरोधियों को दबाकर, बुलडोजर चलवा कर यह दिखाने की कोशिश की गई है कि योगी सरकार मे गुंडे और बाहुबलियों पर कार्यवाही हुई है. जबकि हकीकत यह है कि यहां भी राजनीतिक पार्टी देखकर ही, राजनीतिक विचारधारा देखकर ही निर्णय लिए गए हैं.

उत्तर प्रदेश में आए दिन हत्या और बलात्कार की घटनाएं सामने आती है. अगर योगी सरकार में कानून व्यवस्था दुरुस्त रहती तो क्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के क्षेत्र गोरखपुर से लेकर कानपुर तक ऐसी घटनाएं देखने को मिलती? योगी सरकार पर यह भी आरोप लगे हैं कि अधिकतर अपराधियों ने बीजेपी की सदस्यता ले ली और उन पर कोई कार्यवाही नहीं हुई. कुल मिलाकर देखा जाए तो उत्तर प्रदेश की जनता का भरोसा योगी सरकार से, योगी सरकार के दावों से, योगी सरकार में कानून व्यवस्था से उठ चुका है.

समाजवादी पार्टी भी गुंडाराज के नाम से बदनाम थी. लेकिन योगी सरकार के मुकाबले लोगों का यही कहना है कि इस बार समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में वापसी करने में कामयाब हो जाएगी. जनता का मानना है कि योगी सरकार जनता के बीच काम करती हुई कम दिखाई दी है, लेकिन प्रचार हद से अधिक हुआ है, जिसका फायदा चुनाव में नहीं मिलना है. अगर बात रोजगार की की जाए तो उत्तर प्रदेश की जनता का यही कहना है कि रोजगार देने के मामले में समाजवादी पार्टी और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी सरकार दोनों फेल रही रही हैं.

उत्तर प्रदेश की जनता का मानना है कि रोजगार की उम्मीद इन दोनों पार्टियों की सरकारों से नहीं की जा सकती. उत्तर प्रदेश के कई लोगों का कहना है कि सरकार चाहे समाजवादी की बने या फिर बीजेपी की लेकिन रोजगार के लिए तो लोगों को दूसरे प्रदेशों में ही जाना है. यानि रोजगार के मामले में बीजेपी और समाजवादी पार्टी दोनों ही जनता को भरोसा देने में नाकाम रही है. पिछले दिनों बीजेपी के सोशल मीडिया हैंडल से कई तरह के रोजगार दिए जाने के वीडियो वायरल हुए थे, जिसमें दावा किया गया था कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने लाखों लोगों को रोजगार दिया है.

हालांकि बाद में वह वीडियो फर्जी साबित हुए थे. दुर्गेश चौधरी जैसे तथाकथित लेखपाल नेपाल भाग गए थे. बीजेपी और पूरी आरएसएस आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अपने चुनावी रणनीतियां बनाने में लग चुकी है. लेकिन जिस तरह से उत्तर प्रदेश की जनता के बीच, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपना भरोसा खोया है, उससे कहीं ना कहीं बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के बीच डर की स्थिति जरूर पैदा हुई है.

महामारी के दौर में भी उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की लोकप्रियता रसातल में गई है. चरमराई हुई उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर जिस प्रकार के दावे योगी सरकार ने किए हैं वह भी उत्तर प्रदेश की जनता के गले नहीं उतरे.

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