Subramanian Swamy Sonia Gandhi Rahul Gandhi

कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से प्रवर्तन निदेशालय फिर से नए सिरे से पूछताछ कर सकता है. मीडिया सूत्रों के हवाले से दावा कर रही है कि प्रवर्तन निदेशालय सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बयानों की दोबारा जांच पड़ताल करने की तैयारी कर रहा है. मीडिया में दावा किया जा रहा है कि जो दस्तावेज अब प्रवर्तन निदेशालय को मिले हैं उनमें मुंबई और कोलकाता के हवाला लिंक जुड़ रहे हैं. इस केस में राहुल गांधी से 50 घंटे तक पूछताछ हो चुकी है और सोनिया गांधी से भी 12 घंटे पूछताछ हो चुकी है.

मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि यंग इंडिया के दफ्तर की छानबीन के दौरान जांच अधिकारियों को कुछ ऐसे दस्तावेज मिले हैं जो नेशनल हेराल्ड और उससे जुड़ी कंपनियों के अन्य स्रोतों से हवाला ट्रांजैक्शन की तरफ इशारा कर रहे हैं. यह सब कुछ खबरें मीडिया सूत्रों के हवाले से दिखा रही है. इस बीच मीडिया में सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanian Swamy) ने दावा किया है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी जेल जाएंगे. आपको बताते चलें कि सबसे पहले सुब्रह्मण्यम स्वामी ही शिकायत लेकर कोर्ट गए थे. यहां पर यह बताना भी महत्वपूर्ण है कि सुब्रमण्यम स्वामी किसी पर भी आरोप लगाने के लिए जाने जाते हैं.

एक इंटरव्यू के दौरान दैनिक भास्कर की तरफ से सुब्रमण्यम स्वामी से पूछा गया था केस में अब आगे क्या होगा? उन्होंने सोनिया गांधी और राहुल गांधी की तरफ इशारा करते हुए जवाब दिया था कि, यह जेल जाएंगे. इनको पहले जेल में रखा जाएगा. फिर कोर्ट में आना होगा. बहस के बाद प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत सजा होगी. पिछले दिनों जब यंग इंडिया का ऑफिस अस्थाई रूप से सील किया गया तो कांग्रेस के मीडिया प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कई ट्वीट किए और उसी में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को भी लपेट दिया.

आपको बता दें कि संजय राउत को भी प्रवर्तन निदेशालय ने ऐसे ही मामले में गिरफ्तार किया है. ठीक इसी तरह 1 दिन ईडी की टीम महाराष्ट्र सरकार में तत्कालीन मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक को उठा ले गई. लेकिन शरद पवार को अब तक हाथ नहीं लगा सकी है. 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान ईडी ने शरद पवार को भी समन भेजा था, लेकिन जब एनसीपी नेता ने प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर ऐलान कर दिया कि वह खुद जांच एजेंसी के दफ्तर पहुंचकर पेश होंगे तो पूरे शहर में हड़कंप मच गया.

बड़े बड़े अधिकारी शरद पवार से अपील करने लगे कि वह अपना प्रोग्राम रद्द कर दें. ईडी की तरफ से भी औपचारिक तौर पर आश्वस्त किया गया कि उनको पेश होने के लिए दफ्तर आने की जरूरत नहीं है. तब जाकर मामला शांत हुआ था. इन सभी बातों पर गौर किया जाए और मौजूदा मुद्दे पर वापस लौटे और अगर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के सामने आने वाली परिस्थितियों को समझने की कोशिश करें तो यही दिखाई देता है की जहां जनता का समर्थन है वहां कार्यवाही नहीं हुई, जहां हंगामा हुआ वहां कार्यवाही नहीं हुई, गिरफ्तारी नहीं हुई.

राहुल गांधी से जब पूछताछ हुई उस वक्त भी काफी बवाल हुआ, सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हुआ. सोनिया गांधी से जब पूछताछ हुई उस वक्त भी सड़कों पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव में जानबूझकर गांधी परिवार को परेशान करने की कोशिश हो रही है. राहुल गांधी कई बार कह चुके हैं कि उनके ऊपर एक दाग नहीं है, यह लोग मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते. राहुल से जो पूछताछ हुई उसके बाद बाहर आकर उन्होंने बताया था कि ई डी के कर्मचारियों से उनकी क्या क्या बात हुई.

सोनिया गांधी से जब पूछताछ हुई उस वक्त कांग्रेस कार्यकारिणी के सदस्यों ने भी विरोध में गिरफ्तारियां दी और विपक्षी दलों के नेताओं की तरफ से भी प्रवर्तन निदेशालय की कार्यवाही के विरोध में साझा बयान जारी किया गया. सारी बातें अपनी जगह ठीक है लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि इन सब में जनता कहां है? क्या जनता यह समझ रही है कि राजनीतिक द्वेष के तहत बार-बार पूछताछ हो रही है? क्योंकि पिछले कुछ सालों में ऐसा कोई मामला दिखाई नहीं दिया है जहां बीजेपी के किसी बड़े नेता के खिलाफ ईडी की कोई कार्यवाही हुई हो या गिरफ्तारी हुई हो. तो क्या जनता यह समझ रही है कि सिर्फ विपक्ष के नेताओं के खिलाफ ही ऐसे मामले उठ रहे हैं?

पिछले दिनों कांग्रेस ने महंगाई बेरोजगारी और जीएसटी के मुद्दे पर ब्लैक प्रोटेस्ट किया. जनता का समर्थन भी कांग्रेस को हासिल हुआ और इस पूरे प्रोटेस्ट से बीजेपी हिली हुई दिखाई दी. मीडिया पूरा बैकफुट पर नजर आया और जिस कांग्रेस को मीडिया ने पिछले 8 साल से दरकिनार किया हुआ है उस कांग्रेस के प्रदर्शन को मीडिया में जबरदस्त कवरेज मिली. जहां तक सोनिया गांधी और राहुल गांधी की गिरफ्तारी का सवाल है तो अगर कुछ गलत नहीं हुआ है तो जांच एजेंसियां गिरफ्तारी नहीं करेंगी. सुब्रमण्यम स्वामी तो दावे कई तरह के करते रहे हैं, लेकिन बिना किसी ठोस सबूत के गांधी परिवार को गिरफ्तार करना आसान नहीं होगा.

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