Rohini Singh

देश के लाखों घरों में मातम छाया हुआ है. किसी के घर पर कोरोना वायरस के कारण मौत हुई है तो किसी के परिजन अभी भी जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं अस्पतालों में, तो कुछ घरों में ही. कोरोना वायरस का कहर बढ़ता जा रहा है. हजारों जानें लील चुका है. पूरा देश इस समय सहमा हुआ है.

सोशल मीडिया पर तमाम लोग एक दूसरे से मदद मांग रहे हैं. कोई ऑक्सीजन मांग रहा है तो कोई हॉस्पिटल में एक बेड दिलाने की गुजारिश कर रहा है. सोशल मीडिया पर लोग एक दूसरे की बढ़-चढ़कर मदद भी कर रहे हैं. लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी चरमराई हुई है कि चाह कर भी बहुत से लोगों की मदद नहीं हो पा रही है.

इन सबके बीच भाजपा की खूब आलोचना हो चुकी है बंगाल की चुनावी रैलियों को लेकर और रोड शो को लेकर. मेंस्ट्रीम मीडिया अभी भी सिस्टम की आड़ में छुपकर मोदी सरकार को बचाने की कोशिश कर रहा है. मोदी सरकार की नाकामी को मीडिया भरसक छुपाने की कोशिश कर रहा है. अभी भी मीडिया प्रधानमंत्री मोदी को कटघरे में खड़ा करके सवाल नहीं कर रहा है, मोदी सरकार के मंत्रियों से सवाल नहीं कर रहा है.

श्मशान घाट में कूपन बट रहे हैं, लाइनें लगी हुई है. श्मशान घाट लाशों से पटे हुए हैं. इन सबके बीच आज बंगाल में आखिरी चरण का चुनाव था और आखिरी चरण के चुनाव के बाद मेंस्ट्रीम मीडिया ने सारी हदें पार कर दी. देश में लाखों लोग जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं, हजारों लोग मौत के मुंह में समा चुके हैं और मीडिया एग्जिट पोल दिखा रहा है. जिसके घर मौत हुई है जो ऑक्ससीजन के लिए भटक रहे है उनको कौन पार्टी जीत हार रही है, क्या फर्क पड़ेगा?

मोदी सरकार की नाकामियों का पहाड़ खड़ा है इस समय देश में और इसपर डिबेट कराने की जगह मीडिया दिखा रहा है कि चुनावी जीत कौन सी पार्टी की होगी. मीडिया दिखा रहा है कि भाजपा कहां-कहां जीत रही है. मीडिया लाशों के ढेर को नजरअंदाज करके चुनावी जश्न मनाने की कोशिश कर रहा है. यह एक तरह से उन लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है, जिनके परिजन मौत के मुंह में समा चुके हैं या फिर जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं.

मीडिया जनता के मुद्दे से जनता का ही ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है. इसी को लेकर वरिष्ठ पत्रकार रोहिणी सिंह ने ट्वीट किया है उन्होंने लिखा है कि, सभी समाचार चैनलों पर ‘एग्ज़िट पोल’ की धूम है. तो क्या अब लाशों का ढेर ‘न्यू नॉर्मल’ है? तो क्या अब आक्सीजन बिना तड़पते मरीज ‘TRP गेनर’ नहीं रहे? तो क्या अब ‘सिस्टम’ से भी सवाल नहीं पूछा जाएगा? देश जल रहा है, मीडिया में ‘TRP उत्सव’ चल रहा है.

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