Surya Pratap Singh2

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यानी मंगलवार को अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह यूनिवर्सिटी (Raja Mahendra Pratap Singh University) का शिलान्यास किया है. शिलान्यास के मौके पर जनता को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बातें कहीं. उन्होंने अलीगढ़ के एक मुस्लिम ताले वाले का भी जिक्र किया, जो उनके पिता का दोस्त हुआ करता था, ऐसा प्रधानमंत्री का कहना था.

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले भ्रष्टाचारियों के हवाले कामकाज था. राज्य में गुंडे माफियाओं की चलती थी. योगी सरकार में केवल विकास का काम होता है. लेकिन अब वसूली करने वाले माफिया राज चलाने वाले सलाखों के पीछे हैं. यूपी में लोग भूल नहीं सकते कि पहले यहां किस तरह से घोटाले होते थे.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यहां के लोग भूल नहीं सकते कि किस तरह राज-काज को भ्रष्टाचारियों के हवाले कर दिया गया था. आज योगी जी की सरकार पूरी इमानदारी से यूपी के विकास में जुटी हुई है. उन्होंने कहा कि एक दौर था जब यहां शासन प्रशासन गुंडों और माफियाओं की मनमानी से चलता था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उत्तर प्रदेश की जनता को संबोधित करते हुए जो बातें की गई उस पर रिटायर्ड आईएएस सूर्य प्रताप सिंह (Surya Pratap Singh) ने कटाक्ष किया है और एक तरह से प्रधानमंत्री मोदी की बातों को खारिज किया है. उन्होंने ट्वीट करके लिखा है कि, आज PM मोदी ने कहा- भारत की बदलती पहचान का केंद्र बना है उत्तर प्रदेश. क्या हाथरस की बेटी या फिर….पंचायत चुनाव में हुए चीरहरण की बात कर रहे थे, PM मोदी?

इसके अलावा सूर्य प्रताप सिंह (Surya Pratap Singh) ने एक और ट्वीट किया है. उसमें उन्होंने लिखा है कि, दरअसल माजरा ये है कि ‘हर-हर महादेव’ व ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे ने पश्चिमी उ. प्र. में BJP की नींव हिला दी है. इस क्षेत्र में जाट-मुसलमान एकता सियासत की नई इबारत लिख सकती है. यूनिवर्सिटी बनानी थी,तो साढ़े 4 साल में बना देते,अब तो ये चुनावी ड्रामा है.

अलीगढ़ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना बचपन का रिश्ता भी जोड़ा. उन्होंने कहा कि बचपन में ही सुन लिया था सीतापुर और अलीगढ़ का नाम. उन्होंने कहा कि मुस्लिम ताले वाले सेल्समैन होने के नाते हर 3 महीने में आते थे. वह जो पैसे दूसरे दुकानदारों से वसूल करके लाते थे, उनको मेरे पिताजी के पास छोड़ देते थे. मेरे पिताजी उन पैसों को संभालते थे, फिर जब वह गांव छोड़कर जाते थे तब अपने पैसे ले जाते थे.

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