Raj Thackeray uddhav

शिवसेना के बागी विधायक उद्धव ठाकरे के चचेरे भाई राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना में शामिल हो सकते हैं. इसके पीछे कारण यह है कि शिंदे के पास दो तिहाई, यानी 37 से ज्यादा विधायकों का समर्थन होने के बावजूद विधानसभा में अलग पार्टी की मान्यता मिलना आसान नहीं है. अगर बागी गुट राष्ट्रपति चुनाव से पहले मसले का हल चाहता है तो उसके पास सबसे आसान रास्ता खुद का किसी दल में विलय करना है. ऐसे में एक बड़ी संभावना मनसे में शामिल होने की ही है.

कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शिंदे गुट की ओर से एक ऑफर राज ठाकरे की पार्टी को दिया गया है. हालांकि अभी इस पर राज ठाकरे विचार करेंगे. मीडिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अभी सिर्फ दोनों पक्ष में बातचीत हो रही है. इस बीच एकनाथ शिंदे ने भी राज ठाकरे से तीन बार बात की है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि एकनाथ शिंदे डिप्टी स्पीकर नरहरि जीरवाल द्वारा अपात्र करार दिए गए अपने 16 विधायकों को बचाने के लिए जल्द से जल्द पहले से मौजूद किसी राजनीतिक दल से मिले करना चाहते हैं.

राज ठाकरे की पार्टी का भले ही विधानसभा में एक विधायक है, लेकिन पार्टी लगभग पूरे महाराष्ट्र में स्थापित है. ऐसे में किसी अन्य दल के साथ विलय की जगह शिंदे गुट के लिए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना सबसे सटीक पार्टी होगी. जानकारी के मुताबिक बीजेपी ने शिवसेना को पटखनी देने के लिए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का इस्तेमाल करने की तैयारी कर ली थी. सूत्रों के मुताबिक कई दौर की बातचीत के बाद दोनों दलों के 14 जून को विलय की चर्चा भी शुरू हो गई थी. इस गठबंधन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी हरी झंडी दिखा दी थी. ऐसे में माना जा रहा है कि शिंदे गुट को मन से से जोड़ बीजेपी अपना प्लान को सफल कर सकती है.

मीडिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया जा रहा है कि आगामी महानगरपालिका चुनाव में बीजेपी मुंबई और पुणे में मनसे को कुछ सीटें देगी, बाकी राज्य में बीजेपी अपने दम पर चुनाव लड़ेगी. इस बारे में बीजेपी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के बीच अंतिम बैठक 21 अप्रैल को हुई थी. इसमें संघ के लोग भी मौजूद थे. इसी बैठक में गठबंधन पर सैद्धांतिक सहमति बनी. सीटों के बंटवारे सहित कुछ अन्य सवाल पर बाद में फैसला किया गया.

पिछले कुछ महीनों में राज ठाकरे महाराष्ट्र में धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकर को लेकर महाविकास आघाडी सरकार पर हमलावर हैं. वह इस मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार की आलोचना और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की तारीफ भी कर चुके हैं. इस मुद्दे पर राज ठाकरे को फ्रंट फुट पर खेलने का मौका मिल गया था. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज ठाकरे का हिंदुत्व एजेंडा अचानक नहीं, बल्कि सोच-समझकर उठाया गया कदम है और यह महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के राजनीतिक विस्तार का हिस्सा है. इसलिए शिंदे गुटके मनसे में विलय की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

शिंदे गुट का राज ठाकरे की पार्टी में विलय की संभावना क्यों है?

दोनों के साथ आने से जमीनी कार्यकर्ताओं में टकराव की स्थिति पैदा नहीं होगी. कांग्रेस और एनसीपी के साथ शिवसेना के जाने के कारण असंतुष्ट हआ शिवसैनिक भी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को स्वीकार कर लेगा. बीजेपी उद्धव ठाकरे की शिवसेना को डैमेज करने के लिए राज ठाकरे को नए हिंदुत्व नेता के तौर पर प्रचारित करना चाहती है. इसलिए यह राज ठाकरे के लिए सबसे बड़ा मौका होगा. राज भी अपनी पार्टी में नई जान लाना चाहते हैं. ऐसे में अगर शिंदे गुट उनके साथ आता है और वह बीजेपी के साथ महाराष्ट्र में सरकार बनाते हैं तो उनकी पार्टी मजबूती से पूरे महाराष्ट्र में स्थापित हो जाएगी.

बीजेपी की योजना यह भी होगी कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को मिलाकर वह उद्धव की शिवसेना के वोट बैंक में सेंध लगा सकें. इससे मुंबई, पुणे और राज्य के अन्य नगर निगम चुनाव पर काफी असर पड़ेगा. बीजेपी को उम्मीद है कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना शिंदे गुड और भगवा झंडे के साथ अपने नए अवतार में स्थानीय निकाय चुनाव में कम से कम बड़े शहरों मुंबई, ठाणे, कल्याण, डोंबिवली और नासिक में जीत सकती है. दूसरी तरफ शिवसेना के संगठन पर उद्धव ठाकरे की अभी भी पकड़ मजबूत है. बीजेपी और शिंदे गुट के लिए यह सबसे बड़ी चिंता है.

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