sachin rahul

कांग्रेस लंबे समय से अपनी पार्टी के भीतर संघर्ष कर रही है. राजस्थान से लेकर मध्य प्रदेश तथा पंजाब तक यही देखने को मिला है कि बीजेपी से कहीं अधिक कांग्रेस के नेता आपस में ही लड़ रहे हैं.

मध्यप्रदेश में तो आपसी खींचतान का नतीजा यह हुआ कि अच्छी खासी कांग्रेस की चलती हुई सरकार चली गई. इसके लिए दिग्विजय सिंह, कमलनाथ तथा सिंधिया की आपसी खींचतान को वजह माना गया और बाद में ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने बीजेपी ज्वाइन कर ली थी.

ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी ज्वाइन करने के बाद राजस्थान में भी ऐसी संभावना जताई गई और ऐसा कहा गया कि सचिन पायलट (Sachin Pilot) नाराज चल रहे है. यह भी बताया गया कि सचिन पायलट दिल्ली में डेरा डाले हुए थे. लेकिन राजस्थान की सरकार बच गई और राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप के बाद सचिन पायलट शांत बैठ गए थे.

लेकिन सचिन पायलट ने कहा था कि जिन कार्यकर्ताओं के दम पर राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनी थी, उन कार्यकर्ताओं को उनके अधिकार मिलने चाहिए, उनको सम्मान मिलना चाहिए तथा सरकार में उन्हें उचित सम्मान भी मिलना चाहिए. लेकिन अभी तक देखा जाए तो सचिन पायलट की मांगों पर अधिक ध्यान नहीं दिया गया है और अशोक गहलोत अपने हिसाब से सरकार चला रहे हैं.

सचिन पायलट ने एक बार फिर से अपनी मांग को दोहराया है और उन्होंने बयान दिया है कि, कांग्रेस के जिन कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस की सरकार लाने के लिए खून पसीना बहाया है. उनको लगना चाहिए कि सरकार में उनकी भागीदारी है, उनको मान सम्मान मिलना चाहिए

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