Pragya Mishra

आंदोलनकारी किसानों के आगे घुटने टेकते हुए हैं मोदी सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश से माफी मांगते हुए कहा है कि वह तीनों कृषि कानूनों को वापस करने का ऐलान करते हैं.

हालांकि आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि जब तक यह कानून संसद के अंदर वापस नहीं होंगे तब तक उनका घर वापसी का प्लान नहीं है. बता दें कि मोदी सरकार का कहना था कि कृषि के क्षेत्र में सुधार के लिए तीनों कृषि कानून लाए गए हैं. हालांकि आंदोलनकारी किसानों का कहना था कि यह किसानों के लिए डेथ वारंट है.

तीनों कृषि कानूनों के वापसी के ऐलान के बाद पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा (Pragya Mishra) ने एक ट्वीट करके सवाल किया है जो काफी वायरल हो रहा है. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है कि, मोदी जी की माफी के बाद उन एंकरों का क्या होगा जो..एक डेढ़ साल से गली से गुत्ते से भी ज्यादा गंदे तरीके से किसानों पर भौंक रहे थे. चाटुकारिता में हमेशा थूककर चाटना पड़ता है.

बता दें कि जब से मोदी सरकार कृषि सुधार के नाम पर यह तीनों कृषि कानून लेकर आई थी उसी वक्त से तमाम मीडिया चैनलों पर इन कानूनों के फायदे बताए जा रहे थे और आंदोलनकारी किसानों के बारे में बुरा भला कहा जा रहा था, बीजेपी के नेताओं की तरफ से भी और बीजेपी समर्थक पत्रकारों की तरफ से भी.

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में बस कुछ ही महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं और कृषि कानूनों का विरोध पंजाब, हरियाणा तथा पश्चिमी यूपी में बीजेपी को भारी पड़ रहा था. उत्तर प्रदेश बीजेपी किसी भी कीमत पर 2022 में जीतना चाहती है और जो फीडबैक बीजेपी को मिल रहा था वह शायद बीजेपी के लिए ठीक नहीं था.

यह कानून चुनावी हार से बचने के लिए मोदी सरकार द्वारा वापस लिया गया है. तमाम चैनलों पर अब इस बात की डिबेट हो रही है कि क्या कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला बीजेपी को चुनावी लाभ देगा उत्तर प्रदेश में? लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि बीजेपी ही तो लाई थी तीनों कृषि कानून और वापस ले लिया है तो इसमें किसानों पर कोई एहसान तो किया नहीं है?

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