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महाराष्ट्र में जबरदस्त सियासी उठापटक और पाला बदल के बीच शिवसेना (Shiv Sena) ने बीजेपी और अपने ही बागी विधायकों पर जबरदस्त तरीके से प्रहार किया है. शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में मौजूदा सियासी तूफान को “स्वप्नदोष” की तरह बताया है. पार्टी ने अपने बागियों को चेताया है कि समय रहते सावधान हो जाएं वरना उन्हें कचरे में फेंक दिया जाएगा.

सामना में लिखा गया है कि शिव सैनिकों ने ठान लिया तो सभी लोग हमेशा के लिए “भूतपूर्व” हो जाएंगे, इसके पहले की बगावतो का इतिहास यही कहता है. समय रहते सावधान हो जाओ समझदार बनो. देवेंद्र फडणवीस का नाम लिए बगैर सामना में लिखा गया है कि अकोला के विधायक नितिन देशमुख सूरत से मुंबई लौट आए हैं और उन्होंने जो हुआ इस बारे में सनसनीखेज सच्चाई बताई है.

सामना में लिखा गया है कि, भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र में सरकार स्थापना के लिए गुप्त बैठक शुरू की है. मुंबई के सागर (देवेंद्र फडणवीस का निवास) बंगले में उत्साह की लहर उफान मार रही है. परंतु भाजपा किसके बल पर सरकारी स्थापित करना चाहती हैं? बागी नेता तथा महाराष्ट्र के नगर विकास मंत्री शिंदे और उनके साथ मौजूद विधायकों को पहले मुंबई आना होगा. विश्वास मत प्रस्ताव के समय महाराष्ट्र की जनता की नजर से नजर मिला कर विधान भवन की सीढ़ी चढ़ना होगी. शिवसेना ने प्रत्याशी बनाया, मेहनत से जीता कर लाए और अब बेईमानी कर रहे हो? इन सवालों का जवाब देना पड़ेगा.

शिवसेना का कहना है कि विधानसभा में जो होना है वह होगा, परंतु मुख्यमंत्री के रूप में उद्धव ठाकरे की लोकप्रियता शिखर पर है. लोक मन में उद्धव ठाकरे प्रिय हैं. शिवसेना का संगठन मजबूत है. बागी विधायकों के लिए सामना में लिखा गया है कि, आज जो भाजपा वाले उन्हें हाथों की हथेली पर आए जख्मों की तरह संभाल रहे हैं वह आवश्यकता समाप्त होते ही पुनः कचरे में फेंक देंगे भाजपा की यही परंपरा रही है. महाराष्ट्र में उठापटक के बीच शिवसेना ने लिखा है कि कोई कितना भी जोर लगा रहा हो फिर भी तूफान खत्म होगा और आकाश साफ होगा. महाराष्ट्र में नई सरकार स्थापित करने का सपना किसी ने देखा ही होगा तो वह उनका स्वप्नदोष है.

मजाक कर रही भाजपा

अपनी ही पार्टी में टूट के खतरे को झेल रही शिवसेना ने सामना में लिखा है कि, भाजपा को यह मजाक नहीं करना चाहिए कि शिवसेना में जो कि घटनाक्रम चल रहा है उससे उसका कोई संबंध नहीं है. यह मजाक भाजपा को नहीं करना चाहिए. सूरत के जिस होटल में यह महामंडल था वहां महाराष्ट्र के भाजपाई उपस्थित थे. फिर सूरत से इन लोगों को असम ले जाते ही गुवाहाटी हवाई अड्डे पर असम के मंत्री स्वागत करने के लिए मौजूद रहते हैं. महाराष्ट्र की जनता इतनी मूर्ख नहीं है कि वह इसके पीछे का सच नहीं जान सकती. होटल, हवाई जहाज, वाहन, घोड़े, विशेष सुरक्षा व्यवस्था भाजपा सरकार की ही कृपा नहीं है क्या?

सामना में लिखा गया है कि महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रमों का अंत क्या होगा, यह कोई भी नहीं कह सकता. उस पर हमारे महामहिम राज्यपाल श्रीमान कोश्यारी जी कोरोना से ग्रस्त हो गए हैं. इसलिए राज्य के विपक्षियों का राज भवन में आना-जाना भी थोड़ा थम गया है. राज्य सरकार का निश्चित तौर पर क्या होगा, इस पर शर्तें लगी है. शिवसेना में खड़ी फूट पड़ गई है, सरकार संकट में आ गई, अब क्या होगा, इस पर चर्चा गर्म है.

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