Sonia Gandhi Congress

उदयपुर में कांग्रेस के तीन दिवसीय चिंतन शिविर की तैयारियां इस वक्त जोरों पर हैं. 13 मई से शुरू होने वाले कांग्रेस के 9 संकल्प शिविर में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित 422 प्रतिनिधि भाग लेंगे. नव संकल्प शिविर को लेकर राजस्थान के उदयपुर शहर के कोडियात मार्ग पर 60000 स्क्वायर फीट गार्डन में हेलीपैड को अंतिम रूप दिया जा रहा है.

सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कई वरिष्ठ नेताओं के हेलीकॉप्टर यहीं पर उतरेंगे. नेताओं की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है. यहां पर मेहमानों के स्वागत को लेकर होल्डिंग्स लगना शुरू हो चुके हैं. कांग्रेसी चिंतन शिविर को खास बनाने जा रही है. नव संकल्प शिविर को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में सोमवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक भी हुई.

कांग्रेस की ओर से शिविर में भाग लेने वाले नेताओं को लेकर मानदंड भी तय कर दिए गए हैं. कांग्रेस ने शिविर की रणनीति बनाने के लिए छह कमेटियों का गठन कर के 54 सदस्य बनाए हैं. अर्थव्यवस्था से जुड़ी कमेटी के सचिन पायलट सदस्य हैं. वहीं राजस्थान से राज्यसभा सदस्य के तौर पर मनमोहन सिंह, केसी वेणुगोपाल और नीरज डांगी भी शिविर में भाग लेंगे.

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि शिविर में प्रतिनिधियों के माध्यम से भारत की विविधता को दिखाने की कोशिश की जाएगी. साथ ही युवाओं और महिलाओं की भागीदारी पर जोर दिया गया है. उन्होंने कहा है कि 50 फ़ीसदी 50 साल से कम आयु के प्रतिनिधि होंगे, इनमें से 30 से 40 फ़ीसदी 40 साल से कम उम्र के हैं. वहीं 21 फ़ीसदी महिला प्रतिनिधियों को शिविर में बुलाया गया है.

2024 की बड़ी तैयारी

2014 के बाद से ही कांग्रेस लगातार कई चुनाव हार चुकी है. इस नव संकल्प शिविर के माध्यम से कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच नई ऊर्जा का संचार करके जनता को एक नया संदेश देना चाहती है. कांग्रेस जनता को बताना चाहती है कि जनता के मुद्दे क्या है और कांग्रेस उनके साथ हर मुद्दे पर खड़ी है. इसके साथ-साथ वह मौजूदा सत्ताधारी पार्टी बीजेपी को भी सचेत करना चाहती है कि देश में लंबे समय तक शासन करने वाली कांग्रेस किसी भी मुद्दे पर बीजेपी के सामने हार नहीं मानेगी.

चिंतन शिविर से पहले गुजरात में रैली करके राहुल गांधी ने नेताओं को भी सख्त संदेश दे दिया है. राहुल गांधी ने कहा है कि जो नेता और कार्यकर्ता जनता के घर घर जाएंगे, मेहनत करेंगे उन्हीं को कांग्रेस पार्टी में तवज्जो दी जाएगी, उन्हीं को टिकट में वरीयता दी जाएगी. अगर कोई कितना भी बड़ा नेता है, जनता के बीच नहीं जाता है, मेहनत नहीं कर रहा है तो उसे वरीयता नहीं मिलेगी. और यह बात चिंतन शिविर के माध्यम से भी नेताओं को कहीं जाएगी.

इससे पहले सोनिया गांधी ने कांग्रेस कार्यसमिति की मीटिंग में सख्त संदेश देते हुए कहा था कि उनके पास कोई जादू की छड़ी नहीं है. कांग्रेस का कर्ज उतारने का समय आ गया है. इसके अलावा राहुल गांधी ने पिछले दिनों एक रैली में कहा था कि कांग्रेस में सभी की बात सुनी जाती है, लेकिन जो लोग मीडिया में आकर बयान बाजी कर रहे हैं, वह कहीं ना कहीं नुकसान पहुंचा रहे हैं और यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. शीर्ष नेतृत्व द्वारा दिए गए पिछले कुछ बयानों से साफ है कि अब कांग्रेस के अंदर अनुशासनहीनता बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, जिसका लाभ बीजेपी लेती रही है.

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