Akshay Kumar Samrat Prithviraj

अक्षय कुमार (Akshay Kumar) की फिल्म “सम्राट पृथ्वीराज” (Samrat Prithviraj) तमाम विवादों के बीच रिलीज होने जा रही है. फिल्म अपने नाम से लेकर कहानी तक को लेकर विवादों के जरिए लगातार सुर्खियों में बनी हुई है. पिछले दिनों अक्षय कुमार का बयान भी काफी सुर्खियों में रहा, जिसमें उन्होंने कहा कि इतिहास में हमें भारतीय राजाओं के बारे में नहीं पढ़ाया गया. उनकी खूब आलोचना हुई इस बयान को लेकर. कुल मिलाकर इस फिल्म को सुर्खियों में अलग अलग तरीके से रखा गया.

अब इस फिल्म के नाम के साथ एक विवाद और जुड़ गया है. दरअसल “सम्राट पृथ्वीराज” को ओमान और कुवैत में बैन कर दिया गया है. इस फिल्म को बैन किए जाने का फैसला किस आधार पर लिया गया है इसके बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है. लेकिन फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग देखने के बाद यूपी में “सम्राट पृथ्वीराज” को टैक्स फ्री कर दिया गया है. बहुत हद तक संभव है कि पृथ्वीराज के ऐतिहासिक महत्व और राजनीतिक लाभ को देखते हुए अन्य राज्य भी इसे टैक्स फ्री करने का फैसला ले सकते हैं.

लेकिन इन सब बातों से हटकर सवाल यह है कि आखिर वह क्या वजह रही होंगी कि ओमान और कुवैत में अक्षय कुमार की इस फिल्म को बैन करने का फैसला लिया गया? मध्यकालीन महाकाव्य “पृथ्वीराज रासो” पर आधारित “सम्राट पृथ्वीराज” एक पीरियड ड्रामा फिल्म है. इस फिल्म में “पृथ्वीराज चौहान” को भारत के आखरी हिंदू सम्राट के तौर पर दिखाया गया है और इतिहास के पन्नों पर नजर डालें तो यह बात सही भी लगती है. क्योंकि 1192 मे हुए तराइन के युद्ध में पृथ्वीराज चौहान के पराजित होने के साथ ही दिल्ली की सत्ता पर ब्रह्म आक्रांताओं का कब्जा हो गया था.

तो इसे ओमान और कुवैत में बैन क्यों कर दिया गया? मुस्लिम आक्रांता और लुटेरे मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज के बीच हुए युद्धों को फिल्म “सम्राट पृथ्वीराज” में दिखाया गया है. क्या केवल इस वजह से फिल्म को मुस्लिम विरोधी कहा जा सकता है? इतिहास में अगर ऐसा कोई युद्ध हुआ है और उस पर आधारित फिल्म बन रही है तो इससे मुस्लिम विरोधी नहीं साबित किया जा सकता है. मुस्लिम आक्रांता मोहम्मद गौरी को ऐतिहासिक तथ्यों को खारिज करते हुए क्या एक ईसाई हमलावर के तौर पर दिखाए जाने से इतिहास में हुए हुई घटनाएं बदल जाएंगी?

अक्षय कुमार इतिहास के बारे में कोई भी राय रखकर फिल्म को सुर्खियों में बना रहे हो लेकिन फिल्म महाकवि चंदबरदाई की पृथ्वीराज रासो पर आधारित है लेकिन इसके साथ ही रातों के प्रादेशिक स्तर पर किए गए अलग-अलग संस्करणों का भी अध्ययन इसमें शामिल नजर आता है. पृथ्वीराज कहने को तो एक महान भारतीय योद्धा और राजा की कहानी है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देश के अंदर ऐसे महानायकों को जाति के बंधन में बांटने की कोशिश काफी तेज हुई है. इतिहास के भारतीय महानायको पर अलग-अलग जातियों द्वारा दावा किया जाता है कि वह उनकी जाति के थे.

सम्राट पृथ्वीराज के ओमान और कुवैत में बैन होने से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अपने अपने नायकों को लेकर हर कोई अपनी स्वतंत्र राय रखता है शायद वह मान और कुवैत के लिए मोहम्मद गौरी महानायक होगा और यह देश उस पर अपना दावा मजबूत करने के लिए इस फिल्म को बैन कर रहे होंगे या यह भी हो सकता है कि इन मुस्लिम देशों से अपने उम्माह को कोई संदेश दिया जा रहा है क्योंकि भारत के मध्यकालीन इतिहास में पृथ्वीराज की मौत के बाद ही दिल्ली की सत्ता पर गुलाम वंश की स्थापना का रास्ता खुला था फिल्म सम्राट पृथ्वीराज पर लगे बैन को समझना इतना भी आसान नहीं है.

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