shiv sena

शिवसेना ने विपक्ष को निशाने पर लिया है. शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में देशमुख के मुद्दे पर विपक्ष पर जमकर निशाना साधा है. सामना में लिखा है कि देशमुख को अलग न्याय, येदियुरप्पा को अलग न्याय. सामना में लिखा है.

विपक्ष के पास कोई सबूत ना होते हुए केवल हवा हावी आरोप कर राज्य सरकार को बदनाम करने की साज़िश की जा रही है. सामना में लिखा है, अनिल देशमुख पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपो के मामले में एक न्याय और सीएम येदियुरप्पा को दूसरा ये कैसे ? सामना में लिखा है की, अनिल देशमुख पर आरोपों के हवाई फायर होने के दौरान उच्च न्यायालय ने उनकी सीबीआई जांच का आदेश दिया.

सामना में लिखा है, उसी समय कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा पर लगे भ्रष्टाचार के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें राहत दी है. सर्वोच्च न्यायालय ने येदियुरप्पा पर भ्रष्टाचार के मामलों में स्थगनादेश दे दिया है. मतलब देशमुख को अलग न्याय व येदियुरप्पा को अलग न्याय.

राज्य को बदनाम करने का यह षड्यंत्र

सामना ने बीजेपी के नेताओं पर हमल करते हुए लिखा, महाराष्ट्र में विपक्ष रोज उठकर ‘आज इस मंत्री को डुबाएंगे, कल उस मंत्री की ‘विकेट’ गिराएंगे’, ऐसा बयान देता है. केंद्रीय जांच एजेंसियां हाथ में नहीं होतीं तो उनकी ऐसी बेसिर-पैर की बातें करने की हिम्मत ही नहीं हुई होती. राज्य को बदनाम करने का यह षड्यंत्र है.

इससे पहले महाराष्ट्र में विपक्ष ने सत्ताधारियों पर आरोप लगाकर धूल उड़ाई है. कई बार मंत्री और मुख्यमंत्रियों को जाना पड़ा है, परंतु उनमें आज के विपक्ष जैसा द्वेष और जहर भरा नहीं था. विपक्ष के हाथ में सचमुच कुछ प्रमाण था इसलिए हंगामा किया. आज साबुन के बुलबुले उड़ाकर ‘बम-बम’ ऐसी दहशत निर्माण की जा रही है.

शरद पवार ने ही महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी सरकार बनवाई थी. अब कांग्रेस को डर यही है कि पवार ही महाराष्ट्र सरकार को गिरा सकते हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र कांग्रेस को डर है कि कहीं पवार फिर ना बदल जाएं शक का कारण गुजरात में हुई पवार और अमित शाह की कथित मुलाकात है. कांग्रेस नेताओं को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं देशमुख के मामले में केंद्र का शिकंजा कसता देख पवार बदल ना जाएं.

महाराष्ट्र की उद्धव सरकार पवार के दम पर ही टिकी हुई है. सूत्रों के मुताबिक अगले एक दो दिनों में महाराष्ट्र सरकार के मंत्रिमंडल में फेरबदल पर भी चर्चा हो सकती है. पिछले हफ्ते महाराष्ट्र के राजनीतिक हालात को लेकर हुई कांग्रेस की रिव्यू बैठक में सोनिया गांधी को सभी स्थितियों से अवगत कराया गया.

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