Rahul Gandhi update

राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से पिछले दिनों ED ने कई घंटे तक पूछताछ की. कई दिनों तक राहुल गांधी ईडी के दफ्तर गए. माहौल ऐसा भी बना कि शायद राहुल गांधी की गिरफ्तारी हो सकती है, लेकिन राहुल लगातार ईडी के सवालों का जवाब देते रहे. कांग्रेस पूरे देश में प्रदर्शन करती रही. कांग्रेस के कई बड़े नेता सड़कों पर उतर कर ईडी की कार्यवाही के खिलाफ विरोध दर्ज कराते रहे. अब सोनिया गांधी से पूछताछ हो रही है.

सोनिया गांधी से जब ईडी दफ्तर में पूछताछ हुई उस वक्त भी कांग्रेस ने पूरे देश में विरोध प्रदर्शन किया. कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने गिरफ्तारी दी. इन सबके बीच ममता बनर्जी की पार्टी में ऐलान किया है कि वह उपराष्ट्रपति के चुनाव में एनडीए के साथ-साथ कांग्रेस के उम्मीदवार का भी समर्थन नहीं करेगी. एक तरह से तृणमूल कांग्रेस ने उपराष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार किया है.

तृणमूल कांग्रेस एक राजनीतिक पार्टी है और अगर उसके पास कोई विचारधारा है तो उसे उपराष्ट्रपति के चुनाव में हिस्सा लेना चाहिए था. लेकिन कहीं ना कहीं कांग्रेस के उम्मीदवार का समर्थन न करने का ऐलान करके, चुनाव बहिष्कार का ऐलान करके उसने एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार जगदीप धनखड़ की बड़े मार्जिन से जीत सुनिश्चित करने की कोशिश की है. पिछले दिनों अभिषेक बनर्जी केंद्रीय जांच एजेंसियों के शिकंजे में भी आए थे, लेकिन अभी वह स्वतंत्र हैं, कोई पूछताछ नहीं हो रही है. लेकिन तृणमूल कांग्रेस उपराष्ट्रपति के चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी.

राहुल गांधी ने पिछले दिनों एक बयान दिया था जिसकी काफी चर्चा हुई थी और क्षेत्रीय पार्टियों ने उस बयान की आलोचना भी की थी. राहुल ने कहा था कि यह राजनीतिक लड़ाई नहीं है, यह विचारधारा की लड़ाई है और विचारधारा की लड़ाई में हमें आरएसएस और बीजेपी को हराना है. क्षेत्रीय पार्टी आरएसएस और बीजेपी को नहीं हरा सकती, क्योंकि उनके पास कोई विचारधारा नहीं है. तो राहुल गांधी ने क्या गलत कहा था? ममता बनर्जी ने तो उनकी बात को सही साबित कर दिया. विचारधारा की लड़ाई में इधर या उधर रहना ही पड़ता है. लेकिन ममता बनर्जी ने और उनकी पार्टी ने क्या फैसला लिया?

क्षेत्रीय दलों पर राहुल गांधी के बयान पर बवाल मच गया था. आरजेडी और डीएमके जैसे अपवाद छोड़ देंं तो ईडी-सीबीआई-इनकम टैक्स ने लगभग सभी से या तो पाले बदलवायें हैं या शांत किया है. राहुल गांधी से ईडी ने 55 घंटे पूछ्ताछ की है, सोनिया गांधी से जारी है – कांग्रेस फिर भी अडिग है. अब तो विचारधारा को लेकर बीजेपी और आरएसएस का विरोध करने वाली जनता को सोचना होगा कि उन्हें विचारधारा की लड़ाई में क्षेत्रीय पार्टियों को समर्थन देकर कांग्रेस को कमजोर और बीजेपी को मजबूत करना है या फिर खुलकर इस विचारधारा की लड़ाई में उसका साथ देना है, जो किसी भी जांच एजेंसी के दबाव में झुकने को तैयार नहीं है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here