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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में अध्यक्ष और राजस्थान में मुख्यमंत्री का चयन आपस में उलझता हुआ दिखाई दे रहा है. अशोक गहलोत के अध्यक्ष पद के नामांकन के बीच सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावनाएं बनने लगी, ऐसे में गहलोत गुट हाईकमान को आंख दिखा रहा है गहलोत गुट ने विधायक दल की बैठक का बहिष्कार कर दिया. कांग्रेस अध्यक्ष चुने जाने तक यानी 19 अक्टूबर तक यह किसी भी मीटिंग में शामिल नहीं होंगे. एक तरह से देखा जाए तो राजस्थान एक बार फिर से कांग्रेस के लिए मुसीबत का सबब बन गया है.

यहां पर याद करना होगा कि साल 2020 में भी ऐसा ही सियासी संकट खड़ा हुआ था. जब पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ गुड़गांव के पास मानेसर में स्थित एक रिसॉर्ट में चले गए थे. तब कई दिनों तक अशोक गहलोत और सचिन पायलट आमने-सामने थे और कांग्रेस हाईकमान को दखल देकर किया कि संघर्ष को खत्म करना पड़ा था. पिछले दिनों जब चर्चा शुरू हुई कि कांग्रेस का अध्यक्ष अशोक गहलोत बन सकते हैं तभी से राजस्थान में सियासी पारा चढ़ने लगा था.

प्रोजेक्ट पायलट गांधी परिवार का है?

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को इस बात का अंदाजा था कि उनकी जगह गांधी परिवार सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बना सकता है. अशोक गहलोत जब अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करने को तैयार हो गए उसके बाद उन्होंने बयान दिया कि कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव जीतकर भी कोई मुख्यमंत्री, मंत्री रह सकता है. लेकिन जब राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उदयपुर संकल्प के तहत एक ‘व्यक्ति एक पद’ की पैरवी की तो उनसे मिलने के बाद गहलोत भी इस लाइन पर आ गए.

मीडिया से बातचीत में अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने की बात भी कही. लेकिन अपनी पसंद का मुख्यमंत्री बनवाने पर अड़े रहे. कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के लिए नामांकन से पहले केंद्रीय नेतृत्व ने जिस तरह पर्यवेक्षक भेज कर अपनी चलाने की कोशिश की उससे अशोक गहलोत को ‘प्रोजेक्ट पायलट’ नजर आने लगा और उन्होंने पीछे के दरवाजे से आलाकमान को अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की है. लेकिन क्या आलाकमान इसके आगे झुक जाएगा, यह देखने वाली बात होगी.

जिस तरह के तेवर गहलोत समर्थक विधायकों ने रविवार को राजधानी जयपुर में दिखाएं हैं उससे साफ लगता है कि सचिन पायलट की राह मुश्किल लग रही है. इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष के चयन के लिए नामांकन शुरू हो चुके हैं. जानकारी मिल रही है कि कांग्रेस हाईकमान के द्वारा अशोक गहलोत से राजस्थान में पैदा हुए सियासी संकट के बारे में जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनके हाथ में कुछ भी नहीं है और विधायक नाराज हैं. हालांकि कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि सियासी संकट को जल्द सुलझा लिया जाएगा.

सूत्रों से निकलकर जो जानकारी आ रही है उसके मुताबिक कुछ हफ्ते पहले जब सोनिया गांधी ने अशोक गहलोत से पार्टी का काम संभालने की बात कही थी तभी उन्हें एहसास हो गया था कि ऐसी परिस्थिति में उन्हें राजस्थान के मुख्यमंत्री की गद्दी छोड़नी होगी. लेकिन गहलोत बड़ा गेम खेल गए. सोनिया गांधी के सामने तो कुछ नहीं कहां लेकिन पर्दे के पीछे की बिछाई हुई बिसात उन्हीं की दिखाई दे रही है. राजस्थान के अंदर फिर से खड़े हुए सियासी बवाल की वजह से कांग्रेस हाईकमान को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है या यूं कहें कि काफी किरकिरी हो रही है. साल 2020 में आए संकट को कांग्रेस हाईकमान ने सुलझा लिया था, लेकिन क्या इस बार वह ऐसा कर पाएगा इसको लेकर सवाल है.

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